फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court seeks response from centre in plea to constitute media tribunal to adjudicate complaints nba pci

याचिका में 'मीडिया न्यायाधिकरण' गठित करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने मांगा केंद्र से जवाब

Mon, 25 Jan 2021 07:42 PM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Sneha Baluni Updated Mon, 25 Jan 2021 07:42 PM IST
विज्ञापन
supreme court seeks response from centre in plea to constitute media tribunal to adjudicate complaints nba pci
सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो) - फोटो : social media

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) और न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) से जवाब मांगा, जिसमें मीडिया, चैनलों और नेटवर्क के खिलाफ शिकायतों पर सुनवाई के लिए 'मीडिया न्यायाधिकरण' गठित करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया कि मीडिया, खासकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, एक बेलगाम घोड़े जैसा हो गया है, जिसे नियंत्रित किए जाने की जरूरत है।

विज्ञापन


प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यन की एक पीठ ने याचिका पर संज्ञान लिया। इसमें मीडिया व्यवसाय नियमों से संबंधित संपूर्ण कानूनी ढांचे पर गौर करने और दिशानिर्देशों पर सुझाव देने के लिए भारत के एक पूर्व प्रधान न्यायाधीश या शीर्ष अदालत के न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की भी मांग की गई है। याचिका को इसी मामले पर लंबित अन्य याचिका के साथ संलग्न किया गया है।
विज्ञापन


पीठ ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, पीसीआई और एनबीए के अलावा, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स फेडरेशन (एनबीएफ) और न्यूज ब्रॉडकास्टिंग स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (एनबीएसए) को भी नोटिस जारी किया। यह अर्जी फिल्म निर्माता नीलेश नवलखा और सिविल इंजीनियर नितिन मेमाने ने संयुक्त रूप से दायर की है। इसकी सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन


अधिवक्ताओं राजेश इनामदार, शाश्वत आनंद और अमित पई के जरिए दायर की गई इस याचिका में कहा गया है कि यह अर्जी मीडिया-व्यवसाय के मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगाने के लिए नहीं है। याचिका में कहा गया है कि यह केवल गलत सूचना, भड़काऊ कवरेज, फर्जी समाचार और निजता के उल्लंघन के लिए कुछ जवाबदेही लाने के लिए है।

इसमें व्यापक नियामक प्रतिमान को रेखांकित करने वाले दिशानिर्देशों को तैयार करने का अनुरोध किया गया है जिसके भीतर प्रसारक और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया वाले संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत अपने अधिकारों का उपयोग कर सकते हैं, और न्यायिक रूप से उन्हें विनियमित किया जा सके।

याचिका ने कहा गया है, ‘‘मीडिया केवल एक व्यवसाय है, जो कि सत्ता के सबसे शक्तिशाली संरचनाओं में से एक है और इसलिए इसे संवैधानिक मानदंडों और सिद्धांतों द्वारा विनियमित किया जाना चाहिए।’’ इसमें कहा गया है कि स्व-नियामक प्रक्रिया इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रसारक को अपने मामले में न्यायाधीश बना देती है।

इसमें कहा गया है, ‘‘एक स्वतंत्र, नियामक अधिकरण या न्यायिक निकाय की स्थापना से वह दर्शकों/ नागरिकों द्वारा दायर मीडिया-व्यवसायों के खिलाफ शिकायत याचिकाओं पर सुनवाई करके शीघ्रता से निर्णय कर सकते हैं।’’


याचिकाकर्ताओं ने कानूनी मुद्दों को उठाया जिसमें संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को स्वतंत्र, निष्पक्ष और आनुपातिक मीडिया रिपोर्टिंग के अधिकार की परिकल्पना की गई थी। इसमें कहा गया है, ‘‘इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर पाबंदियों को एक उच्च स्तर पर रखा जाना चाहिए क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में मीडिया ट्रायल दैनिक क्रम बन गया है।’’

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed