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Supreme Court: गुरुवायुर मंदिर में तय तिथि पर ही होगी ‘उदयस्थमन पूजा’, कोर्ट ने कहा- परंपरा से खिलवाड़ नहीं

Thu, 30 Oct 2025 03:42 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु चंदेल Updated Thu, 30 Oct 2025 03:42 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि  ‘उदयस्थमन पूजा’ पारंपरिक रूप से ही होगी। यह पूजा 1972 से निरंतर हो रही है और इसमें कोई बदलाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने प्रशासन की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें उसने भीड़ प्रबंधन के लिए पूजा रद्द करने की बात कही थी।
 

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Supreme Court verdict on Udayasthamana Puja held Guruvayur temple scheduled date court said tradition not tamp
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि केरल के प्रसिद्ध गुरुवायुर श्रीकृष्ण मंदिर में ‘एकादशी’ के अवसर पर की जाने वाली ‘उदयस्थमन पूजा’ परंपरा के अनुसार ही 1 दिसंबर को आयोजित की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस पूजा में किसी भी तरह का बदलाव या हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। यह पूजा सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलने वाली विशेष धार्मिक विधि है, जिसमें लगातार 18 पूजा, होम, अभिषेक और अन्य कर्मकांड संपन्न होते हैं।
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यह फैसला जस्टिस जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने सुनाया। उन्होंने कहा कि यह पूजा वर्ष 1972 से परंपरागत रूप से की जा रही है और इसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन अस्वीकार्य है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को अपनी दलीलें पूरी करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई मार्च 2026 के लिए तय की है।
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देवस्वोम प्रशासन पर सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष गुरुवायुर श्रीकृष्ण मंदिर के देवस्वोम प्रशासन की कड़ी आलोचना की थी। प्रशासन ने भीड़ प्रबंधन का हवाला देते हुए इस पूजा को न करने का निर्णय लिया था। अदालत ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा था कि सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ना अनुचित है। 
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न्यायालय ने मंदिर के मुख्य पुजारी से भी सवाल किया था कि उन्होंने कैसे इस बदलाव को स्वीकार किया, जबकि उन्होंने स्वयं 1996 के एक लेख में कहा था कि गुरुवायुर मंदिर की पूजा-पद्धति वेदांत दार्शनिक आदि शंकराचार्य द्वारा निर्धारित की गई थी और इसमें किसी भी प्रकार का विचलन अस्वीकार्य है।

परंपरा और धार्मिक महत्व
‘उदयस्थमन पूजा’ शब्द का अर्थ है सूर्योदय (‘उदय’) से लेकर सूर्यास्त (‘अस्तमाना’) तक निरंतर चलने वाली पूजा। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के प्रति दिनभर भक्ति और यज्ञ-पूजा का विशेष आयोजन होता है। यह परंपरा भक्तों की आस्था से जुड़ी है और इसे सबसे पवित्र अवसरों में गिना जाता है। गुरुवायुर एकादशी को इस पूजा का धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों रूप से अत्यधिक महत्व है।


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याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
यह मामला पीसी हैरी और पुजारी अधिकार रखने वाले अन्य परिवारिक सदस्यों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि एकादशी मंदिर का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है और ‘उदयस्थमन पूजा’ 1972 से निरंतर की जा रही है। उनका दावा था कि यह परंपरा उससे भी पहले से चली आ रही है।

उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने इन अनुष्ठानों की व्यवस्था की थी और इनसे किसी भी प्रकार का विचलन ‘दैवीय शक्ति’ या ‘चैतन्य’ को प्रभावित कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को मान्यता दी और साफ कहा कि परंपरागत पूजा पद्धति में बदलाव अस्वीकार्य है।


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