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हर मर्ज की दवा अदालत नहीं: सुप्रीम कोर्ट

Mon, 27 Feb 2017 11:14 PM IST
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 27 Feb 2017 11:14 PM IST
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supreme court strict on petitions

हर तरह की समस्या के समाधान के लिए अदालत का रुख करने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है हर मर्ज की इलाज हमारे पास नहीं हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि हमें अमृत-धारा न समझा जाए। शीर्ष अदालत ने जनहित याचिकाओं दायर करने की होड़ पर चिंता जताई है। 

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जनहित याचिकाओं के अंबार से आहत चीफ जस्टिस जेएस खेहर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि हमारे पास हर मर्ज की दवा नहीं है। चीफ जस्टिस ने कहा कि हमारे पास कोई अमृत धारा नहीं है, जिससे तमाम समस्या हल जो जाए। वास्तव में पीठ ने लोगों तक यह सेदेश पहुंचाने की कोशिश की है कि वे फिजूल की जनहित याचिका दाखिल न करें। 
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पीठ ने कहा ‘ऐसा लगता है कि लोग सुबह उठते हैं और कहते है कि चलो सुप्रीम कोर्ट चलते हैं।’ पीठ ने कहा कि लोग याचिका दाखिल करने से पहले संबंधित विभाग या मंत्रालय के पास क्यों नहीं जाते। अदालत ने ये टिप्पणी जया ठाकुर नामक व्यक्ति द्वारा एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की। याचिका में शवों को गरिमापूर्ण तरीके से श्मशान पहुंचाने और धार्मिक रीति रिवाज के तहत दाहसंस्कार कराने की गुहार लगाई गई थी। 

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याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना भी लगाया जा चुका है

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सांकेतिक चित्र

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस जेए खेहर ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि उस वक्त ‘अमृत धारा’ नामक जड़ी-बूटी होती थी। इस जड़ी-बूटी का इस्तेमाल हर मर्ज के लिए होता था। चाहे पेट दर्द हो या सिर दर्द, हर परेशानी के लिए अमृत-धारा के  इस्तेमाल की सलाह दी जाती थी। कुछ ऐसा ही अदालतों के साथ हो रहा है। लोग अदालत को अमृत-धारा समझ रहे हैं। यह कहते हुए अदालत ने याचिका पर परीक्षण करने से इनकार कर दिया। 

याचिका में कहा कि ओडिशा, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश में हुई उन घटनाओं का जिक्र किया गया था, जिसमें एंबुलेंस या किसी तरह का सरकारी वाहन नहीं मुहैया कराए जाने से शवों को कंधे पर उठाकर कई किलोमीटर ले जाने का प्रकरण सामने आया था। 

मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट आए दिन फिजूल की जनहित याचिकाएं दायर करने को लेकर अपनी नाराजगी जताता रहा है। फालतू की याचिकाओं को रोकने के लिए कई याचिकाकर्ताओं पर जुर्माना भी लगाया जा चुका है। करीब 10 दिन पहले बिहार केएक विधायक पर सुप्रीम कोर्ट ने 10 लाख रुपये का जुर्माना भी किया था। 

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