फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   supreme court says When the sentence of life imprisonment decreased than Death penalty

मृत्युदंड तभी सुनाएं, जब उम्रकैद की सजा भी लगे कम : सुप्रीम कोर्ट

Thu, 14 Mar 2019 05:28 AM IST
Avdhesh Kumar एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली Published by: Avdhesh Kumar Updated Thu, 14 Mar 2019 05:28 AM IST
विज्ञापन
supreme court says When the sentence of life imprisonment decreased than Death penalty
supreme court - फोटो : PTI
पूरे विश्व में मौत की सजा पर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने मृत्युदंड के एक मामले में बेहद अहम टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि किसी भी मुजरिम को मौत की सजा तभी सुनाई जाए, जब उस मामले में आजीवन कारावास की सजा भी अनुचित लगे यानी जुर्म के हिसाब से कम दिखाई दे। यह टिप्पणी करते हुए शीर्ष अदालत ने साल 2015 में 5 साल की नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या करने के दोषी आरोपी को सुनाई गई फांसी की सजा को 25 साल कैद में तब्दील कर दिया।
विज्ञापन


मध्य प्रदेश के सतना के एक स्कूल की बस के ड्राइवर सचिन कुमार सिंगराहा ने फरवरी, 2015 में 5 साल की बच्ची से दुष्कर्म करने के बाद उसे मारने के इरादे से घायल कर दिया था। बाद में बच्ची की अस्पताल में मौत हो गई थी। सचिन को निचली अदालत और फिर हाईकोर्ट ने दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। ड्राइवर ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर मंगलवार को जस्टिस एनवी रमाना, जस्टिस एमएम शांतानागौदार और जस्टिस इंद्रा बनर्जी ने सुनवाई की। 
विज्ञापन


सुनवाई के दौरान तीनों जजों ने ड्राइवर की दोषमुक्त किए जाने की अपील को खारिज कर दिया। लेकिन साथ ही उसे निचली अदालत और फिर हाईकोर्ट से बरकरार रखी गई फांसी की सजा को भी खारिज कर दिया और कहा कि आरोपी के खिलाफ सुबूत मौजूद हैं, लेकिन रिकॉर्ड में सुबूतों की विसंगतियां और प्रक्रियागत खामी भी दर्ज की गई थी। इस टिप्पणी के साथ पीठ ने फांसी की सजा को 25 साल कैद की सजा में तब्दील कर दिया।  
विज्ञापन
विज्ञापन


पीठ ने यह भी कहा कि आरोपी पर इससे पहले किसी तरह के अपराध का आरोप नहीं होने और उसके पिछले आचरण को ध्यान में रखते हुए हम आश्वस्त नहीं हैं कि उसके सुधरने की गुंजाइश कम थी। 

एक ही लकीर पर चलने की परंपरा बदलिए

पीठ ने इस दौरान कहा कि अपराध से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखकर ही सजा तय की जानी चाहिए। आपराधिक मामले के ट्रायल में एक ही लकीर पर चलने की परंपरा को बदलना होगा। ट्रायल तटस्थ नजरिए के साथ तार्किक और यथार्थवादी सोच वाले होने चाहिए।


अपवाद ही रखिए मौत की सजा को

पीठ ने मृत्युदंड को 25 साल कैद में बदलने का ऐलान करते हुए कहा, यह पूरी तरह तय है कि उम्र कैद की सजा वह प्रावधान है, जिसके लिए मौत की सजा अपवाद मामले में ही दी जाती है। मृत्युदंड तभी दिया जाना चाहिए, जब उम्रकैद की सजा अपराध से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए बेहद कम लगे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed