फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme court stayed Death Penalty for convict in raping and murder of minor girl

सुप्रीम कोर्ट: बच्ची से दुष्कर्म-हत्या करने के दोषी की फांसी पर लगाई रोक, मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करने का आदेश

Sun, 06 Mar 2022 02:14 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 06 Mar 2022 02:14 PM IST
सार

सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तराखंड सरकार को आदेश देते हुए कहा कि ऋषिकेश एम्स की उपयुक्त टीम दोषी जयप्रकाश का सुद्धोवाला जिला जेल में जाकर मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करेगी।

विज्ञापन
Supreme court stayed Death Penalty for convict in raping and murder of minor girl
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में साल 2018 में 11 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म फिर हत्या करने के दोषी की फांसी की सजा पर रोक लगा दी। शीर्ष अदालत उत्तराखंड उच्च न्यायालय के जनवरी 2020 के फैसले के खिलाफ दोषी द्वारा दायर एक अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने निचली अदालत द्वारा उसे दी गई मौत की सजा को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अपीलकर्ता का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन किया जाए और उसकी रिपोर्ट दी जाए। न्यायमूर्ति यू यू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उत्तराखंड राज्य में अपील दायर करने का नोटिस 4 मई 2022 को वापस किया जा सकता है। आगे विचार किए जाने तक, अपीलकर्ता को दी गई मौत की सजा के प्रभाव और संचालन पर रोक रहेगी। इस संबंध में एक सूचना तुरंत संबंधित जेल को भेजी जाए।

विज्ञापन


अपीलकर्ता का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन न्याय का हित: सुप्रीम कोर्ट
शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में पूरी मदद करने के लिए अपीलकर्ता द्वारा जेल में रहते हुए किए गए काम की प्रकृति के बारे में संबंधित जेल प्रशासन की रिपोर्ट 25 अप्रैल तक उसके समक्ष रखी जाए। हम यह भी महसूस करते हैं कि न्याय का हित यह निर्धारित करता है कि हम अपीलकर्ता का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन प्राप्त करें।
विज्ञापन


पीठ ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, ऋषिकेश के निदेशक को अपीलकर्ता के मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए एक टीम गठित करने और 25 अप्रैल तक एक रिपोर्ट भेजने को कहा। शीर्ष अदालत, जिसने मामले को 4 मई को आगे के विचार के लिए पोस्ट किया, ने कहा कि जेल अधिकारी अपीलकर्ता की पहुंच और उचित मूल्यांकन की सुविधा में पूरा सहयोग देंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


क्या है मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, पीड़िता के पिता की शिकायत पर जुलाई 2018 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी जिसमें कहा गया था कि जब वह लापता हुई तो उसकी बेटी अन्य बच्चों के साथ खेल रही थी। इसने कहा कि जब शिकायतकर्ता ने अन्य बच्चों से अपनी बेटी के बारे में पूछताछ की, तो उसे बताया गया कि आरोपी उसे अपनी झोपड़ी की ओर ले गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि पीड़िता का शव आरोपी की झोपड़ी में मिला, जो एक मजदूर था और एक निर्माण स्थल पर रहता था। सुनवाई के दौरान आरोपी ने खुद को बेगुनाह बताया और कहा कि उसे मामले में झूठा फंसाया गया है। हाईकोर्ट ने कहा था कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सफल रहा है कि आरोपी ने असहाय पीड़िता की हत्या रेप के बाद की थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed