SC: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- हाईकोर्ट सुनिश्चित करें कि जमानत के मामले में सभी तथ्य आदेश में दर्ज हो
पटना उच्च न्यायालय के एक आदेश से उत्पन्न अग्रिम जमानत के मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसआर भट और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने रेखांकित किया कि कई मौकों पर आदेश में सुनवाई अदालत के समक्ष लंबित मामले की कोई जानकारी नहीं होती है न प्राथमिकी में दर्ज अपराध की प्रकृति का ब्योरा होता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालयों को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि जमानत आदेश में प्राथमिकी संख्या, संबंधित पुलिस थाने का नाम और कथित आरोप सहित सभी आवश्यक मूलभूत जानकारी प्रारूप के तहत दर्ज किया जाए। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसने गौर किया है कि जमानत प्रक्रिया को लेकर विभिन्न उच्च न्यायालयों के आदेश प्रारूप में उल्लेखनीय रूप से अंतर है।
पटना उच्च न्यायालय के एक आदेश से उत्पन्न अग्रिम जमानत के मामले पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति एसआर भट और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने रेखांकित किया कि कई मौकों पर आदेश में सुनवाई अदालत के समक्ष लंबित मामले की कोई जानकारी नहीं होती है न प्राथमिकी में दर्ज अपराध की प्रकृति का ब्योरा होता है। अदालत ने संबंधित आदेश 15 मार्च को दिया था।
पीठ ने 15 मार्च को जारी अपने आदेश में कहा, इस अदालत की राय है कि जमानत/अग्रिम जमानत के मामलों में उच्च न्यायालयों को यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि आदेश के प्रारूप में सभी बुनियादी आवश्यक चीजों (अर्थात् प्राथमिकी संख्या, तारीख, संबंधित पुलिस स्टेशन और कथित रूप से किए गए अपराध आदि) को विधिवत दर्ज किया गया है या में परिलक्षित किया गया है। शीर्ष अदालत ने कहा कि उसका आदेश सभी उच्च न्यायालयों को उनके रजिस्ट्रार के माध्यम से प्रसारित किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट एक ऐसे व्यक्ति द्वारा दायर याचिका की सुनवाई कर रहा था जिसे उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत देने से वंचित कर दिया गया था।