सुप्रीम कोर्ट अपडेट: तृणमूल के बैंक खाते चलाने की याचिका खारिज; महुआ मोइत्रा मामले में केंद्र-राज्य से जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) गुट की चार डेबिट-फ्रोजन बैंक खातों को संचालित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश और न्यायमूर्ति पीबी वराले की पीठ ने कहा कि वह इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं है। पीठ ने कहा कि चुनाव आयोग ने पार्टी के चुनाव चिह्न को फ्रीज कर रखा है। ऐसे में इन बैंक खातों में मौजूद रकम पर अधिकार किसका है, यह बड़ा मुद्दा अभी विचाराधीन है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर जाने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट से सुनवाई में तेजी लाने का अनुरोध किया। पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत अपने अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करने से भी इनकार किया।
करीब 804 करोड़ रुपये वाले खातों का मामला
कलकत्ता हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी धड़े को चार डेबिट-फ्रोजन बैंक खातों को संचालित करने की अंतरिम अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इन खातों में करीब 804 करोड़ रुपये होने की बात कही गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि ऐसी राहत देने से उसके पहले के उस आदेश का असर कमजोर होगा, जिसके तहत पार्टी को रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने की अनुमति दी गई थी।
टीएमसी ने दावा किया था कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने इन खातों को फ्रीज किया है और इससे जुड़े एफआईआर में कुछ खामियां हैं। इसी आधार पर पार्टी ने खातों को संचालित करने की अनुमति मांगी थी। टीएमसी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद चुनाव आयोग के सामने भी लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने हाल में चुनाव आयोग को इस विवाद पर निर्णय के लिए समयसीमा तय की थी।
महुआ मोइत्रा की याचिका पर भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा की याचिका पर पश्चिम बंगाल सरकार और केंद्र से जवाब मांगा है। मोइत्रा ने आरोप लगाया है कि स्थानीय जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उन्हें देर रात राज्य सरकार के सर्किट हाउस से बाहर जाने के लिए कहा था।
कृष्णानगर की सांसद ने इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उनकी याचिका में कथित तौर पर जबरन बेदखली का मुद्दा उठाया गया है। इस मामले की शुरुआती सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने राज्य की ओर से जवाब दाखिल करने की बात कही थी।
मामले में न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका में मोइत्रा ने कृष्णानगर सर्किट हाउस से देर रात बाहर जाने के लिए कहे जाने की घटना को चुनौती दी है। मोइत्रा ने अगस्त में आरोप लगाया था कि नदिया जिला प्रशासन ने उन्हें सर्किट हाउस खाली करने के लिए कहा था, जबकि उन्हें वहां कमरा आवंटित किया गया था।
‘हर व्यक्ति को न्याय पाने का समान अधिकार’, सुप्रीम कोर्ट ने याचिका नहीं सुनी
सुप्रीम कोर्ट ने एक पूर्व न्यायिक अधिकारी की उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामले की जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने कहा कि हर व्यक्ति को न्याय पाने का समान अधिकार है। पीठ ने कहा कि चाहे कोई बस कंडक्टर हो या राज्य का सचिव, सभी को न्याय पाने का बराबर अधिकार है। पूर्व न्यायिक अधिकारी ने अपनी सेवा समाप्त किए जाने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी है। उनके वकील ने कहा कि हाईकोर्ट में मामलों का भारी बोझ होने के कारण उनकी याचिका पर अभी फैसला नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी एक मामले को प्राथमिकता देने का निर्देश देना उन दूसरे लोगों के साथ अनुचित होगा, जो अपने मामलों की सुनवाई का इंतजार कर रहे हैं। पीठ ने याचिकाकर्ता को उचित अदालत का रुख करने को कहा।