फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court today hearing update: SC appoints sign-language interpreter to help hearing-impaired persons

SC: बंगाल के राज्यपाल को अदालत के निर्देश, लाखों छात्रों के हित में सीएम ममता बनर्जी के साथ कॉफी पर चर्चा करें

Fri, 06 Oct 2023 12:16 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: काव्या मिश्रा Updated Fri, 06 Oct 2023 12:16 PM IST
सार

सीजेआई ने कार्यवाही की शुरुआत में कहा कि आज अदालत में एक दुभाषिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया है। वहीं, एक वकील ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। सीजेआई ने कहा कि वह संविधान पीठ की सुनवाई के लिए सांकेतिक भाषा का दुभाषिया चाहते हैं। 
 

विज्ञापन
Supreme Court today hearing update: SC appoints sign-language interpreter to help hearing-impaired persons
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : amar ujala

विस्तार

भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने शुक्रवार को श्रवण-बाधित वकीलों और वादियों के लिए एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने इन लोगों को न्यायिक कार्यवाही को समझने में मदद करने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक सांकेतिक भाषा दुभाषिया (साइन-लैंग्वेज इंटरप्रेटर) की नियुक्ति करने की घोषणा की।

विज्ञापन

दुभाषिया नियुक्त करना एक ऐतिहासिक क्षण

सीजेआई ने कार्यवाही की शुरुआत में कहा कि आज अदालत में एक दुभाषिया है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने नियुक्त किया है। वहीं, एक वकील ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताया। सीजेआई ने कहा कि वह संविधान पीठ की सुनवाई के लिए सांकेतिक भाषा का दुभाषिया चाहते हैं। 

विज्ञापन

वकीलों ने की सराहना

22 सितंबर को सीजेआई की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिव्यांग व्यक्तियों (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारों से संबंधित एक मामले में सांकेतिक भाषा के दुभाषिया सौरव रॉय चौधरी के माध्यम से श्रवण बाधित वकील सारा सनी की सुनवाई की। वकीलों और बार निकायों ने  सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक बधिर वकील को सांकेतिक भाषा के दुभाषिए के माध्यम से एक मामले में बहस करने की अनुमति देने पर सराहना की थी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

पिछले साल किया था एक समिति का गठन

चंद्रचूड़ दिव्यांगों को न्याय वितरण प्रणाली तक पहुंच प्रदान करने के प्रति काफी संवेदनशील हैं। उन्होंने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट की एक समिति का भी गठन किया था, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से दिव्यांगों के सामने आने वाली कठिनाइयों को समझना और उन तक पहुंच सुनिश्चित करना था।

दिव्यांगों तक पहुंच बढ़ाने के लिए शीर्ष अदालत परिसर में कई बुनियादी ढांचे में बदलाव किए गए हैं।

मनी बिल से जुड़े मामले पर जल्द सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि मनी बिल से जुड़े मामले पर जल्द सुनवाई होगी। इस मामले में सात जजों की बेंच गठित की जाएगी। शीर्ष अदालत का कहना है कि अगले सप्ताह वह निर्देशों के लिए सात न्यायाधीशों और नौ न्यायाधीशों द्वारा सुनवाई किए जा रहे सभी मामलों को सूचीबद्ध करेगा।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ का कहना है कि उन्होंने रजिस्ट्रार को बताया है कि 12 अक्टूबर को सभी सात जजों के मामलों को निर्देश के लिए सूचीबद्ध करेंगे।

बिलकिस बानो मामला: नौ अक्टूबर को सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट 
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह बिलकिस बानो सामूहिक दुष्कर्म मामले और 2002 के गुजरात दंगों के दौरान उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के 11 दोषियों की समय पूर्व रिहाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नौ अक्तूबर को दलीलें सुनेगा।

न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने बिलकिस बानो सहित याचिकाकर्ताओं के वकीलों से कहा कि वे अपनी संक्षिप्त लिखित जवाबी दलीलें दाखिल करें। मामले में पेश हुए वकीलों में से एक ने कहा कि दोषियों की ओर से दलीलें पूरी हो चुकी हैं और अब मामले को याचिकाकर्ताओं के वकील की जवाबी दलीलों पर सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

पीठ ने वकील से कहा, 'हम आपके कहने पर पूरे मामले को फिर से नहीं खोलना चाहते।' इसने कहा कि बेहतर होगा कि याचिकाकर्ता के वकील अपनी जवाबी दलीलों का संक्षिप्त नोट दाखिल करें। उन्होंने कहा, 'सूची नौ अक्तूबर को दोपहर दो बजे जारी होगी। इस बीच, याचिकाकर्ताओं के वकील अपनी संक्षिप्त लिखित दलीलें दाखिल करें।' शीर्ष अदालत ने 20 सितंबर को मामले की सुनवाई करते हुए पूछा था कि क्या दोषियों को सजा में छूट मांगने का मौलिक अधिकार है।

भ्रष्टाचार विरोधी कानून के एक प्रावधान पर 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई
भ्रष्टाचार विरोधी कानून के एक प्रावधान की संवैधानिक वैधता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर पर सुनवाई हुई। जिसके तहत मामला शुरु करने से पहले सक्षम प्राधिकारी से पूर्व मंजूरी लेना जरूरी है। मामले में सुप्रीम कोर्ट 20 नवंबर को सुनवाई करेगा। याचिकाकर्ता एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने पीठ को बताया कि याचिका एक बहुत महत्वपूर्ण मामले से संबंधित है। उन्होंने कहा, यह भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (पीसीए) में संशोधन को चुनौती है, जो कहता है कि भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में कोई भी पूछताछ या जांच सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने 26 नवंबर, 2018 को केंद्र को नोटिस जारी कर पीसीए की संशोधित धारा 17ए (1) की वैधता के खिलाफ याचिका पर जवाब मांगा था। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान भूषण ने कहा कि संशोधित धारा के मुताबिक भ्रष्टाचार के मामले में कोई भी पूछताछ या जांच सरकार की पूर्व मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती।

मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी से निपटने के लिए केंद्र, राज्यों से मांगा जवाब
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (मांसपेशीय दुर्विकास) से निपटने के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर हुई। मामले पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से जवाब मांगा है। गौरतलब है कि मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक दुर्लभ और दुर्बल करने वाली बीमारी है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने मामले पर दलीलों को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किया है।

दायर याचिका में कहा गया कि कि बड़े पैमाने पर जनता को बीमारी के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है और मरीजों के लिए विशिष्ट आईडी कार्ड जारी करने की एक मानक नीति या योजना बनाई जानी चाहिए। जिसके चलते वे सरकारी और निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज करा सकें। 

क्या है मस्कुलर डिस्ट्रॉफी बीमारी?
मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (एमडी) आनुवांशिक बीमारी है, जो कंकाल की मांसपेशियों की कमजोरी और गिरावट का कारण बनती है। यह बीमारी समय के साथ-साथ खतरनाक होने लगती है। मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और ग्रसित होने वाले मरीजों को चलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
 

मानहानि मामला: जेएनयू ने सुप्रीम कोर्ट में बताया उसे कोई डोजियर नहीं मिला
 जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) प्रशासन ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसे विश्वविद्यालय को कथित तौर पर ‘संगठित सेक्स रैकेट का अड्डा’ बताने वाला कोई डोजियर नहीं मिला है। जेएनयू प्रशासन ने शीर्ष अदालत में एक प्रोफेसर की याचिका पर हलफनामा दाखिल किया है। याचिका में डोजियर के प्रकाशन पर आपराधिक मानहानि के मामले में ऑनलाइन समाचार पोर्टल ‘द वायर’ के संपादक और उप संपादक को जारी समन को रद्द करने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी गई है।

जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा कि जेएनयू के हलफनामे में कहा गया है कि जेएनयू के शैक्षणिक अनुभाग की ओर से बनाए गए रिकॉर्ड के आधार पर, याचिका की सामग्री से मेल खाने वाले विवरण का कोई भी डोजियर प्राप्त नहीं हुआ। इस मामले में अब 21 नवंबर को सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत हाईकोर्ट के 29 मार्च के आदेश को चुनौती देने वाली जेएनयू में सेंटर फॉर स्टडी ऑफ लॉ एंड गवर्नेंस की प्रोफेसर और अध्यक्ष अमिता सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

सिंह ने ‘द वायर’ के संपादक और उप संपादक समेत कई लोगों के खिलाफ शिकायत की थी कि इन लोगों ने अप्रैल 2016 के एक प्रकाशन में आरोप लगाया कि यह डोजियर उन्होंने (प्रोफेसर अमिता सिंह) तैयार किया है। इस मामले में 3 जुलाई के अपने आदेश में, शीर्ष अदालत ने सिंह के वकील की दलीलों पर गौर किया था कि याचिकाकर्ता का नाम एक समाचार आइटम में आया है, जिसमें कहा गया है कि वह जेएनयू प्रशासन को सौंपे गए डोजियर पर वह हस्ताक्षरकर्ता थीं, जबकि उनके अनुसार यदि ऐसा कोई डोजियर प्रस्तुत भी किया गया है तो उसका उनसे कोई लेना-देना नहीं है। तब शीर्ष अदालत ने जेएनयू प्रशासन को नोटिस जारी जर जवाब मांगा था।

अदालतें 10 साल के भीतर कर सकेंगी भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल : जस्टिस संजय करोल
सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संजय करोल के मुताबिक प्रौद्योगिकी ने अब भारतीय भाषाओं में काम करना आसान बना दिया है। अगले एक दशक के भीतर, देशभर की अदालतें इनका उपयोग शुरू कर सकती हैं। जस्टिस करोल 4 अक्तूबर को भारतीय भाषा अभियान की ओर से आयोजित हिंदी पखवाड़े के समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधन दे रहे थे।

जस्टिस करोल ने भारतीय भाषाओं में कानूनी शिक्षा प्रदान करने के महत्व को भी रेखांकित किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं को अदालतों में जगह मिलनी चाहिए क्योंकि इससे पारदर्शिता आएगी। यह वादियों का अधिकार है कि उन्हें उनकी भाषा में न्याय मिले। बतौर विशिष्ट जज दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा कि आज जरूरत है कि आम लोग अदालतों के सुनाए फैसलों को समझें और इसके लिए लोकप्रिय और सरल भाषाओं का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। वहीं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने अंग्रेजी के प्रति दिखाए गए विशेष लगाव के कारण भारतीय भाषाओं की उपेक्षा पर अफसोस जताया।

धन विधेयक से जुड़े मुद्दे पर विचार करेगी सात न्यायाधीशों की पीठ
 सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह आधार अधिनियम जैसे कानूनों को धन विधेयक के रूप में पारित करने की वैधता के मुद्दे पर विचार करने के लिए सात न्यायाधीशों की पीठ का गठन करेगा। शीर्ष अदालत के इस निर्णय का उद्देश्य धन विधेयक को लेकर विवाद को सुलझाना है। दरअसल, सरकार ने आधार विधेयक और मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) में संशोधन विधेयक को भी धन विधेयक के रूप में पेश किया था। इस पर आरोप लगाया था कि सरकार के पास राज्यसभा में बहुमत नहीं था, इसलिए उसने ऐसा किया था।

धन विधेयक को केवल लोकसभा में पास कराना होता है। राज्यसभा न तो इसमें संशोधन कर सकती है और न अस्वीकार। उच्च सदन सिर्फ सिफारिशें कर सकती है, जिसे लोकसभा मान भी सकती है और नहीं भी। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्र की पीठ के सामने इस मामले को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने के लिए उल्लेख किया गया। इस पर पीठ ने कहा, सभी लंबित सात न्यायाधीशों के मामले प्रक्रियात्मक निर्देशों के लिए 12 अक्तूबर को सूचीबद्ध किए जाएंगे। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की पीठ ने वित्त अधिनियम, 2017 को धन विधेयक के रूप में पारित करने की वैधता की जांच के मुद्दे के बड़ी पीठ को भेज दिया था।
 

विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपतियों की परिलब्धियों पर रोक
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के विश्वविद्यालयों के नवनियुक्त अंतरिम कुलपतियों की परिलब्धियों पर रोक लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपाल सीवी आनंद बोस से नियुक्ति को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ एक कप कॉफी पर बैठने के लिए कहा है। कोर्ट ने कहा कि लाखों छात्रों के भविष्य के हित में राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच सुलह आवश्यक है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने यह फैसला सुनाया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed