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Supreme Court: उदयनिधि स्टालिन को 'सुप्रीम' राहत; सनातन धर्म संबंधी बयान को लेकर नई प्राथमिकी नहीं होगी दर्ज
Thu, 06 Mar 2025 11:52 AM IST
अभिषेक दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Thu, 06 Mar 2025 11:52 AM IST
सार
सितंबर 2023 में एक सम्मेलन में बोलते हुए द्रमुक नेता ने कहा था कि सनातन धर्म, सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है। इसे खत्म कर दिया जाना चाहिए। महाराष्ट्र, बिहार, जम्मू और कर्नाटक सहित देश के विभिन्न हिस्सों में उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।
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उदयनिधि स्टालिन
- फोटो : ANI/PTI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट से तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने ने निर्देश दिया कि उदयनिधि के सनातन धर्म संबंधी कथित बयान के लिए उनके खिलाफ बिना अनुमति के कोई नई प्राथमिकी नहीं दर्ज की जाएगी। सनातन धर्म पर कथित टिप्पणी संबंधी मामले में शीर्ष अदालत ने उदयनिधि स्टालिन को बलपूर्वक कार्रवाई से संरक्षण देने वाले अंतरिम आदेश की अवधि को भी बढ़ा दिया है। देश के मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने स्टालिन को राहत दी।
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पीठ ने कहा, 'नए जोड़े गए प्रतिवादियों (राज्यों) को 15 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने की स्वतंत्रता दी गई है और यदि कोई हो तो 15 दिनों के बाद जवाब दाखिल किया जा सकता है। अंतरिम आदेश जारी रहेगा और संशोधित रिट याचिका में उल्लिखित मामलों पर समान रूप से लागू होगा।' पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'हम निर्देश देते हैं कि इस न्यायालय की अनुमति के बिना कोई और मामला दर्ज न किया जाए।'
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अभिषेक सिंघवी की दलील
स्टालिन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि एफआईआर महाराष्ट्र के अलावा पटना, जम्मू, बंगलूरू में भी दर्ज की गई हैं। उन्होंने तर्क दिया कि सभी मामलों को उस स्थान पर स्थानांतरित किया जा सकता है, जहां कथित घटना हुई थी यानी तमिलनाडु। सिंघवी ने कहा कि स्टालिन के खिलाफ बिहार में एक नया मामला दर्ज किया गया था और लंबित याचिका में शिकायतकर्ताओं को पक्षकार बनाने के लिए संशोधन याचिका दायर की गई थी। उन्होंने टीवी एंकर अर्नब गोस्वामी, ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर और राजनीतिज्ञ नूपुर शर्मा के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि घटना से उपजे मामलों को अलग-अलग जगहों पर जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। नूपुर शर्मा के मामले में शब्दों को बहुत अधिक आक्रामक माना जाता है और इस अदालत ने अन्य सभी मामलों को उस स्थान पर स्थानांतरित कर दिया, जहां पहली बार एफआईआर दर्ज की गई थी। इस मामले में यही समाधान है।
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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलील
महाराष्ट्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मौजूदा मामले का हवाला देते हुए कहा कि यह सनातन धर्म उन्मूलन सम्मेलन था, जहां उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म को मलेरिया, कोरोना, डेंगू आदि की तरह खत्म किया जाना चाहिए। कृपया इस बात पर गौर करें कि अगर किसी दूसरे राज्य का मुख्यमंत्री किसी खास धर्म, जैसे कि इस्लाम, के बारे में ऐसी ही बातें कहता है, तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीजेआई ने कहा, 'हम मामले के गुण-दोष में नहीं जा रहे हैं। केवल एक सवाल है कि क्या इसे एक जगह स्थानांतरित किया जाना चाहिए।' मेहता ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि हिंदुओं ने प्रतिक्रिया नहीं दी, नेता को ऐसा कहने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सीजेआई ने कहा, 'हम नहीं चाहेंगे कि सर्वोच्च न्यायालय किसी भी शब्द पर टिप्पणी करे, उनका मुकदमे पर प्रभाव पड़ता है।'
सिंघवी और मेहता ने वार-पलटवार
सिंघवी ने मेहता की दलीलों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वह दूसरे दर्शकों के लिए बोल रहे थे। मेहता ने कहा कि नहीं, मेरे पास कोई और दर्शक नहीं है, मैं सिंघवी की तरह प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं कर सकता। इस पर सिंघवी ने पलटवार करते हुए कहा, 'आप अब कोर्ट के अंदर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं।' मामले की सुनवाई अब 28 अप्रैल को होगी।
क्या है मामला?
सितंबर 2023 में एक सम्मेलन में बोलते हुए द्रमुक नेता ने कहा था कि सनातन धर्म, सामाजिक न्याय और समानता के खिलाफ है। इसे खत्म कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने 'सनातन धर्म' की तुलना कोरोनावायरस, मलेरिया और डेंगू से की थी। उन्होंने कहा था कि इसे नष्ट कर दिया जाना चाहिए।
कई राज्यों में एफआईआर
स्टालिन की टिप्पणी को लेकर महाराष्ट्र, बिहार, जम्मू और कर्नाटक सहित देश के विभिन्न हिस्सों में उनके खिलाफ कई एफआईआर दर्ज की गई हैं।