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SC: अनुच्छेद 20-22 को अधिकारातीत घोषित करने की मांग वाली याचिका पर 'सुप्रीम' फटकार; कोर्ट ने मांगा जवाब

Tue, 31 Oct 2023 03:49 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 31 Oct 2023 03:49 PM IST
सार

इस मामले में शीर्ष अदालत ने तीनों वकीलों को एक हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया है कि उन्होंने किन परिस्थितियों में अदालत के समक्ष ऐसी याचिका दायर की।

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Supreme Court  slams lawyers for filing plea to declare Articles 20 and 22 'ultra vires' seeks explanation
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 20 और 22 को (अल्ट्रा वायर्स) संविधान का उल्लंघन करने वाला घोषित करने की मांग वाली याचिका का मसौदा तैयार करने और उसे दाखिल करने को लेकर तीन वकीलों को फटकार लगाई है। न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओआर) रखने का उद्देश्य यह है कि याचिकाओं की प्रारंभिक जांच हो। इसमें कहा गया है कि एओआर पदनाम केवल याचिकाओं पर हस्ताक्षर करने वाला प्राधिकारी नहीं होना चाहिए। बता दें कि इस पीठ में न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया और न्यायमूर्ति पीके मिश्रा भी शामिल हैं। 

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जस्टिस संजय किशन कौल की तीन सदस्यीय पीठ ने कहा, शीर्ष अदालत में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड (एओआर) रखने का उद्देश्य यह है कि याचिकाओं की प्रारंभिक जांच हो। इसमें कहा गया है कि एओआर पदनाम केवल याचिकाओं पर हस्ताक्षर करने वाला प्राधिकारी नहीं होना चाहिए। कोई बस उठकर आ जाता है, आप अपनी फीस जमा कराते हैं और याचिका दायर कर देते हैं। यह स्वीकार्य नही है। आपके बार लाइसेंस रद्द किये जाने चाहिए। संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी याचिका कैसे दायर की जा सकती है? पीठ ने पूछा, एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड और मसौदा तैयार करने वाले वकील कौन हैं, उन्होंने इस पर हस्ताक्षर कैसे किए? कुछ जिम्मेदारी तो होनी ही चाहिए और आप (बहस करते हुए) सलाह देते हैं, आप कैसे सहमत हुए? बार में आपकी क्या हैसियत है? यह बहुत गंभीर है इसने हमारी अंतरात्मा को झकझोर दिया है कि ऐसी याचिका दायर की गई है। पीठ ने तीनों वकीलों को एक हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया कि उन्होंने किन परिस्थितियों में अदालत के समक्ष ऐसी याचिका दायर की।
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सुप्रीम कोर्ट तमिलनाडु निवासी एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।  इसमें कहा गया है कि भारत के संविधान, 1950 के अनुच्छेद 20 और 22 को, भारत के संविधान, 1950 के भाग III के अधिकारातीत, अनुच्छेद 14, 15, 19 और 21 का उल्लंघन घोषित किया जाए। 
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बता दें कि संविधान का अनुच्छेद 20 अपराधों के लिए दोषसिद्धि के संबंध में संरक्षण से संबंधित है। वहीं, अनुच्छेद 22 कुछ मामलों में गिरफ्तारी और हिरासत से संरक्षण से जुड़ा है। याचिका में संविधान के अनुच्छेद 20 और 22 को अनुच्छेद 14 (विधि के समक्ष समानता) और 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की सुरक्षा) सहित कुछ अन्य अनुच्छेदों का उल्लंघन करने वाला घोषित करने की मांग की गई है। 


सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के नियम क्या हैं?
संविधान के अनुच्छेद 145 के तहत सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए गए नियमों के अनुसार शीर्ष अदालत में किसी पक्ष की तरफ से ‘एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड’ का दर्जा रखने वाले वकील ही दलील रख सकते हैं।

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