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SC: बच्चों के कल्याण के लिए करें तकनीक का प्रयोग, सरकार पक्षपात से बचे

Thu, 15 Feb 2018 03:58 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 15 Feb 2018 03:58 AM IST
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Supreme court suggest technology for the Welfare of Children

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार अपने संसाधनों का इस्तेमाल बच्चों के कल्याण या गुमशुदा बच्चों को खोजने के लिए करे। यदि सरकार ऐसा नहीं करती है तो दुनिया में प्रौद्योगिकी ताकत के रूप में भारत का दर्जा सिर्फ कागजों तक ही सिमट के रह जाएगा। शीर्ष अदालत ने किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) और बाल कल्याण समितियों (सीडब्ल्यूसी) में तकनीक के प्रयोग की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वह यह जानकर दुखी है कि इन संस्थाओं में कम्प्यूटरों और दूसरी चीजों की बहुत कमी है। 

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'गुमशुदा बच्चों का पता लगाने, बाल मजदूरी व यौन उत्पीड़न रोकने जैसे कामों में हो तकनीक का प्रयोग'

जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा कि प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल गुमशुदा बच्चों का पता लगाने, खतरनाक उद्योगों में काम करने और बाल यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों का पता लगाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों में मददगार होगा। 
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पीठ ने कहा, ‘यह सब जानते हैं कि हमारा देश एक प्रौद्योगिकी ताकत है और यदि हम उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल नहीं कर पाए और बच्चों की भलाई के लिए कम्प्यूटरों और इंटरनेट के माध्यम से इस तकनीक का भरपूर उपयोग नहीं कर सके तो प्रौद्योगिकी ताकत के रूप में हमारी स्थिति प्रभावित होगी। यह सिर्फ कागज पर ही रह जाएगा। अदालत ने किशोर न्याय कानून और इसके नियमों पर अमल के लिए दायर जनहित याचिका पर संबंधित फैसला सुनाया। याचिका में आरोप लगाया गया था कि कल्याणकारी उपायों को लागू करने के संबंध में सरकार पक्षपात कर रही है।
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केंद्र, राज्य सरकार उपलब्ध कराएं सॉफ्टवेयर

पीठ ने कहा कि कम्प्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल कर गुमशुदा बच्चों का आंकड़ा सहजता से एकत्र किया जा सकता है। यह संसाधनों के प्रबंधन और योजना तैयार करने मे बहुत अधिक मददगार होगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र और राज्यों को इस पहलू पर गौर करते हुए किशोर न्याय बोर्ड और बाल कल्याण समितियों के कामकाज के लिए उन्हें इससे संबंधित साफ्टवेयर उपलब्ध कराने चाहिए।

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