सुप्रीम कोर्ट का सरकार को निर्देश, सरकारी और प्राइवेट लैब में मुफ्त हो कोरोना की जांच
देशभर में कोरोना का कहर जारी है। इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बड़ा फैसला देते हुए कहा है कि मान्यता प्राप्त सरकारी और प्राइवेट लैब में कोरोना का टेस्ट मुफ्त हो। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार तुरंत इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करेगी।
Supreme Court issued following interim directions to Centre: Tests relating to COVID19 whether in approved govt laboratories or approved private labs shall be free of cost,the Apex Court said and that Centre shall issue necessary directions in this regard immediately (1/3) pic.twitter.com/p7MPMEomzk
— ANI (@ANI) April 8, 2020विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार निजी लैब में भी कोरोना का टेस्ट फ्री होगा। यह टेस्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन या आईसीएमआर से मंजूरी वाली लैब में या फिर एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लैब में ही होगा। इस मामले में दो हफ्ते बाद फिर सुनवाई होगी।
Tests relating to COVID-19 must be carried out in National Accreditation Board for Testing and Calibration Laboratories(NABL) accredited labs or any agencies approved by WHO or ICMR, the Supreme Court said, in its order (2/3)
— ANI (@ANI) April 8, 2020
सुप्रीम कोर्ट ने वकील शशांक देव सुधी की याचिका पर सुनवाई के बाद यह निर्देश दिया।
The Supreme Court passed the direction after hearing the petition filed by lawyer Shashank Deo Sudhi. (3/3) https://t.co/QvV9HKB6JY
— ANI (@ANI) April 8, 2020
इससे पहले इस बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कोरोना की जांच को लेकर निजी लैब द्वारा लिए जा रहे 4,500 रुपये को लेकर कहा है कि ये अपनी मनमानी से पैसे नहीं वसूल सकते। अदालत ने बुधवार को कहा निजी लैब को कोरोना जांच के लिए पैसे लेने की अनुमति नहीं होनी चाहिए। हम इस मामले पर आदेश पारित करेंगे।
जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस रविंद्र भट्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा हम निजी लैब को कोविड-19 के परीक्षण के लिए पैसे वसूलने की अनुमति नहीं देते हैं। सरकार को इसकी जांच मुफ्त में करनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल जनरल तुषार मेहता को सुझाव देते हुए कहा कि निजी लैब को जांच के लिए ज्यादा शुल्क न दें। कोई ऐसा तंत्र विकसित करें जिसके तहत निजी लैब के टेस्ट राशि को सरकार वापस कर सके। सॉलिसिटर जनरल ने जवाब देते हुए कहा कि वो इस मामले में उचित कदम उठाएंगे। सरकार अपनी तरफ से हर संभव प्रयास रही है।
उन्होंने कहा कि 118 प्रयोगशालाओं में रोजाना 15 हजार टेस्ट हो रहे थे। इन 47 निजी प्रयोगशालाओं को जोड़ा गया। पता नहीं कितनी और चाहिए होंगी। अभी ये भी पता नहीं है कि लॉकडाउन कब तक चलेगा।
बता दें 31 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें सरकारी और निजी लैब में कोरोना वायरस के संक्रमण की जांच निशुल्क कराने का दिशानिर्देश क्रेंद्र सरकार को देने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसी याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा था। जस्टिस नागेश्वर राव और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को ईमेल आदि के माध्यम से याचिका की प्रति सॉलिसिटर जनरल को देने के निर्देश दिए थे।
मेडिकल स्टाफ को सुरक्षा उपलब्ध कराएं राज्य और पुलिस प्रशासन
देश की सर्वोच्च अदालत ने देश के विभिन्न हिस्सों में हुई उन घटनाओं का संज्ञान लिया जिनमें स्वास्थ्य कर्मचारियों और डॉक्टरों पर हमला किया गया और उनके साथ अभद्रता की गई। अदालत ने कहा कि ऐसी घटनाएं डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह राज्य और पुलिस प्रशासन का दायित्व है कि उन सभी जगहों पर आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराए जहां कोरोना के संक्रमित मरीज पाए गए हैं या जहां लोगों को क्वारंटीन किया गया है और जहां लोगों की जांच के लिए मेडिकल स्टाफ को जाना होता है।
Supreme Court directed that it is duty of state and the Police administration to provide necessary security at all places where patients who have been diagnosed #CoronaVirus positive or who have been quarantined are housed and places where medical staff visit for screening of ppl https://t.co/HrRu4TI1OA
— ANI (@ANI) April 8, 2020
डॉक्टरों की सैलरी काटी तो सख्त कार्रवाई: सरकार
इस दौरान वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा, ऐसे संकट के दौर में डॉक्टरों की सैलरी काटी जा रही है। उनके कडे़ श्रम के बिना पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। इस पर मेहता ने कहा, जो भी डॉक्टरों की सैलरी काटेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
मेडिकल उपकरण का कर रहे इंतजाम
मेहता ने बताया, पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर समेत सभी मेडिकल उपकरण का तेजी से इंतजाम किया जा रहा है। पॉजिटिव लोग किसी को प्रभावित न करें, इसका पूरा ख्याल रखा जा रहा है।
जनता से मिले सुझावों के इस्तेमाल को बने तंत्र
डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा मामले में याचिका पर सुनवाई के दौरान जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस रविंद्र भट्ट की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि क्या केंद्र के लिए ऐसा तंत्र स्थापित करना संभव है, जिसमें बड़े पैमाने पर जनता से मिले सुझावों का केवल लॉकडाउन के लिए ही नहीं बल्कि चीजों की नियामक योजना में भी इस्तेमाल किया जा सके।
मेहता ने कहा, पुलिस और सरकार ने हर बंदोबस्त किया है। अदालत डॉक्टरों, पैरा मेडिकल स्टाफ और अन्य फ्रंटलाइन वर्कर्स को पर्याप्त संख्या में पीपीई किट, मास्क, सैनिटाइजर, और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।
वकीलों ने की आपात कोष बनाने की मांग
लॉकडाउन को देखते हुए वकीलों ने देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसए बोबडे और बार काउंसिल ऑफ इंडिया को पत्र लिखकर एक आपात कोष बनाए जाने की मांग की है, ताकि जरूरतमंद युवा वकीलों की आर्थिक मदद की जा सके।