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मथुरा हिंसा की CBI जांच नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की अर्जी

Tue, 07 Jun 2016 11:47 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 07 Jun 2016 11:47 AM IST
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Supreme court to hear tomorrow plea for CBI probe in Mathura violence
मथुरा जवाहर पार्क हिंसा पर राज्य सरकार ने गृहमंत्रालय को सौंपी रिपोर्ट, प्रशासन पर फोड़ा ठीकरा - फोटो : टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने मथुरा में हिंसा की सीबीआई जांच कराने की गुहार को खारिज कर दिया है। याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश करें।

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शीर्ष अदालत में इस मुद्दे पर याचिका भाजपा नेता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दाखिल की गई थी। बता दें कि इस हिंसा में दो पुलिस अधिकारी समेत 29 लोगों की मौत हुई थी।
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सर्वोच्च अदालत की ओर से कहा गया कि मथुरा मामले पर केंद्र सरकार सीबीआई जांच थोप नहीं सकती है। इससे पहले याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील कामिनी जायसवाल ने सोमवार को न्यायमूर्ति पीसी घोष और न्यायमूर्ति अमिताभ रॉय की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार की थी।
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याचिका में कहा गया था कि केंद्र सरकार इस मामले की जांच सीबीआई से कराने के लिए तैयार है लेकिन राज्य सरकार ने इसकी सिफारिश नहीं की है। अदालत चाहे तो इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जांच सीबीआई को सौंप सकती है। साथ ही यह भी कहा गया कि केंद्र और राज्यों को इस तरह की घटनाओं में मारे गए लोगों के लिए मुआवजे के लिए एकसमान नीति बनाने का निर्देश दिया जाए।

उन्होंने कहा था कि हिंसा के बाद घटनास्थल के मौजूद साक्ष्य नष्ट किए जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मथुरा के जवाहर पार्क मामले में करीब 200 गाड़िया जलाई गई थी। उन्होंने कहा कि घटना की गंभीरता को देखते हुए मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी जानी चाहिए।

मालूम हो कि अदालत के निर्देश के बाद दो जून को पुलिस बल जवाहर पार्क में कब्जा हटाने के लिए पहुंची थी। इस दौरान कब्जा करने वाले लोगों के साथ हुए टकराव में मथुरा के एसपी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष कुमार यादव सहित 29 लोगों की मौत हो गई थी।

हालांकि इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सीधे तौर पर सीबीआई जांच की मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार जांच को थोप नहीं सकता।

सीबीआई जांच से सुप्रीम कोर्ट का इंकार

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याचिका में आरोप लगाया गया था कि मथुरा के जवाहर बाग में रामवृक्ष यादव सामान्तर सरकार चला रहा था और यह सिलसिला 2004 से जारी था। याचिका में मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि कई नेताओं और मंत्रियों से उसके नजदीकी संबंध रहे हैं। बिना सरकार के समर्थन के यह सब नहीं हो सकता था। जवाहर पार्क में रामवृक्ष की पूरी फौज थी। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि रामवृक्ष यादव ने राज्य में अन्य जगहों पर भी अवैध कब्जे कर रखा था। जवाहर पार्क को उसने मुख्यालय बना रखा था।

याचिका में यह भी कहा गया कि जवाहर पार्क में 20 लाख किलो अनाज और 400 गैस सिलेंडर थे। करीब 200 गाडिय़ां थी। रामवृक्ष ने अपना कानून, अपनी अदालत और खुद की फौज बना रखी थी। यह सब जानते हुए स्थानीय प्रशासन की ओर से कदम नहीं उठाया गया। इस मामलें में 368 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं। पुलिस ने मौके से 47 बंदूक, छह राइफल, 179 हैंड ग्रेनेड भी बरामद किए हैं।

याचिका में यह भी कहा गया है कि रामवृक्ष यादव का फॉरवर्ड ब्लॉक से कोई सरोकार नहीं है। याचिकाकर्ता ने इस मामले की सीबीआई जांच की गुहार करते हुए कहा कि इस पूरे प्रकरण में कार्यपालिका, विधायिक और अतिवाद समूह के बीच सांठ-गांठ का पर्दाफाश होना जरूरी है।

मथुरा हिंसा के लिए प्रशासन जिम्मेदार, राजनीतिक साजिश नहीं - अखिलेश सरकार

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दूसरी ओर उत्तर प्रदेश सरकार मथुरा के जवाहर पार्क में बेकाबू हुई हिंसा का सारा ठीकरा स्थानीय प्रशासन और पुलिस पर फोड़ दिया है। गृहमंत्रालय को भेजी गई पहली रिपोर्ट में अखिलेश सरकार ने कहा है कि हिंसक हालात के लिए कोई और नहीं बल्कि वहां की प्रशासन ही जिम्मेदार है। मामले में राजनीतिक  साजिश  से इनकार करते हुए कहा गया है कि इस हालात को लिए किसी और को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। रिपोर्ट के मुताबिक जवाहर पार्क को कब्जा किए स्वयंभू संस्था को कोई राजनीतिक सरपरस्ती नहीं थी। उधर राज्य सरकार ने मथुरा के डीएम और एसपी के तबादले का फरमान जारी कर दिया है।

सोमवार को केंद्र को भेजी रिपोर्ट में कहा गया है कि  पुलिस और प्रशासन पार्क के हालात को पहले से नहीं भांप सकी थी। ना ही उसे वहां जमा असलहे और हिंसक लोगों की इस कदर मौजूदगी की सही जानकारी थी। रिपोर्ट के मुताबिक हिंसा से बाद पुलिस कार्रवाई में मिले हथियारों से यह शक पैदा हुआ है कि इनका संबंध नक्सलियों से था। गौरतलब है कि घटना के बाद भाजपा ने समाजवादी पार्टी नेता और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव को पूरे मामले के लिए जिम्मेदारी ठहराया है। भाजपा के मुताबिक इस संस्था और उसके प्रमुख के उपर शिवपाल का हाथ था। गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने राज्य सरकार को घटना की जांच सीबीआई को सौंपने संबंधी बयान देकर मामले को और गरमा दिया है।
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