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सुप्रीम कोर्ट का फैसला: दूरसंचार सेवाओं में हो रही है समस्या तो उपभोक्ता मंचों का रुख कर सकते हैं मोबाइल यूजर

Sun, 27 Feb 2022 05:55 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Sun, 27 Feb 2022 05:55 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि जब एक राहत के लिए दो समाधान उपलब्ध हों तो संबंधित पक्ष इनमें से किसी एक विकल्प का चुनाव कर सकता है।

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Supreme Court says mobile phone users can approach consumer forum for deficiency in service
सर्वोच्च न्यायालय - फोटो : PTI

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि अगर किसी व्यक्ति को दूरसंचार सेवाओं में किसी समस्या का सामना करना पड़ रहा तो वह कंपनी के खिलाफ अपनी शिकायत के साथ सीधे उपभोक्ता मंचों का रुख कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि तथ्य यह है कि 1885 के भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम के तहत मध्यस्थता का उपाय वैधानिक प्रकृति का है और ऐसे मामलों को उपभोक्ता फोरम के अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं करता है।

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पीठ ने कहा, 'मध्यस्थता के उपाय का विकल्प उपभोक्ता के लिए खुला रहेगा, लेकिन ऐसा करने के लिए कानून में कोई बाध्यता नहीं है। उपभोक्ता के लिए उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत, जिसे अब 2019 के अधिनियम से प्रतिस्थापित किया जा चुका है, प्रदान किए गए उपचारों का सहारा लेने के लिए यह खुला रहेगा।'
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अदालत ने यह आदेश वोडाफोन की एक याचिका पर पारित किया। कंपनी ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के एक आदेश को चुनौती दी थी। इसके द्वारा उसने एससीडीआरसी के विचार की पुष्टि की थी कि 1885 के अधिनियम की धारा 7बी निजी सेवा प्रदाताओं पर लागू नहीं होगी क्यों कि यह एक टेलीग्राफ प्राधिकरण नहीं है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2019 के उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम की धारा 2(42) में निहित परिभाषा का अर्थ यह नहीं लगाया जा सकता कि 1986 के पुराने अधिनियम के तहत दूरसंचार सेवाओं को उपभोक्ता मंचों के अधिकार क्षेत्र से बाहर रखा गया था। पीठ ने कहा, उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 2 (ओ) में अभिव्यक्ति सेवा की परिभाषा दूरसंचार सेवाओं सहित हर सेवा को समझने के लिए पर्याप्त है।

घर खरीदने वालों से संबंधित पिछले साल के एक फैसले का उल्लेख करते हुए पीठ ने कहा कि तब सुप्रीम कोर्ट ने मामले में चुनाव का सिद्धांत लागू किया था। इसके अनुसार जब एक राहत के लिए दो समाधान उपलब्ध हों तो संबंधित पक्ष इनमें से किसी एक विकल्प का चुनाव कर सकता है। पीठ ने आगे कहा कि यह तब तक उपलब्ध रहता है जब तक कि दोनों उपायों के दायरे एकदम अलग-अलग न हों।


पीठ ने वोडाफोन आइडिया सेल्युलर लिमिटेड की इस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि 2019 के अधिनियम में टेलीग्राफ सेवाओं का विशिष्ट समावेश एक संकेतक है कि यह केवल नए कानून के परिणामस्वरूप था कि दूरसंचार सेवाओं को उपभोक्ता मंच के अधिकार क्षेत्र में लाया गया था। .

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