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Supreme Court: 'लागू नहीं होने पर नियम मजाक बन जाते हैं'; पटाखों पर प्रतिबंध को लेकर शीर्ष कोर्ट की टिप्पणी

Thu, 31 Aug 2023 09:19 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 31 Aug 2023 09:19 PM IST
सार

न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ 2015 में अर्जुन गोपाल की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस याचिका में पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी।

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Supreme Court wants to know what steps taken to ban non-green firecrackers
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) जैसे नियामक निकायों से पूछा है कि उन्होंने देश भर में गैर हरित पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए क्या-क्या कदम उठाए हैं। इसके साथ ही शीर्ष कोर्ट ने यह भी कहा है कि वे प्रोटोकॉल को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराएं। 

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गुरुवार को न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ 2015 में अर्जुन गोपाल की ओर से दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इस याचिका में पटाखों के उत्पादन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध और  केंद्र और नियामक निकायों की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से ये सवाल किए। इस दौरान पीठ ने यह भी कहा कि सही से लागू नही होने पर नियम मजाक बन जाते हैं।
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 इस पर उन्होंने कहा कि विशेषज्ञ निकाय हरित पटाखों के लिए दिशानिर्देश और रासायनिक सूत्र लेकर आए हैं। अब पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन को इनके  उत्पादन और बिक्री की निगरानी करने की अनुमति दी जाएगी।
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इस दौरान, बेरियम नमक के मुद्दे पर वरिष्ठ वकील ने कहा कि इसका उपयोग दुनिया भर में पटाखों के उत्पादन में किया गया है और भारत में निर्माता प्रभावी निगरानी के लिए तमिलनाडु के शिवकाशी में एक प्रयोगशाला स्थापित करने पर भी सहमत हुए हैं।


एक अन्य वकील ने कहा कि पटाखा उद्योग में आठ लाख लोग कार्यरत हैं। एएसजी भाटी ने कहा कि पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन जैसे विशेषज्ञ निकायों ने हरित पटाखों पर कई फैसले लिए हैं। इसके बाद पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से नियामक प्रोटोकॉल को मजबूत करने के उपायों से अवगत कराने को कहा। साथ ही याचिका पर आगे की सुनवाई के लिए 13 सितंबर की तारीख तय की।

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