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सुप्रीम कोर्ट ने दंगों और तोड़फोड़ की घटनाओं को बताया गंभीर, बनेंगे नए नियम

Sat, 11 Aug 2018 12:13 AM IST
भाषा, नई दिल्ली
भाषा, नई दिल्ली Updated Sat, 11 Aug 2018 12:13 AM IST
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supreme court says Rule of riots, rioting cases will be made law 
Supreme Court
उच्चतम न्यायालय ने आज देशभर में प्रदर्शनों के दौरान दंगों और संपत्तियों की तोड़फोड़ की बढ़ती घटनाओं को ‘‘गंभीर’’ बताया और कहा कि वह कानून में संशोधन के लिए सरकार का इंतजार नहीं करेगा। शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणियां उस समय कीं जब अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया कि देश के किसी न किसी हिस्से में लगभग हर सप्ताह ही दंगे और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
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उन्होंने कांवड़ियों से जुड़ी हिंसा की हालिया घटनाओं का जिक्र किया। वेणुगोपाल ने पीठ से कहा, ‘‘कांवड़िये दिल्ली में कार पलट रहे हैं, जब फिल्म पद्मावत प्रदर्शित हुयी तो एक समूह ने प्रमुख अभिनेत्री की नाक काटने की धमकी दे दी। कुछ नहीं हुआ। कोई प्राथमिकी नहीं।’’ 
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इस संबंध में उन्होंने महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर विरोध प्रदर्शन और अजा-अजजा मामले में शीर्ष अदालत के फैसले के बाद देश के कई हिस्सों में हुयी हिंसा का भी जिक्र किया। पीठ ने शीर्ष विधि अधिकारी से पूछा, ‘‘तो आपका सुझाव क्या है?’’ 
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अटार्नी जनरल ने कहा, ‘‘ऐसी घटनाओं के लिये पुलिस अधीक्षक जैसे वरिष्ठ अधिकारियों पर जिम्मेदारी डालनी चाहिए।’’ उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि संबंधित डीडीए अधिकारी को उसके क्षेत्र में इस तरह के निर्माण के लिए जवाबदेह ठहराने के फैसले के बाद दिल्ली में अनधिकृत निर्माण रुक गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार इस तरह के प्रदर्शनों से निपटने के लिए वर्तमान कानून में संशोधन पर विचार कर रही है और उन्होंने अदालतों से उपयुक्तता के आधार पर कानून में बदलाव के लिए विधायिका को अनुमति देने को कहा। पीठ ने कहा, ‘‘हम संशोधन के लिए इंतजार नहीं करेंगे। यह गंभीर स्थिति है और यह रुकना चाहिए।’’ 


इसके बाद पीठ ने वकील पी वी दिनेश के जरिये ‘कोडुंगगालुर फिल्म सोसायटी’ द्वारा दायर याचिका पर आदेश सुरक्षित रख दिया जिसमें देश में शांतिपूर्ण प्रदर्शन सुनिश्चित करने के लिए 2009 के एक फैसले में दिये गये शीर्ष अदालत के निर्देशों को लागू करने की मांग की गई। पीठ ने दिनेश से 2009 में अदालत द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अलावा सुझाव देने के लिए भी कहा।
 
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