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सुप्रीम कोर्ट : सर्जरी के दौरान मरीज की मृत्यु होने पर स्वभाविक रूप से डॉक्टर की लापरवाही नहीं माना जा सकता
Wed, 08 Sep 2021 02:50 AM IST
Kuldeep Singh
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 08 Sep 2021 02:50 AM IST
सार
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा, लापरवाही साबित करने के लिए चिकित्सा साक्ष्य का होना जरूरी
- इस मामले में मरीज 8 अक्टूबर 1996 को अस्पताल गई थी। वहां किडनी संबंधित समस्याओं का उजागर होने के बाद डॉक्टर ने सर्जरी की सलाह दी थी
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Supreme Court
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार की कहा है कि यदि सर्जरी के दौरान किसी मरीज की मृत्यु हो जाती है तो उसे स्वभाविक रूप से डॉक्टर की लापरवाही नहीं माना जा सकता। इसे साबित करने के लिए उपयुक्त चिकित्सा साक्ष्य जरूरी है।
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कोर्ट ने कहा, लापरवाही साबित करने के लिए चिकित्सा साक्ष्य का होना जरूरी
जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एएस बोपन्ना की पीठ ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के उस आदेश को दरकिनार करते हुए की जिसमें एक डॉक्टर को चिकित्सकीय लापरवाही का दोषी ठहराया गया था। पीठ ने कहा, यह स्पष्ट है कि हर मामले में जहां इलाज सफल नहीं होता है या सर्जरी के दौरान रोगी की मृत्यु हो जाती है तो स्वाभाविक तौर पर यह नहीं माना जा सकता है कि चिकित्सक ने लापरवाही बरती है।
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पीठ ने कहा कि लापरवाही को इंगित करने के लिए रिकॉर्ड पर सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए या उचित चिकित्सा साक्ष्य प्रस्तुत किया जाना चाहिए। लापरवाही का आरोप सिर्फ धारणा पर आधारित नहीं होनी चाहिए। इस मामले में आयोग ने डॉक्टर को लापरवाही बरतने का दोषी मानते हुए 17 लाख रुपए का जुर्माना किया था। जुर्माने की यह राशि शिकायत दर्ज करने की तारीख से लेकर भुगतान की तारीख तक सालाना नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देने का आदेश दिया गया था।
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शीर्ष अदालत ने पाया कि मौजूदा मामले में आरोप को लेकर आयोग से समक्ष सिर्फ शिकायतकर्ता द्वारा की शिकायत और हलफनामा है। कोई अन्य चिकित्सा साक्ष्य नहीं है जिससे डॉक्टर पर लापरवाही बरतने का संकेत जाता हो।
इस मामले में मरीज आठ अक्टूबर 1996 को अस्पताल गई थी। वहां किडनी संबंधित समस्याओं का उजागर होने के बाद सर्जरी की सलाह दी गई थी। चिकित्सा मानकों के अनुसार डॉक्टर ने पहले कम छतिग्रस्त किडनी की सर्जरी करने का सुझाव दिया गया। बायीं किडनी का ऑपरेशन किया गया, जो सफल रहा।
मरीज की स्थिति में सुधार हुआ। जिसके बाद अस्पताल व डॉक्टर के दूसरी सर्जरी करने पर विचार किया। इसके लिए जरूरी टेस्ट करवाए गए। 18 दिसंबर 1996 को सर्जरी करने का निर्णय लिया गया था। इससे पहले ही मरीज की स्थिति बिग?ती चली गई। काफी कोशिश के बावजूद मरीज को बचाया नहीं जा सका था।