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कांवड़ यात्रा: यूपी सरकार के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया खुद संज्ञान, केंद्र को भी नोटिस

Wed, 14 Jul 2021 01:05 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Wed, 14 Jul 2021 01:05 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट  ने कोविड-19 संक्रमण के बीच कांवड़ यात्रा को अनुमति देने के उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय पर स्वत: संज्ञान लिया। जस्टिस आरएफ नरीमन की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और यूपी को नोटिस जारी किया। 

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Supreme Court took suo moto on Kanwar Yatra uttar pradesh govt decision issued notice to Center and states
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कोविड-19 आशंकाओं के बावजूद कांवड़ यात्रा की अनुमति देने से 'थोड़ा परेशान' है। शीर्ष अदालत ने इस मसले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से प्रस्तावित धार्मिक तीर्थयात्रा स्पष्टीकरण मांगा है।

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जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने कहा कि भारत के नागरिक पूरी तरह से हैरान-परेशान हैं और वे नहीं जानते कि क्या हो रहा है, क्योंकि विभिन्न राज्य कांवड़ यात्रा पर अलग-अलग रुख अपना रहे हैं। 
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पीठ ने पाया कि उत्तर प्रदेश लाखों लोगों को आकर्षित करने वाली कांवड़ यात्रा को जारी रखना चाहता है, जबकि पड़ोसी राज्य उत्तराखंड ने अपने अनुभव के आधार पर कोविड-19 की संभावित तीसरी लहर की आशंकाओं पर निलंबित कर दिया है। 
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बुधवार को छपी एक न्यूज रिपोर्ट का हवाला देते हुए शीर्ष अदालत ने आश्चर्य जताया कि जिस दिन राज्य अपने फैसले ले रहे थे, उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर-पूर्वी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बातचीत के दौरान एक बयान दिया था कि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करके महामारी की तीसरी लहर को रोकना लोगों पर निर्भर है और हम थोड़ा भी समझौता नहीं कर सकते। 

पीठ ने अपने आदेश में कहा है कि विभिन्न राजनीतिक आवाजों को देखते हुए यह महत्वपूर्ण है कि संबंधित सचिव (भारत सरकार) इस पर जवाब दें। पीठ ने केंद्र सरकार के संबंधित सचिव और यूपी व उत्तराखंड के प्रधान सचिव को शुक्रवार तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा है। 

पीठ ने कहा कि चूंकि 25 जुलाई से कांवड़ यात्रा प्रस्तावित है इसलिए अगली सुनवाई 16 जुलाई को होगी। बुधवार को अदालती कार्यवाही के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता अदालत में मौजूद थे। उत्तराखंड से इसलिए जवाब मांगा गया है क्योंकि कांवड़िए, हरिद्वार से जल लेकर आते हैं।

पीठ ने अखबार की रिपोर्ट पर भी ध्यान दिया कि वर्ष 2019 में लगभग 3.5 करोड़ भक्तों ने हरिद्वार का दौरा किया था, जबकि दो करोड़ से अधिक लोगों ने पश्चिमी यूपी में तीर्थ स्थलों का दौरा किया था।


उत्तराखंड सरकार ने कांवड़ यात्रा रद्द की
मालूम हो कि मंगलवार को पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में इस वर्ष कांवड़ यात्रा पर रोक लगा दी है। सरकार का कहना है कि कोरोना थमने का नाम नहीं ले रहा है, ऐसे में कांवड़ यात्रा की अनुमति नहीं दी जा सकती है।  कांवड़ यात्रा 25 जुलाई से छह अगस्त के बीच प्रस्तावित है। बता दें कि कांवड़ यात्रा में हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं और इसमें जगह जगह भीड़ उमड़ने की आशंका रहती है। दोनों राज्यों में कोरोना के मामले अभी भी सामने आ रहे हैं, ऐसे में उत्तराखंड से कांवड़ यात्रा नहीं निकलेगी।

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