फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Verdict NCDRC Credit Card Interest Rates 2008 order set aside

Supreme Court: 'क्रेडिट कार्ड ब्याज की सीमा 30 फीसदी तय नहीं कर सकते'; शीर्ष अदालत ने NDCRC का फैसला पलटा

Sat, 21 Dec 2024 03:01 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: ज्योति भास्कर Updated Sat, 21 Dec 2024 03:01 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा है कि क्रेडिट कार्ड ब्याज की सीमा 30 फीसदी तय नहीं की जा सकती। शीर्ष अदालत में दो जजों की खंडपीठ ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NDCRC) के 2008 में पारित फैसले को पलट दिया।

विज्ञापन
Supreme Court Verdict NCDRC Credit Card Interest Rates 2008 order set aside
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : पीटीआई

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के उस आदेश को दरकिनार कर दिया जिसमें क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर के रूप में 30 फीसदी की सीमा तय की गई थी। आयोग ने माना था कि क्रेडिट कार्ड धारकों से 36 फीसदी से 50 फीसदी प्रति वर्ष के बीच ब्याज वसूलना अत्यधिक ब्याज दर है।
विज्ञापन


2009 में उपभोक्ता आयोग के आदेश पर रोक लगी थी
जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने एचएसबीसी और अन्य के नेतृत्व वाले बैंकों द्वारा की गई अपील पर कार्रवाई करते हुए एनसीडीआरसी के 2008 के फैसले को खारिज कर दिया। शीर्ष अदालत ने 2009 में उपभोक्ता आयोग के आदेश पर रोक लगा दी थी, क्योंकि बैंकों ने तर्क दिया था कि यदि आदेश को निलंबित नहीं किया गया तो इससे उनके साथ पक्षपात होगा।
विज्ञापन


क्या था क्रेडिट कार्ड ब्याज पर एनसीडीआरसी का फैसला
बैंकों ने यह भी दावा किया था कि एनसीडीआरसी के पास बैंक के कामकाज को विनियमित करने वाले ऐसे आदेश पारित करने का अधिकार नहीं है। अपने फैसले में एनसीडीआरसी ने माना था कि यह अनुचित व्यापार व्यवहार है क्योंकि बैंकों और क्रेडिट कार्ड धारकों की सौदेबाजी की स्थिति पर विचार करने पर क्रेडिट कार्ड की सुविधा को स्वीकार न करने के अलावा क्रेडिट कार्ड धारकों के पास कोई सौदेबाजी की क्षमता नहीं थी।
विज्ञापन
विज्ञापन

मुआवजे के रूप में अनुपातहीन रूप से उच्च राशि का भुगतान
गैर सरकारी संगठन आवाज फाउंडेशन की याचिका पर दिए अपने फैसले में आयोग ने माना था कि क्रेडिट कार्ड रखने के लिए बैंक द्वारा विभिन्न विपणन रणनीतियों के माध्यम से प्रलोभन दिया जाता है। इसलिए यदि किसी शर्त के तहत उपभोक्ता को अपने दायित्व को पूरा करने में विफल रहने पर मुआवजे के रूप में अनुपातहीन रूप से उच्च राशि का भुगतान करना पड़ता है तो यह अनुचित व्यापार व्यवहार होगा।


विदेश में कितनी हैं ब्याज दरें
आयोग ने संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया जैसे अन्य देशों में क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर की तुलना की थी। उसने पाया था कि अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम में क्रेडिट कार्ड के लिए ब्याज दर 9.99 प्रतिशत से 17.99 प्रतिशत के बीच है। ऑस्ट्रेलिया में भी ब्याज दर 18 प्रतिशत से 24 प्रतिशत के बीच है। हांगकांग में क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर 24 प्रतिशत से 32 प्रतिशत के बीच है। फिलीपींस, इंडोनेशिया और मैक्सिको, जो उभरते बाजार हैं, में क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर 36 प्रतिशत से 50 प्रतिशत के बीच है।


विकसित देशों में प्रचलित ब्याज दर का पालन क्यों नहीं
हालांकि, आयोग ने कहा था कि छोटी अर्थव्यवस्थाओं में प्रचलित उच्च ब्याज दर को अपनाने का कोई उचित आधार नहीं है। इसके अलावा आयोग ने माना था कि विकसित देशों में प्रचलित ब्याज दर, यानी 9.99 प्रतिशत से 17.99 (यूएसए और यूके) या 18 प्रतिशत से 24 प्रतिशत (ऑस्ट्रेलिया) का पालन करने का प्रयास न करने का कोई उचित आधार नहीं है। इसके बाद आयोग ने क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दर की ऊपरी सीमा 30 फीसदी निर्धारित की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed