जुवेनाइल कमेटी से सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा मांगी रिपोर्ट, चुनौती नहीं दे सकते याचिकाकर्ता
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सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट की जुवेनाइल जस्टिस कमेटी से विशेष दर्जा हटाने के बाद घाटी में नाबालिगों को हिरासत में लेने के कथित आरोपों पर नई रिपोर्ट देने को कहा है। हाईकोर्ट के चार जजों वाली कमेटी को तीन दिसंबर तक रिपोर्ट देनी होगी।
जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील हुजैफा अहमदी ने कहा था कि पहले कमेटी द्वारा दी गई रिपोर्ट अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक की रिपोर्ट पर आधारित थी। कमेटी ने पुलिस की रिपोर्ट ही सुप्रीम कोर्ट को भेज दी। हालांकि अहमदी ने यह भी कहा कि संभवत: ऐसा समयाभाव के कारण हुआ हो। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने दोबारा रिपोर्ट देने को कहा।
अहमदी ने आरोप लगाया कि कमेटी ने इस बात पर गौर नहीं किया कि सीआरपीसी और जम्मू-कश्मीर पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत नाबालिगों को हिरासत में नहीं किया जा सकता। एक अक्तूबर को कमेटी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया था कि पांच अगस्त को अनुच्छेद-370 हटने के बाद राज्य में 144 नाबालिगों को हिरासत में लिया गया।
रिपोर्ट को चुनौती नहीं दे सकते याचिकाकर्ता
इससे पहले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस मामले को अगले हफ्ते तक टालने की गुहार की लेकिन पीठ ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण मसले को टाला नहीं जा सकता। मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता इनाक्षी गांगुली और शांता सिन्हा हाईकोर्ट के चार जजों की कमेटी की रिपोर्ट को चुनौती नहीं दे सकतीं। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष यह भी गलत जानकारी दी है कि हाईकोर्ट में कामकाज नहीं हो रहा है।
आज भी जारी रहेगी सुनवाई
घाटी में मीडिया पर पाबंदी के खिलाफ याचिका लगाने वालीं अनुराधा भसीन की ओर से पेश वकील वृंदा ग्रोवर ने पीठ के समक्ष कहा कि 90 दिनों से इंटरनेट, मोबाइल डाटा, एसएमएस सेवा बंद है। सार्वजनिक परिवहन सेवा पूरी तरह बहाल नहीं हुई है। संचार माध्यम न होने से याचिकाकर्ता अखबार प्रकाशित नहीं कर पा रही हैं। उन्होंने पूछा कि क्या आतंकी हिंसा और इंटरनेट के बीच नजदीकी गठजोड़ है? सुनवाई बुधवार को जारी रहेगी।