वोहरा कमेटी की सिफारिशें लागू करने का समय आ गया- सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने बेहिसाब संपत्ति जुटा रहे राजनेताओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) से कई तीखे सवाल किए।
इस दौरान शीर्ष अदालत ने राजनेताओं, नौकरशाहों, व्यवसायियों और अपराधियों के बीच सांठगांठ पर वोहरा कमेटी की रिपोर्ट को लागू नहीं किए जाने का भी मामला उठाया।
जस्टिस जे चेलमेश्वर और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने मंगलवार को पूछा कि वोहरा कमेटी की रिपोर्ट का क्या हुआ, जिसमें राजनेताओं, नौकरशाहों, व्यवसायियों और अपराधियों के बीच सांठगांठ पर तीखी टिप्पणी की गई थी। उसके बाद क्या हुआ? क्या अब वह समय नहीं आ गया है जब हमें उस पर अमल कर देना चाहिए?
सांसदों और विधायकों की संपत्तियों में तेजी से वृद्धि पर सीबीडीटी के हलफनामे में दी गई जानकारी पर संतोष जताते हुए पीठ ने पूछा कि सीबीडीटी क्यों सिर्फ आयकर कानून के दायरे में जांच कर रही है। उसे तो इसकी भी जांच करनी चाहिए कि सांसदों और विधायकों की दौलत में इजाफे के पीछे कौन से कारण जिम्मेदार हैं।
आय के ज्ञात स्रोतों से ज्यादा आमदनी के मामलों में जनप्रतिनिधियों पर कार्रवाई में ढील बरतने पर पीठ ने केंद्र सरकार की भी खिंचाई की।
क्या है वोहरा कमेटी?
पीठ ने कहा कि न्यायपालिका पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के दो प्रतिशत से भी कम रकम खर्च की जा रही है। औद्योगिक ट्रिब्यूनल को छोड़ दिया जाए तो किसी विशेष ट्रिब्यूनल का गठन नहीं किया गया है।
जनप्रतिनिधियों के भ्रष्टाचार के शीघ्र निपटारे के लिए संसद क्यों नहीं विशेष अदालतों का गठन करती है? इस पर अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि विशेष अदालतों का गठन करना प्राथमिकता का सवाल है। वैसे सीबीडीटी इस मामले को काफी गंभीरता से ले रही है।
पीठ ने कहा कि इस मामले में कार्रवाई को लेकर सीबीडीटी द्वारा दायर किया गया हलफनामा महज कागज का एक टुकड़ा है। इसे हलफनामा नहीं कहा जा सकता है। यह स्पष्ट नहीं है, इसलिए कार्रवाई के विस्तृत ब्यौरे के साथ दूसरा हलफनामा दायर किया जाए। अगर बोर्ड चाहता है कि कार्रवाई को लेकर कोई जानकारी जाहिर न की जाए तो उसे इसकी वजह बतानी पड़ेगी।
क्या है वोहरा कमेटी
राजनीति के अपराधीकरण पर 1993 में तत्कालीन केंद्रीय गृह सचिव एनएन वोहरा की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया था। मुंबई में सीरियल विस्फोट के बाद जांच एजेंसियों की रिपोर्ट में आए तथ्यों के बाद इस कमेटी का गठन किया गया।
इसकी रिपोर्ट में बताया गया कि राजनेताओं द्वारा आपराधिक गैंग का संचालन किया जा रहा है। अपराधी अब सांसद और विधायक बनने लगे हैं। इस रिपोर्ट के अप्रकाशित परिशिष्ट में कई विस्फोटक जानकारियां दी गई थीं।