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सीबीआई मामला : सरकार के हाथ से निकल अदालत के हाथों में पहुंची गेंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Thu, 25 Oct 2018 05:35 AM IST
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सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच चल रही कलह का मामला अब सरकार के हाथ से निकलता दिखाई दे रहा है। दोनों ने अदालत में याचिका दाखिल कर दी है और दोनों के भविष्य पर अब अदालत ही फैसला लेगी। हैदराबाद के व्यापारी सतीश बाबू सना की तरफ से अस्थाना को पांच करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में जो एफआईआर सीबीआई ने अपने निदेशक वर्मा के कहने पर लिखी थी, उसे अस्थाना ने दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 29 अक्तूबर को होगी।
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अदालत ने तब तक यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे यानी न तो वर्मा उनके खिलाफ कोई कदम उठाएंगे और न ही अस्थाना कोई कदम उठाएंगे।
सरकार के मंगलवार आधी रात के आदेश के बाद दोनों में से कोई भी एक-दूसरे के खिलाफ कोई कदम उठाने की स्थिति में तो नहीं रहा। लेकिन यदि अदालत एफआईआर को गलत मंशा से कायम किया हुआ मानती है तो अस्थाना को कुर्सी वापस मिल जाएगी। साथ ही जनवरी में वर्मा के रिटायर होने के बाद अस्थाना के सीबीआई निदेशक बनने का रास्ता भी साफ हो जाएगा।
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वहीं, बुधवार को वर्मा ने उन्हें पद से हटाए जाने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनका कहना है कि उन्हें पद से हटाने या छुट्टी पर भेजने का अधिकार न तो केंद्रीय सतर्कता ब्यूरो (सीवीसी) के पास है और न ही सरकार के पास। यह अधिकार सिर्फ सीबीआई निदेशक की चयन समिति को है, जिसमें प्रधानमंत्री, नेता विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस होते हैं। यदि अदालत उनके पक्ष में फैसला करती है तो वे अपने पद पर वापस आ जाएंगे और जनवरी में नियत समय पर रिटायर होंगे। हालाँकि यह अदालत पर निर्भर करता है कि वह वर्मा को अस्थाना के खिलाफ जांच की निगरानी करने का अधिकार देती है या नहीं।
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