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अब टीबी की बीमारी पर होगा सर्जिकल स्ट्राइक

Fri, 11 Nov 2016 04:54 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 11 Nov 2016 04:54 AM IST
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Surgical Strike now will be on tuberculosis

सीमा पार आतंकियों और कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक के बाद अब सरकार ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) पर सर्जिकल स्ट्राइक की तैयारी कर रही है। एक जनवरी से 15 जनवरी-2017 तक देश भर में टीबी की पहचान और इलाज के लिए पोलियो की तर्ज पर विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया गया है। दिल्ली में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सलाहकार समूह की बैठक में टीबी की दवा, जांच तकनीक और वैक्सीन पर विस्तार से चर्चा हुई।

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स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि एक जनवरी से 15 जनवरी-2017 तक देश में विशेष अभियान चला कर टीबी मरीजों की पहचान और इलाज किया जाएगा। सभी राज्यों में अभियान चलेगा और वैसे इलाकों पर फोकस किया जाएगा जहां टीबी मरीजों के होने की संभावना ज्यादा है। स्लम और दूसरे इलाकों पर भी फोकस किया जाएगा। करीब 11 लाख टीबी मरीजों का कोई पता-ठिकाना नहीं है लिहाजा उन्हें इस अभियान के माध्यम से जोड़ा जाएगा। अभियान का मूल्यांकन किया जाएगा और फिर छह माह बाद दुबारा अभियान चलाया जाएगा।
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इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की महानिदेशक डॉ. सौम्या स्वामीनाथन ने बताया कि वैश्विक स्तर पर टीबी के 95 फीसदी मामलों को 2035 का खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन भारत इस लक्ष्य को वर्ष 2025 तक पाना चाहता है। इसके लिए तेजी से काम किया जाएगा। 

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हर तीन मिनट में टीबी से दो की मौत

Surgical Strike now will be on tuberculosis

प्रधानमंत्री ने भी टीबी को खत्म करने के प्रयास को प्राथमिकता पर रखने के लिए कहा है। इसके लिए टीबी की दवाओं और जांच किट के लिए किए जा रहे शोध में तेजी लाई जाएगी। टीबी से निपटने के लिए कई देशों में तीन नई दवाओं का इस्तेमाल शुरू हो गया है। भारत में भी क्लीनिक शोध के बाद दवा का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अलावा अगले वर्ष से टीबी से बचाव के लिए वैक्सीन पर भी काम शुरू किया जाएगा।

वर्ष-2016 में जारी वैश्विक टीबी रिपोर्ट के मुताबिक हर तीन मिनट में इस बीमारी से दो भारतीयों की मौत होती है। प्रतिदिन एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत इस बीमारी से हो जाती है। भारत में प्रति वर्ष टीबी के 28 लाख नए मरीज पंजीकृत होते हैं। यह स्थिति तब है जब ज्यादातर निजी अस्पतालों की ओर से टीबी मरीजों की सूचना सरकारी एजेंसियों को नहीं दी जाती है।

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