{"_id":"5a294fe94f1c1bb34a8b4a36","slug":"supreme-court-slams-seniors-lawyer-kapil-sibal-for-louder-speech-and-misbehaviour","type":"story","status":"publish","title_hn":"कपिल सिब्बल के ऊंची आवाज में बहस से सुप्रीम कोर्ट खफा, कहा- ये बर्दाश्त नहीं","category":{"title":"India News","title_hn":"भारत","slug":"india-news"}}
कपिल सिब्बल के ऊंची आवाज में बहस से सुप्रीम कोर्ट खफा, कहा- ये बर्दाश्त नहीं
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 08 Dec 2017 07:38 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अयोध्या मसला, दिल्ली सरकार बनाम राज्यपाल सहित कुछ अन्य मामलों में वरिष्ठ वकीलों के एक समूह के बर्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऊंची आवाज में दलीलें पेश करना यह दर्शाता है कि वकील के पास बहस करने के लिए पर्याप्त तथ्य नहीं हैं। इसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शीर्ष अदालत ने उन्हें चेताया कि बार इसे नियंत्रित करे नहीं तो हमें नियंत्रित करना होगा।
विज्ञापन
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की पांच सदस्यीय संविधान पीठ दरअसल एक पारसी महिला के दूसरे धर्म के व्यक्ति से शादी कर लेने के बाद उसकी धार्मिक पहचान के सवाल पर सुनवाई कर रही थी। लेकिन इस दौरान उन्होंने विवादित ढांचा विध्वंस और दिल्ली-केंद्र विवाद जैसे मामलों में वरिष्ठ वकीलों की ऊंची आवाज में दलीलें पेश करने को लेकर अपनी नाराजगी भी जताई।
विज्ञापन
चीफ जस्टिस ने कहा, ‘बुधवार को वरिष्ठ वकील का बर्ताव घटिया था और इसके एक दिन पहले का बर्ताव तो बेहद घटिया था। यह दुखद है कि कुछ वरिष्ठ वकीलों को ऐसा लगता है कि वे अपना स्वर ऊंचा कर सकते हैं लेकिन इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह अक्षमता भी साबित करता है और वे वरिष्ठ वकील के लिए फिट नहीं हैं।’
विज्ञापन
सिब्बल, धवन और दवे के बर्ताव से नाराज
मंगलवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, राजीव धवन और दुष्यंत दवे ने अदालत पर ही सवाल उठाया था। धवन ने चीफ जस्टिस से कहा था कि आपके कार्यकाल तक इस मामले की सुनवाई खत्म नहीं होगी। वहीं बुधवार को दिल्ली बनाम उपराज्यपाल मामले में दिल्ली सरकार के वरिष्ठ वकील राजीव धवन पांच सदस्यीय संविधान पीठ को अपनी दलीलें सुनने के लिए बाध्य कर रहे थे जबकि इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी थी।
धवन ने तो यह भी कहा कि अगर वह यह केस हार भी जाएं तो उन्हें इसकी परवाह नहीं। पिछले दिनों जजों के नाम पर रिश्वत मामले की सुनवाई के दौरान भी वकीलों और पीठ के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी।
सुब्रह्मण्यम ने उठाया था मामला
बृहस्पतिवार को पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकारों को लेकर सुनवाई कर रही पांच सदस्यीय पीठ के समक्ष वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रह्मणयम ने यह मसला उठाते हुए कहा कि हममें से कुछ वकील सही बर्ताव नहीं कर रहे हैं। सेल्फ रेग्यूलेशन जरूरी है। इस पर पीठ ने कहा कि हम आपकी भावनाओं को समझ सकते हैं। अगर बार ने इसे रेग्यूलेट नहीं किया तो रेग्यूलेट करना हमारी मजबूरी हो जाएगी।