यूपी की संदिग्ध मुठभेड़ों पर सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, राज्य सरकार को नोटिस जारी
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उत्तर प्रदेश में हुई संदिग्ध पुलिस मुठभेड़ों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट 12 फरवरी से सुनवाई करेगा। कोर्ट ने सोमवार को कहा कि इसकी गंभीरता और बारीकी से परीक्षण किए जाने की जरूरत है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) ने याचिका दायर कर कोर्ट की निगरानी में एसआईटी गठित कर एनकाउंटर की जांच की मांग की है। पीयूसीएल के वकील प्रशांत भूषण ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से स्टेटस रिपोर्ट मांगने की अपील की, क्योंकि उसने एनकाउंटर में हुई कुछ मौतों की जांच की है।
यूपी सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि पुलिस मुठभेड़ों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए मानदंड का राज्य सरकार ने पालन किया है। सभी मामलों में पोस्टमार्टम और जांच की गई है। इसे लेकर जिला कोर्ट में एक भी शिकायत नहीं की गई। इन एनकाउंटर में मारे गए लोगों पर कई आपराधिक मामले चल रहे थे। इससे पहले सरकार ने हलफनामा दाखिल कर मुठभेड़ों का बचाव किया था।
तीन लाख से अधिक आरोपियों को किया गया गिरफ्तार
सरकार ने हलफनामे में कहा है कि 20 मार्च, 2017 से 31 मार्च, 2018 के बीच 3,19,141 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा 98,526 अपराधियों ने आत्मसमर्पण किया।
एनकाउंटर में 48 अपराधी मारे गए, इनमें 30 बहुसंख्यक समुदाय के
सरकार ने बताया था कि पुलिस कार्रवाई में 48 अपराधी मारे गए, जबकि 409 जख्मी हुए। मारे गए अपराधियों में 30 बहुसंख्यक समुदाय से हैं। इन एनकाउंटर में 319 पुलिसकर्मी जख्मी हुए। इनमें चार की मौत हो गई।