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Manipur: ‘हम दखल नहीं देंगे अगर…’, महिलाओं के साथ दरिंदगी मामले में बोले CJI; सुनवाई कल तक के लिए स्थगित

Mon, 31 Jul 2023 03:35 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: काव्या मिश्रा Updated Mon, 31 Jul 2023 03:35 PM IST
सार

सुनवाई के दौरान पीड़ित महिलाओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि वह मामले को असम स्थानांतरित करने के खिलाफ हैं। वहीं, सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केस को असम स्थानांतरित करने का हमने कभी अनुरोध नहीं किया।

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Manipur Violence Case: Supreme Court to Hear Manipur Assault Video Today
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मणिपुर में दो महिलाओं के साथ दरिंदगी से देश को शर्मसार करने वाले मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। बता दें, शीर्ष अदालत दो महिलाओं पर भीड़ द्वारा किए गए हमले से संबंधित मामले की सुनवाई को स्थानांतरित करने के केंद्र सरकार के अनुरोध पर विचार कर रहा है। उसने इस दौरान कड़े शब्दों में कहा कि घटना को यह कहकर उचित नहीं ठहरा सकते कि ऐसा और भी कहीं हुआ है। फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई कल दोपहर 2 बजे के लिए स्थगित कर दी है।

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शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़ित महिलाओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि महिलाएं मामले की सीबीआई जांच और मामले को असम स्थानांतरित करने के खिलाफ हैं। सिब्बल ने आगे कहा कि पीड़ित महिलाओं में से एक के पिता और भाई की हत्या कर दी गई थी। उनके अभी तक शव नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि 18 मई को जीरो एफआईआर दर्ज की गई। जब कोर्ट ने संज्ञान लिया, तब कुछ हुआ। तो फिर हम क्या भरोसा रखें? उन्होंने कहा कि ऐसी कई घटनाएं होंगी। इसलिए हम एक ऐसी एजेंसी चाहते हैं जो मामले की जांच करने के लिए स्वतंत्र हो।

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सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मुकदमे को असम स्थानांतरित करने का हमने कभी अनुरोध नहीं किया। हमारी मांग यह है कि इस मामले को मणिपुर से बाहर स्थानांतरित किया जाए। 
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महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाने के मामले में सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि इस घटना का तो वीडियो सामने आया है, लेकिन यह एकमात्र घटना नहीं है जहां महिलाओं के साथ मारपीट या उत्पीड़न हुई है, अन्य महिलाएं भी हैं। उन्होंने कहा कि हमें महिलाओं के खिलाफ हिंसा के व्यापक मुद्दे को देखने के लिए एक तंत्र भी बनाना होगा। इस तंत्र को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे सभी मामलों का ध्यान रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह दोनों पक्षों को संक्षेप में सुनेगा और फिर कार्रवाई के सही तरीके पर फैसला करेगा। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल कोई साक्ष्यात्मक रिकॉर्ड पेश नहीं किए गए हैं। सीजेआई ने कहा कि पहले याचिकाकर्ताओं को सुनते हैं उसके बाद अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को सुना जाएगा।

कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि यह स्पष्ट है कि पुलिस उन लोगों के साथ मिलकर काम कर रही थी, जिन्होंने दोनों महिलाओं के खिलाफ हिंसा की और पुलिस ने इन महिलाओं को भीड़ के पास ले जाकर छोड़ दिया और भीड़ ने वही किया जो उन्होंने किया। वहीं, सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट मामले की निगरानी करेगा तो केंद्र को कोई आपत्ति नहीं है।

सुनवाई के दौरान सीजेआई चंद्रचूड़ ने पूछा कि तीन मई को जब मणिपुर में हिंसा शुरू हुई थी, उसके बाद ऐसी कितनी एफआईआर दर्ज की गई हैं। इस पर वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने बताया कि केंद्र की स्टेटस रिपोर्ट के मुताबिक, 595 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें से कितने यौन हिंसा, कितने आगजनी और हत्या से संबंधित हैं, इस पर कोई स्पष्टता नहीं है।

उच्चाधिकार प्राप्त समिति हो गठित
जयसिंह ने आगे कहा कि जहां तक कानून का सवाल है, दुष्कर्म की पीड़िताएं इस बारे में बात नहीं करतीं। वे सामने नहीं आतीं। इसलिए सबसे पहले आत्मविश्वास पैदा करना जरूरी है। आज हमें नहीं पता कि अगर सीबीआई जांच शुरू कर दे तो महिलाएं सामने आ जाएंगी। उन्होंने कहा कि पुलिस की बजाय महिलाओं से घटना के बारे में बात करने में पीड़ित महिलाओं के लिए सहूलियत होगी। एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति होनी चाहिए, जिसमें नागरिक समाज की महिलाएं हों, जिनके पास इससे निपटने का अनुभव हो

यह लोग हों शामिल
उन्होंने आगे कहा कि उच्चाधिकार प्राप्त समिति (हाई पावर कमेटी) में सैयदा हमीद, उमा चक्रवर्ती, रोशनी गोस्वामी आदि शामिल हो सकते हैं, ये सभी समुदाय में इस मुद्दे से जुड़े हैं। उन्हें एक रिपोर्ट बनाने दीजिए और इसे इस अदालत में लाने दीजिए। वहीं, ग्रोवर ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राहत शिविरों की क्या स्थिति है, इस पर एक स्वतंत्र, निष्पक्ष रिपोर्ट आने दीजिए।

कुकी पक्ष ने सीबीआई जांच का किया विरोध
मणिपुर हिंसा मामले में कुकी पक्ष की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कॉलिन गोंसाल्वेस ने सीबीआई जांच का विरोध किया और सेवानिवृत्त डीजीपी वाली एसआईटी से जांच की मांग की। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मणिपुर के किसी भी अधिकारी को शामिल न करने की मांग की है।

मणिपुर हिंसा की एसआईटी जांच से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हिंसा पर दायर एक नयी जनहित याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया। इस याचिका में राज्य में जातीय हिंसा के अलावा पोस्ते की कथित खेती और नार्को-आतंकवाद सहित अन्य मुद्दों की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने का अनुरोध किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में ‘अधिक विशिष्ट’ याचिका दायर करने की अनुमति दी। उसने कहा कि इस जनहित याचिका पर विचार करना ‘बहुत कठिन’ है, क्योंकि इसमें केवल एक समुदाय को दोषी ठहराया गया है।

याचिकाकर्ता मायांगलमबम बॉबी मीतेई की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने याचिका वापस लेने का अनुरोध किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि इस जनहित याचिका पर विचार करना ‘बहुत कठिन’ है, क्योंकि इसमें केवल एक समुदाय को दोषी ठहराया गया है। पीठ ने कहा कि आप एक अधिक विशिष्ट याचिका के साथ आ सकते हैं। इस याचिका में हिंसा से लेकर मादक पदार्थों और पेड़ों की कटाई सहित सभी मुद्दे शामिल हैं।

दीवान ने मणिपुर में हाल की हिंसा के लिए सीमा पार आतंकवाद और राज्य में पोस्ते की खेती को जिम्मेदार ठहराया था। याचिका में स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी), राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के साथ-साथ राज्य सरकार सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया था। पीठ के समक्ष मणिपुर हिंसा के कई पहलुओं से संबंधित अन्य याचिकाएं भी विचाराधीन हैं।

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने वकील से कहा कि निस्संदेह देश भर में महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे हैं, यह हमारी सामाजिक वास्तविकता है। हम सांप्रदायिक और सांप्रदायिक संघर्ष में महिलाओं के खिलाफ अभूतपूर्व हिंसा से निपट रहे हैं। मणिपुर में जो कुछ हुआ उसे हम यह कहकर उचित नहीं ठहरा सकते कि ऐसा और भी कहीं हुआ है। सीजेआई ने पूछा कि क्या आप ऐसा कहना चाह रहे हैं कि सभी महिलाओं की रक्षा करें या किसी की भी रक्षा न करें?

सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि जब घटना 4 मई को हुई तो एफआईआर 18 मई को क्यों दर्ज की गई। 4 मई से 18 मई तक पुलिस क्या कर रही थी? यह घटना सामने आई कि महिलाओं को नग्न कर घुमाया गया और कम से कम दो के साथ दुष्कर्म किया गया। पुलिस क्या कर रही थी?

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने सरकार से पूछा कि पुलिस को जीरो एफआईआर दर्ज करने में 14 दिन क्यों लगे। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का कहना है कि सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। अदालत स्थिति पर नजर रख सकती है। 

सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि यह निर्भया जैसी स्थिति नहीं है। वह भी भयावह था, लेकिन यह अलग था। यहां हम हिंसा से निपट रहे हैं, जिसे आईपीसी एक अलग अपराध के रूप में मान्यता देता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि भारत सरकार मणिपुर को घरों के पुनर्निर्माण के लिए कौन सा पैकेज दे रही है।

सीजेआई का कहना है कि केवल सीबीआई, एसआईटी को सौंपना पर्याप्त नहीं होगा। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि न्याय की प्रक्रिया उसके परिणाम तक पहुंचे। हमारे पास समय खत्म हो रहा है, तीन महीने बीत गए हैं। समिति के गठन पर सीजेआई का कहना है कि समिति के गठन के दो तरीके हैं- हम खुद एक समिति का गठन करें, जिसमें महिला और पुरुष न्यायाधीशों और डोमेन विशेषज्ञों की एक पार्टी शामिल हो। यह सिर्फ यह पता लगाने की कोशिश के संदर्भ में नहीं है कि क्या हुआ है, बल्कि हमें पीड़ितों को न्याय दिलाने की जरूरत है।

सीजेआई का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की सीमा इस बात पर भी निर्भर करेगी कि सरकार ने अब तक क्या किया है। यदि सरकार ने जो किया है उससे हम संतुष्ट हैं, तो हम हस्तक्षेप भी नहीं कर सकते।

देशभर में हंगामा
गौरतलब है, 4 मई की घटना का वीडियो वायरल होने के बाद से देशभर में आक्रोश है। संसद में भी मानसून सत्र की शुरुआत से हंगामा जारी है। भाजपा ने इस घटना की कड़े शब्दों में निंदा की है, लेकिन साथ ही वीडियो वायरल करने के समय पर भी सवाल उठ रहा है। वीडियो 20 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र से एक दिन पहले वायरल हुआ था।

सुप्रीम कोर्ट ने लिया था स्वत संज्ञान
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया था और इसे बेहद संवैधानिक अधिकारों का घोर उल्लंघन बताया था। शीर्ष अदालत ने अगली सुनवाई 28 जुलाई को तय करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों से स्पष्टीकरण मांगा था और यह सुनिश्चित करने को कहा था कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। वहीं, मणिपुर में जातीय हिंसा से संबंधित कई याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में 28 जुलाई को सुनवाई होनी थी। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के खराब स्वास्थ्य के कारण सुनवाई टाल दी गई थी। इस पीठ में न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं। ये एक नई याचिका पर भी सुनवाई करेगी जो सीधे तौर पर मणिपुर की 4 मई की घटना से जुड़ी है।

हालांकि, इस मामले में याचिकाकर्ताओं की पहचान छिपाई गई है (उन्हें x और y के रूप में उल्लेखित किया गया है)। एक रिकॉर्ड से पता चलता है कि याचिका प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) संख्या (110)(6)(2023) के संबंध में है। इस घटना को लेकर जीरो एफआईआर कांगपोकपी जिले की सैकुल पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। बाद में इसे थौबल जिले के नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन को स्थानान्तरित कर दिया गया। इस एफआईआर में जहां घटना हुई है, उस गांव के ग्राम प्रधान ने हमलावरों की पहचान मैतेई समूहों के लोगों के रूप में हुई है। इसमें कहा गया था कि तीन कुकी महिलाओं को निर्वस्त्र किया गया, नग्न घुमाया गया, उन पर हमला किया गया, उनमें से एक के साथ गैंगरेप किया गया, और उसके पिता और भाई की परिवार के साथ मारपीट के बाद भीड़ ने हत्या कर दी। वहीं आरोपियों को पुलिस टीम की हिरासत से छुड़ा लिया गया है। 

मणिपुर में चार मई को क्या हुआ था? 
बता दें कि, यह घटना राज्य की राजधानी इंफाल से लगभग 35 किलोमीटर दूर कांगपोकपी जिले के गांव बी. फीनोम में हुई। ग्राम प्रधान द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, चार मई को शाम लगभग तीन बजे 900-1000 की संख्या में कई संगठनों से जुड़े लोग बी. फीनोम गांव में जबरदस्ती घुस आए। इनके पास एके राइफल्स, एसएल.आर इंसास और 303 राइफल्स जैसे अत्याधुनिक हथियार थे। हिंसक भीड़ ने सभी घरों में तोड़फोड़ की और फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, बर्तन, कपड़े, अनाज सहित नकदी को लूटने के बाद सभी चल संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया।  



इसके अलावा पांच ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए जंगल की ओर भाग गए। बाद में उन्हें नॉनपाक सेकमाई पुलिस टीम द्वारा बचाया गया और वे नोंगनोक सेकमाई थाने के रास्ते में थे। इस बीच उन्हें रास्ते में एक भीड़ ने रोक दिया और नोंगपोक सेकमाई थाने से लगभग दो किलोमीटर दूर और 33 एआर सोमरेई चौकी से लगभग तीन किलोमीटर दूर भीड़ ने उन्हें पुलिस टीम की सुरक्षा से छीन लिया। इसके अलावा एक 56 साल के व्यक्ति की घटनास्थल पर ही हत्या कर दी गई। 

प्रधान ने बताया कि इसी दौरान भीड़ द्वारा तीन महिलाओं को उनके कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया गया और भीड़ के सामने निर्वस्त्र कर दिया गया। घटना से जुड़े वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुरुष असहाय महिलाओं के साथ लगातार छेड़छाड़ कर रहे हैं, जो रो रही हैं और उनसे छोड़ने की गुहार लगा रही हैं। हैवानियत यहीं सीमित नहीं रही, एक 21 साल की लड़की का दिन दहाड़े बेरहमी से सामूहिक दुष्कर्म किया गया। जब 19 वर्षीय छोटे भाई ने अपनी बहन की अस्मिता और जान बचाने की कोशिश की, तो भीड़ में शामिल लोगों ने उसकी मौके पर ही हत्या कर दी। हालांकि, पीड़िता कुछ लोगों की मदद से मौके से भागने में सफल रहीं।

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