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SC: 'क्या ओडिशा में लौह अयस्क खनन की सीमा तय कर सकते हैं?', सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय से मांगा जवाब

Mon, 04 Dec 2023 02:46 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: नितिन गौतम Updated Mon, 04 Dec 2023 02:46 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार से भी चार हफ्ते में हलफनामा दायर कर उन माइनिंग फर्म से बकाए की रिकवरी पर जवाब मांगा है।

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Supreme court seeks Environment Ministry views on capping iron ore mining in Odisha
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पर्यावरण मंत्रालय से जवाब मांगा है कि क्या ओडिशा स्थायी विकास के लिए लौह अयस्क की खदानों में खनन की सीमा तय कर सकते हैं? दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के एक सवाल के जवाब में दायर किए गए हलफनामे पर गौर करते हुए कहा कि इसमें पर्यावरण मंत्रालय की राय नहीं है। हम इस पर पर्यावरण मंत्रालय की भी राय चाहते हैं। 
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मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने यह आदेश दिया है। बता दें कि 'कॉमन कॉज' नामक एक एनजीओ ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि ओडिशा में लौह अयस्क की खदाने अगले 25 सालों में पूरी तरह से खाली हो जाएंगी। ऐसे में इन खदानों में खनन की सीमा तय होनी चाहिए। इस याचिका पर कोर्ट ने पहले केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। 
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सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा सरकार से भी चार हफ्ते में हलफनामा दायर कर उन माइनिंग फर्म से बकाए की रिकवरी पर जवाब मांगा है, जिन्हें नियमों का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया था। कोर्ट ने अटैच्ड फर्म की संपत्तियों की डिटेल्स भी देने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। ओडिशा सरकार के वकील ने बीती 14 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में बताया था कि डिफाल्टर खनन फर्म से 2622 करोड़ रुपये का जुर्माना वसूला गया है। 
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याचिका में मांग की गई है कि डिफाल्ट फर्मों को भविष्य में किसी भी नीलामी में शामिल होने से रोका जाए और उनकी संपत्ति जब्त कर वसूली की जाए। मामले पर सुनवाई के दौरान वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि राज्य में लौह अयस्क की खदानों में खनन की सीमा तय की जानी चाहिए, क्योंकि राज्य के पास सीमित रिजर्व बचा है। कोर्ट ने केंद्र के बाद अब पर्यावरण मंत्रालय से इस पर उनकी राय मांगी है। 
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