एनडीपीएस एक्ट के तहत रिया गिरफ्तार, जानें इस अधिनियम में होने वाली सजा के बारे में सब कुछ
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बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में ड्रग्स का एंगल सामने आने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने जांच तेज कर दी है। ब्यूरो ने दो दिन की पूछताछ के बाद मंगलवार को रिया को गिरफ्तार किया। इससे पहले एनसीबी रिया के भाई शौविक चक्रवर्ती और सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
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बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में ड्रग्स का एंगल सामने आने के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) ने जांच तेज कर दी है। ब्यूरो ने दो दिन की पूछताछ के बाद मंगलवार को रिया को गिरफ्तार किया। इससे पहले एनसीबी रिया के भाई शौविक चक्रवर्ती और सुशांत के हाउस मैनेजर सैमुअल मिरांडा को भी गिरफ्तार कर चुकी है।
इन्हें नारकोटिक्स ड्रग्स साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (एनडीपीएस) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया है। अगर रिया दोषी पाई जाती हैं तो जिन धाराओं के तहत उनकी गिरफ्तारी हुई है, उसके अनुसार उन्हें 10 साल तक की अधिकतम सजा हो सकती है। आइए आज हम आपको बताते हैं कि ये अधिनियम क्या है और इसके तहत क्या सजा दी जाती है।
1985 में बना कानून
भारतीय संसद ने 1985 में एनडीपीएस एक्ट पारित किया था। नारकोटिक्स का मतलब नींद और साइकोट्रोपिक वे पदार्थ होते हैं जो मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर देते हैं। कुछ ड्रग्स और पदार्थ ऐसे होते हैं जिनका उत्पादन और बिक्री जरूरी है लेकिन उनका अनियमित उत्पादन या बिक्री नहीं की जा सकती है। इसपर सरकार ने कड़े प्रतिबंध और विनियमन लगाए हुए हैं क्योंकि इनका अत्यधिक मात्रा में उपयोग नशे के लिए होता है। जो मानव समाज के लिए खतरनाक हो सकता है। इससे बचाव के लिए ही कड़े नियम बनाए गए हैं।
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अधिनियम के तहत कौन से ड्रग्स हैं प्रतिबंधित
एनडीपीएस अधिनियम में प्रतिबंधित ड्रग्स को लेकर एक अनुसूची दी गई है। इसमें केंद्र सरकार उन ड्रग्स को सम्मलित करती है जिनका नशे में प्रयोग होना मानव जीवन के लिए संकट पैदा कर सकता है। इन ड्रग्स का इस्तेमाल जीवन बचाने वाली दवाई और अन्य स्थानों पर होता है लेकिन इन्हीं को नशे के लिए भी उपयोग किया जाता है। इस कारण इनपर पूरी तरह से प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता लेकिन विनियमन किया जा सकता है। इन ड्रग्स में कोका प्लांट्स, कैनाबिस, ओपियम पॉपी जैसे पौधे को शामिल किया गया है।
मात्रा के आधार पर तय होती है सजा
- अल्पमात्रा- इसमें एक साल तक की जेल और 10000 रुपये तक के जुर्माना की सजा दी जा सकती है।
- अल्प और वाणिजियक मात्रा के बीच की मात्रा- इसमें दस साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
- वाणिज्यिक मात्रा- इसमें बीस साल तक की जेल और कम से कम एक लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा दी जा सकती है।
अधिनियम के तहत मात्रा का निर्धारण समय-समय पर केंद्र द्वारा किया जाता है। इसके तहत भारत के सीमा क्षेत्र के अंदर यदि किसी व्यक्ति के पास एक ग्राम भी ड्रग्स अधिनियम के अधीन बनाए नियम या दिए आदेश के अंतर्गत अनुज्ञप्ति के बगैर मिलती है तो वह दोषी होगा। इस तरह के मामले में उसे अल्पमात्रा का दोषी पाया जाएगा। अधिनियम के अंतर्गत अनुसूची में डाले गए पदार्थो का निर्माण, विनिर्माण, कृषि, प्रकिया, क्रय, विक्रय, संग्रह, आयात, निर्यात, परिवहन और यहां तक की उपभोग भी प्रतिबंधित किया गया है। इसके उपभोग पर दंड का निर्धारण किया गया है।
| दवा | छोटी मात्रा | वाणिज्यिक मात्रा |
| एम्फैटेमिन | 2 ग्राम | 50 ग्राम |
| बुपरेनॉरफिने | 1 ग्राम | 20 ग्राम |
| चरस / गांजा | 1 ग्राम | 1 किलोग्राम |
| कोकीन | 2 ग्राम | 100 ग्राम |
| कौडीन | 10 ग्राम | 1 किलोग्राम |
| डायजेपाम | 20 ग्राम | 500 ग्राम |
| गांजा | 1 किलोग्राम | 20 किलोग्राम |
| हेरोइन | 5 ग्राम | 250 ग्राम |
| एमडीएमए | 0.5 ग्राम | 10 ग्राम |
| मेथामफेटामाइन | 2 ग्राम | 50 ग्राम |
| मेटाकुआलोने | 20 ग्राम | 500 ग्राम |
| मॉर्फिन | 5 ग्राम | 250 ग्राम |
| पॉपी स्ट्रॉ | 1 किलोग्राम | 50 किलोग्राम |
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इस अधिनियम के तहत मृत्युदंड तक का है प्रावधान
अधिनियनम की धारा 31ए के अंतर्गत एक बार दोषी ठहराया जाने वाला व्यक्ति यदि दोबारा इस तरह का अपराध करता है तो उसे मृत्युदंड तक की सजा दी जा सकती है। कानून के तहत अपराधों का प्रयास, तैयारी, उत्प्रेरणा, षड्यंत्र, उपभोग और फाइनेंस को भी अपराध माना गया है और सजा का प्रावधान है।
अधिनियम के तहत हैं तीन प्रमुख पौधे
- कोका का पौधा- इस पौधे से मुख्य तौर पर कोकेन मिलती है। यह काफी नशीली होती है।
- कैनाबिस का पौधा- इसे आमतौर पर भांग के पौधे के नाम से जाना जाता है। इसकी फूल, पत्तियों और तने को सुखाकर गांजा बनाया जाता है। पत्तियों से केवल भांग तैयार होती है। इसी पौधे की मादा प्रजाति से एक गोंद जैसा द्रव्य निकलता है जिससे चरस बनती है।
- पोस्त का पौधा- इसे अफीम के पौधे के नाम से जाना जाता है। इसकी पत्तियां नशीली नहीं होती हैं। इसका एक फल होता है डोडा जिसपर चाकू मारने से एक दूध जैसा द्रव्य निकलता है जिसके सूखने पर अफीम बनता है। डोडा के अंदर दाने होते हैं जिनका मेवों में इस्तेमाल होता है। वहीं इसके सूखे हुए खोल को डोडा चूरा कहते हैं जो अफीम से कम लेकिन नशीला होता है। इसके पौधे से मॉर्फिन मिलती है जो दर्द निवारक और नींद के लिए उपयोग होती है।
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विशेष न्यायालय में होती है सुनवाई
इस अधिनियम की धारा 36 के अंतर्गत विशेष न्यायालय का गठन किया गया है। इन न्यायालयों में इस तरह के मामलों की सुनवाई होती है। अधिनियम के तहत दोषी पाए गए शख्स को अपराधी परिवीक्षा एवं दंड प्रकिया सहिंता 1973 की धारा 360 का लाभ नहीं मिलता है।