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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Updates: SC allows Navneet Kaur Rana plea challenging Bombay HC verdict caste certificate cancel

SC: नवनीत राणा को जाति प्रमाण-पत्र मामले में राहत, कॉलेजियम की सिफारिश- 5 अतिरिक्त जज स्थायी हों; पढ़ें अपडेट

Thu, 04 Apr 2024 06:42 PM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Thu, 04 Apr 2024 06:42 PM IST
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Supreme Court Updates: SC allows Navneet Kaur Rana plea challenging Bombay HC verdict caste certificate cancel
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

सुप्रीम कोर्ट ने अमरावती से सांसद और भाजपा नेता नवनीत कौर राणा की उस याचिका को विचार के लिए स्वीकार कर लिया है, जिसमें उन्होंने जाति प्रमाणपत्र को रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने कहा ने कहा कि उच्च न्यायालय को मामले में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था।

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नवनीत की याचिका स्वीकार करते हुए न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और जस्टिस संजय करोल की पीठ ने कहा कि हाईकोट को जाति प्रमाण पत्र के मुद्दे पर जांच समिति की रिपोर्ट में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए था। दरअसल, 8 जून 2021 को उच्च न्यायालय ने कहा था कि नवनीत ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके 'मोची' जाति प्रमाण पत्र धोखाधड़ी से हासिल किया। कोर्ट ने यह कहते हुए अमरावती की सांसद पर 2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि वह 'सिख-चमार' जाति से थीं।
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नवनीत राणा ने 2019 में एक निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर महाराष्ट्र में आरक्षित अमरावती संसदीय सीट जीती थी। हाल ही में वह भाजपा में शामिल हो गई हैं और उसी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ने जा रही हैं। उन्हें 2019 में राकांपा का समर्थन मिला हुआ था।
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फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिए चुनाव लड़ने का आरोप
नवनीत कौर पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के जरिए चुनाव लड़ा था। नवनीत कौर ने 2019 लोकसभा चुनाव में अमरावती (अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट) पर शिवसेना के उम्मीदवार आनंदराव अडसुल को हराया था। नवनीत के माता-पिता मूलतः पंजाब से थे।

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एसआईएलएफ ने बार सदस्यों के आचरण पर उठाए सवाल
सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म्स (एसआईएलएफ) द्वारा देश की न्यायपालिका की छवि खराब करने के प्रयास की निंदा की गई। एसआईएलएफ प्रमुख ललित भसीन द्वारा गुरुवार को जारी एक बयान में कहा गया कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हाल ही में वरिष्ठ बार सदस्यों ने अदालतों में पेश होते हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की ईमानदारी और क्षमता पर हमला किया था। भसीन ने कहा कि यह हमारे देश की न्यायपालिका की छवि को धूमिल करने का प्रयास है और हमारी फर्म कानून के शासन के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने आगे कहा कि इस मामले में जिन व्यक्तियों के संबंध में जांच चल रही है, उनकी स्थिति की परवाह किए बिना कानून को अपना काम करने की अनुमति दी जानी चाहिए। व्यक्तियों की बेगुनाही समेत बाकी निर्णय अदालतों पर छोड़ दिए जाने चाहिए। आपको बता दें कि एसआईएलएफ कानून फर्मों के लिए देश का एकमात्र प्रतिनिधि निकाय है।

पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश
सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कर्नाटक हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की शिफारिश केंद्र से की है। तीन सदस्यीय कॉलेजियम ने यह भी सिफारिश की कि न्यायमूर्ति गुरुसिद्धैया बसवराज को 16 अप्रैल 2024 से एक वर्ष की अवधि के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया जाए। 

कॉलेजियम के तीन अप्रैल के प्रस्ताव के मुताबिक हाईकोर्ट कॉलेजियम ने 20 जनवरी को सर्वसम्मति से पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के तौर पर नियुक्त करने और अतिरिक्त न्यायाधीश बसवराज का कार्यकाल एख साल के लिए बढ़ाने की सिफारिश की थी। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए गए प्रस्ताव में कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री और राज्य ने इन सिफारिशों पर अपनी सहमति दी है। जिन पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की गई है, उनमें अतिरिक्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति चेप्पुदिरा मोनप्पा पूनाचा, अनिल भीमसेन कट्टी, चंद्रशेखर मृत्युंजय जोशी, उमेश मंजूनाथभट अडिग औऱ तालकड गिरिगौड़ा शिवशंकर गौड़ा के नाम शामिल हैं। 

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा-  औद्योगिक शराब को विनियमित करना उसका अधिकार क्षेत्र 
औद्योगिक अल्कोहल को विनियमित करने के अपने अधिकार का दावा करते हुए, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मानव उपभोग के लिए अल्कोहल पर उत्पाद शुल्क लगाने की विधायी शक्ति उपयुक्त नहीं है, लेकिन औद्योगिक उपयोग के लिए विशेष रूप से यह संसद के पास है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की नौ सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा, मानव उपभोग के लिए उपयुक्त और गैरउपयुक्त अल्कोहलिक शराब को अलग-अलग मानने के लिए एक चेतनापूर्ण निर्णय लिया गया था। इसमें पहले वाली यानी मानव उपभोग के उपयुक्त शराब को राज्य विधायिका के दायरे में रखा गया और गैर उपयुक्त अल्कोहलिक शराब को संसद के दायरे में रखा गया।

पीठ औद्योगिक अल्कोहल के उत्पादन, विनिर्माण, आपूर्ति और विनियमन में केंद्र और राज्यों की शक्तियों के मुद्दे की जांच कर रही है। सात जजों की संविधान पीठ के राज्यों के खिलाफ फैसला सुनाए जाने के बाद शीर्ष अदालत के समक्ष बड़ी संख्या में याचिकाएं आईं।

सुनवाई के दौरान वेंकटरमणी ने कहा, चूंकि 1951 का अधिनियम नियंत्रण और विनियमन के पूरे स्पेक्ट्रम और उनके कामकाज के विवरण के संबंध में अधिनियमित किया गया था। उदाहरण के लिए, जैसा कि उक्त अधिनियम की धारा 18 जी में बताया गया है, ऐसे में राज्यों के लिए कोई अधिकार उपलब्ध नहीं है। बृहस्पतिवार को भी सुनवाई में कोई निष्कर्ष नहीं निकला और अब सुनवाई 9 अप्रैल को होगी तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दलीलें पेश करेंगे।

कॉलेजियम ने की 5 अतिरिक्त जजों को स्थायी करने की सिफारिश

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कर्नाटक हाईकोर्ट के पांच अतिरिक्त न्यायाधीशों को स्थायी न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय कॉलेजियम ने जस्टिस गुरुसिद्दैया बसवराज को 16 अगस्त, 2024 से एक वर्ष के नए कार्यकाल के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश बनाने की भी सिफारिश की है। कॉलेजियम के 3 अप्रैल के प्रस्ताव में अतिरिक्त जज जस्टिस चेप्पुडिरा मोनप्पा पूनाचा, जस्टिस अनिल भीमसेन कट्टी, जस्टिस चंद्रशेखर मृत्युंजय जोशी, जस्टिस उमेश मंजूनाथभट अडिगा और जस्टिस तलकाड गिरिगौड़ा शिवशंकर गौड़ा के नाम थे। कर्नाटक हाईकोर्ट कॉलेजियम ने 20 जनवरी को इनके नाम सुझाए थे। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने भी इनकी जांच के बाद उन्हें उपयुक्त पाया है।
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