सरोगेसी बिल को कैबिनेट की मंजूरी: पैसे देकर नहीं खरीदी जा सकती कोख
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बिल के अनुसार अब हर कोई बच्चे की चाहत में किराए की कोख नहीं ले पाएगा। हालांकि सरकार ने इस पर पाबंदी तो नहीं लगाई लेकिन कुछ शर्तों के साथ छूट दी है। बिल के अनुसार अब कोई व्यवसायिक उपयोग के लिए इसका इस्तेमाल नहीं कर पाएगा।
सरोगेसी की छूट केवल एक शर्त पर ही दी जाएगी जिसमें दंपति पूरी तरह बांझपन की बात सिद्ध कर दे। उन परिस्थितियों में केवल परोपकारी उद्देश्य के लिए ही इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
सरोगेसी मदर के लिए नियम तय कर दिया गया है, जिसमें केवल नजदीकी रिश्तेदार ही सरोगेट मदर बन सकती है। हालांकि नजदीकी रिश्तेदार को इसमें परिभाषित नहीं किया गया है। सरकार ने विदेशियों को भारत में आकर सरोगेसी मदर हायर करने के चलन पर भी अब रोक लगा दी है।
ड्राफ्ट बिल में सरोगेसी मदर के अधिकारों की रक्षा पर सरकार ने विशेष ध्यान दिया है। इसके साथ ही सरकार ने नए सरोगेसी क्लीनिक पर भी रोक लगा दी है, ऐसे मामलों पर निगाह रखने के लिए अब एक बोर्ड का भी गठन किया जाएगा।
बता दें कि सरकार ने कुछ दिन पहले संसद में भी कहा था कि सरोगेसी के संबंध में नया कानून अभी प्रस्तावित है जो पूरी प्रक्रिया को वैधानिक और पारदर्शी बनाएगा। इस जल्द ही सदन के सामने लाया जा सकता है। इस बिल को शीतकालीन सत्र में संसद पेश किया जा सकता है।
ये हैं सरोगेसी विधेयक की खास बातें
1. स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में राष्ट्रीय सरोगेसी बोर्ड का गठन किया जाएगा।
2. सरोगेसी बोर्ड में दो सांसद होंगे सदस्य।
3. सिर्फ भारतीय नागरिकों को सरोगेसी का अधिकार होगा।
4. यह अधिकार एनआरआई और ओसीआई होल्डर को नहीं मिलेगा।
5. सिंगल पैरंट्स, होमोसेक्सुअल जोड़े, लिव-इन में रहने वालों को सरोगेसी की इजाजत नहीं होगी
6. सरोगेसी के अनैतिक इस्तेमाल पर रोक लगेगी, गरीब महिलाओं की कोख किराए पर लेना होगा गुनाह।
7. सरोगेसी के व्यावसायिक इस्तेमाल पर लगेगा प्रतिबंध।
8. सरोगेसी का प्रावधान केवल निःसंतान दंपतियों के लिए।
9. निःसंतान दंपति को भी केवल एक बार होगी सरोगेसी की इजाजत।
10.एक महिला एक ही बार सरोगेट मदर बन सकेगी। उसका विवाहित होना और एक स्वस्थ बच्चे की मां होना जरूरी है।