{"_id":"61071b4d32cef204056115f8","slug":"supreme-court-says-premature-release-of-people-with-political-access-is-wrong","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुप्रीम कोर्ट: यूपी के तिहरे हत्याकांड में उम्रकैद की सजा के दोषी को रिहा करने के फैसले को गलत ठहराया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सुप्रीम कोर्ट: यूपी के तिहरे हत्याकांड में उम्रकैद की सजा के दोषी को रिहा करने के फैसले को गलत ठहराया
Mon, 02 Aug 2021 03:38 AM IST
Jeet Kumar
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
राजीव सिन्हा, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 02 Aug 2021 03:38 AM IST
सार
पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा जैनी को जेल से रिहा करने के राज्यपाल के आदेश को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा। पीठ ने कहा कि हमें हाईकोर्ट के आदेश में दखल देने का कोई आधार नहीं दिखता है।
विज्ञापन
Supreme Court
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने सपा के एक पदाधिकारी की सिफारिश पर तिहरे हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए एक दोषी को महज पांच साल बाद ही रिहा करने के यूपी की पूर्ववर्ती सपा सरकार के फैसले पर आपत्ति जताई है। शीर्ष अदालत ने कहा कि इस तरह से आपराधिक न्याय प्रणाली के साथ तोड़-मरोड़ करने की इजाजत नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन
जस्टिस विनीत शरण और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने दोषी जैनी सिंह की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यदि उम्रकैद के दोषियों को सिर्फ पांच वर्ष की सजा के बाद रिहा किया जाएगा तो आपराधिक न्याय शास्त्र का क्या होगा? इसका मतलब तो यह हुआ कि अगर किसी की राजनीतिक पहुंच है तो उसे समय से पूर्व रिहा किया जा सकता है।
विज्ञापन
गत 26 फरवरी को हाईकोर्ट ने जैनी को समर्पण करने का आदेश देते हुए सजा काटने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट ने बुलंदशहर में हुए तिहरे हत्याकांड में मारे गए व्यक्तियों में से एक कर्ण सिंह की पत्नी प्रकाशवती सिंह की याचिका पर आदेश पारित किया था। निचली अदालत ने 2011 में जैनी समेत छह लोगों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
विज्ञापन
योगी के शपथ लेने से चार दिन पहले लिया गया था फैसला
जैनी को रिहा करने का निर्णय योगी आदित्यनाथ के प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने से ठीक चार दिन पहले, 15 मार्च 2017 को लिया गया था।
तत्कालीन जेल विभाग के मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया ने समाजवादी सैनिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष कर्नल सत्यवीर यादव के पत्र के आधार पर जैनी को उनकी वृद्धावस्था और अस्वस्थता के कारण रिहा करने की सिफारिश की गई थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री और राज्यपाल ने उस सिफारिश को मंजूरी दी थी।
क्या कहती है सीआरपीसी की धारा-433ए
आपराधिक प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-433 ए में कहा गया है कि जब किसी व्यक्ति को अपराध के लिए आजीवन कारावास की सजा दी जाती है, जिसके लिए कानून के तहत फांसी की सजा का भी प्रावधान हो, तो ऐसे व्यक्ति की रिहाई पर तब तक विचार नहीं किया जा सकता जब तक उसने जेल से कम से कम 14 साल की कैद काट न ली हो।