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Supreme Court: अदालत बोली- मीडिया पर प्रतिबंध का आदेश बेहद दुर्लभ केस में ही दें; कार्ति चिदंबरम से मांगा जवाब
Sat, 09 Aug 2025 09:11 AM IST
ज्योति भास्कर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Sat, 09 Aug 2025 09:11 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट अपडेट्स
- फोटो : अमर उजाला
सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक धर्मस्थल के मामले में ट्रायल कोर्ट के दिए गए आदेश पर दोबारा विचार करने को कहा है। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने यह संकेत दिया है कि मामले में मीडिया रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए या नही, इसमें अदालत को संदेह है। सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को पूरे मामले की नए सिरे से सुनवाई कर निष्पक्ष फैसला देने को कहा है। पीठ ने कहा कि मीडिया कवरेज प्रतिबंध के आदेश अत्यंत दुर्लभ मामलों में ही पारित किए जाते हैं। साथ ही याचिकाकर्ता को सभी सामग्री ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश करने को भी कहा। बता दें कि ट्रायल कोर्ट ने मीडिया कवरेज पर रोक लगा दिया था। साथ ही 390 मीडिया संस्थानों को धर्मस्थल कब्रस्तान मामले से जुड़े लगभग 9000 लिंक और खबरें हटाने का निर्देश दिया था। इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के सलाह के बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। धर्मस्थल मंदिर निकाय के सचिव हर्षेन्द्र कुमार डी ने बंगलूरू के अतिरिक्त सिटी सिविल और सत्र सत्र अदालत में मुकदमा दायर किया था, जिसमें 4140 यूट्यूब वीडियो, 932 फेसबुक पोस्ट, 3540 इंस्टाग्राम पोस्ट, 108 समाचार लेख 37 रेडिट पोस्ट 41 ट्वीट सहित 8842 लिंक को ब्लॉक करने की मांग की थी। उन्होंने याचिका में आरोप लगाया था कि मीडिया की ओर से दी जा रही जानकारी मानहानिकारक है। इससे उनके परिवार की छवि खराब हो रही है। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने मीडिया कवरेज पर रोक लगा दिया था।
सफाईकर्मी ने लगाए थे आरोप
उल्लेखनीय है कि यह मामला एक सफाई कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से उत्पन्न हुआ है, जिसमें दावा किया गया है कि उसे 1995 से 2014 के बीच धर्मस्थल गांव में महिलाओं और बच्चों के शवों को दफनाने का निर्देश दिया गया था। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने हाल ही में कहा था कि धर्मस्थल में महिलाओं की हत्याओं के संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गहन जांच होनी चाहिए। राज्य सरकार ने आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
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सफाईकर्मी ने लगाए थे आरोप
उल्लेखनीय है कि यह मामला एक सफाई कर्मचारी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर से उत्पन्न हुआ है, जिसमें दावा किया गया है कि उसे 1995 से 2014 के बीच धर्मस्थल गांव में महिलाओं और बच्चों के शवों को दफनाने का निर्देश दिया गया था। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर ने हाल ही में कहा था कि धर्मस्थल में महिलाओं की हत्याओं के संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गहन जांच होनी चाहिए। राज्य सरकार ने आरोपों की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है।
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कांग्रेस नेता कार्ति चिदंबरम (फाइल)
- फोटो : एएनआई
एयरसेल मैक्सिस मामला: सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की याचिका पर कार्ति चिदंबरम से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने एयरसेल-मैक्सिस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। याचिका में कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग आरोप तय करने से संबंधित सुनवाई स्थगित करने के आदेश को चुनौती दी गई है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के कारण पीएमएलए के तहत मुकदमे में देरी होगी। इसके बाद पीठ ने कार्ति चिदंबरम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। पीठ ने राजू से एजेंसी को हुए नुकसान के बारे में पूछा क्योंकि उच्च न्यायालय ने उस अपराध में आरोप तय होने तक इंतज़ार करने को कहा था जिस पर ईडी की शिकायत आधारित थी। जस्टिस कांत ने राजू से कहा, मान लीजिए कि कल उस अपराध में कोई आरोप तय नहीं होता, या ट्रायल कोर्ट आरोप तय कर देती है, लेकिन हाईकोर्ट या यह अदालत उन्हें खारिज कर देती है, तो आपकी पूरी मेहनत और परिश्रम बेकार चला जाएगा।
राजू ने जवाब दिया, इसे दूसरी तरह से देखिए। मैं गवाहों से पूछताछ नहीं करता, मुकदमा टल जाता है, गवाह मर जाते हैं और मेरी गवाही चली जाती है। यहां जो संतुलन बनाया जा सकता है वह यह है कि मुकदमा आगे बढ़ाया जाए। संबंधित अपराध में अंतिम आदेश आने तक फैसला न सुनाया जाए। पीठ ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने समय से पहले ही दखलंदाजी कर दी थी। उसे वैकल्पिक रूप से चिदंबरम को सिर्फ यह कहकर बचाना चाहिए था कि पीएमएलए मुकदमा संबंधित अपराध के मुकदमे से पहले खत्म नहीं होना चाहिए। 9 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से आरोप-पत्र पर बहस 29 मई के बाद के दिन के लिए स्थगित करने को कहा था, क्योंकि उसने चिदंबरम की उस याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दो मामलों में आरोप-पत्र तय करने को स्थगित करने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट ने एयरसेल-मैक्सिस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई। याचिका में कांग्रेस सांसद कार्ति पी चिदंबरम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग आरोप तय करने से संबंधित सुनवाई स्थगित करने के आदेश को चुनौती दी गई है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष ईडी की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के कारण पीएमएलए के तहत मुकदमे में देरी होगी। इसके बाद पीठ ने कार्ति चिदंबरम को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। पीठ ने राजू से एजेंसी को हुए नुकसान के बारे में पूछा क्योंकि उच्च न्यायालय ने उस अपराध में आरोप तय होने तक इंतज़ार करने को कहा था जिस पर ईडी की शिकायत आधारित थी। जस्टिस कांत ने राजू से कहा, मान लीजिए कि कल उस अपराध में कोई आरोप तय नहीं होता, या ट्रायल कोर्ट आरोप तय कर देती है, लेकिन हाईकोर्ट या यह अदालत उन्हें खारिज कर देती है, तो आपकी पूरी मेहनत और परिश्रम बेकार चला जाएगा।
राजू ने जवाब दिया, इसे दूसरी तरह से देखिए। मैं गवाहों से पूछताछ नहीं करता, मुकदमा टल जाता है, गवाह मर जाते हैं और मेरी गवाही चली जाती है। यहां जो संतुलन बनाया जा सकता है वह यह है कि मुकदमा आगे बढ़ाया जाए। संबंधित अपराध में अंतिम आदेश आने तक फैसला न सुनाया जाए। पीठ ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने समय से पहले ही दखलंदाजी कर दी थी। उसे वैकल्पिक रूप से चिदंबरम को सिर्फ यह कहकर बचाना चाहिए था कि पीएमएलए मुकदमा संबंधित अपराध के मुकदमे से पहले खत्म नहीं होना चाहिए। 9 अप्रैल को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट से आरोप-पत्र पर बहस 29 मई के बाद के दिन के लिए स्थगित करने को कहा था, क्योंकि उसने चिदंबरम की उस याचिका पर प्रवर्तन निदेशालय से जवाब मांगा था, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ दो मामलों में आरोप-पत्र तय करने को स्थगित करने की मांग की थी।
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पति आरोपी है तो पत्नी को विदेश जाने से क्यों रोका जाए, सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें एक दुष्कर्म के आरोपी को विदेश यात्रा की अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि उसकी पत्नी भारत में जमानत के तौर पर रुकेगी। शीर्ष अदालत ने इसे अनुचित बताते हुए कहा, जब पत्नी आरोपी नहीं है तो उसे क्यों रोका जाए। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की ओर से दायर अपील पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया। इंजीनियर पर शादी का वादा करके एक महिला से दुष्कर्म करने का आरोप है। शीर्ष अदालत ने व्यक्ति को विदेश यात्रा के लिए दो लाख रुपये की जमानत राशि जमा करने का भी निर्देश दिया। इंजीनियर की ओर से पेश वकील अश्विनी दुबे ने दलील दी कि याचिकाकर्ता की पत्नी न तो आरोपी है और न ही मामले में पक्षकार। उन्होंने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट ने कोई नोटिस भी जारी नहीं किया, लेकिन उसने इंजीनियर की पत्नी (जो अमेरिका में कार्यरत है) को भारत में ही रहने का निर्देश दिया।
आरोपी ने शादी का झांसा देकर चार साल तक बनाए संबंध
इंजीनियर पर अजमेर के क्रिश्चियनगंज थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज था। आरोपी ने एक महिला से शादी का झांसा देकर चार साल तक संबंध बनाए। हाईकोर्ट ने नौकरी के लए उसे विदेश जाने की अनुमति तो दे दी, लेकिन एक शर्त लगाई कि उसकी पत्नी भारत में ही रहेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमें एक दुष्कर्म के आरोपी को विदेश यात्रा की अनुमति इस शर्त पर दी गई थी कि उसकी पत्नी भारत में जमानत के तौर पर रुकेगी। शीर्ष अदालत ने इसे अनुचित बताते हुए कहा, जब पत्नी आरोपी नहीं है तो उसे क्यों रोका जाए। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की ओर से दायर अपील पर राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया। इंजीनियर पर शादी का वादा करके एक महिला से दुष्कर्म करने का आरोप है। शीर्ष अदालत ने व्यक्ति को विदेश यात्रा के लिए दो लाख रुपये की जमानत राशि जमा करने का भी निर्देश दिया। इंजीनियर की ओर से पेश वकील अश्विनी दुबे ने दलील दी कि याचिकाकर्ता की पत्नी न तो आरोपी है और न ही मामले में पक्षकार। उन्होंने कहा कि राजस्थान हाईकोर्ट ने कोई नोटिस भी जारी नहीं किया, लेकिन उसने इंजीनियर की पत्नी (जो अमेरिका में कार्यरत है) को भारत में ही रहने का निर्देश दिया।
आरोपी ने शादी का झांसा देकर चार साल तक बनाए संबंध
इंजीनियर पर अजमेर के क्रिश्चियनगंज थाने में दुष्कर्म का मामला दर्ज था। आरोपी ने एक महिला से शादी का झांसा देकर चार साल तक संबंध बनाए। हाईकोर्ट ने नौकरी के लए उसे विदेश जाने की अनुमति तो दे दी, लेकिन एक शर्त लगाई कि उसकी पत्नी भारत में ही रहेगी।