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सुप्रीम कोर्ट : वस्तु एवं सेवाओं को महज रिफंड के लिए आईटीसी के समान नहीं माना जा सकता
Tue, 14 Sep 2021 07:25 AM IST
Kuldeep Singh
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Tue, 14 Sep 2021 07:25 AM IST
सार
शीर्ष अदालत ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) की धारा 54(3) की वैधता को बरकरार रखा। पीठ ने कहा, कर की दर पीठ ने गुजरात और मद्रास हाईकोर्ट के उस विवादास्पद फैसले, सीजीएसटी के तहत आईटीसी रिफंड का नियम वस्तु एवं सेवा पर भी समान रूप से लागू होता है, से जुड़ी याचिकाओं पर यह निर्णय दिया।
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supreme court, सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ani
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विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने जीएसटी पर अहम फैसले में केंद्र सरकार की याचिका स्वीकार करते हुए कहा, सीजीएसटी कानून के तहत वस्तु एवं सेवाओं को महज रिफंड के लिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) की तरह नहीं माना जा सकता। कानून के तहत रिफंड के लिए इसकी सांविधानिक पात्रता नहीं है।
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शीर्ष अदालत ने केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) की धारा 54(3) की वैधता को बरकरार रखा। इसके तहत अप्रयुक्त आईटीसी रिफंड के मामले का निपटारा किया जाता है।
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जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा, कर की दर पीठ ने गुजरात और मद्रास हाईकोर्ट के उस विवादास्पद फैसले, सीजीएसटी के तहत आईटीसी रिफंड का नियम वस्तु एवं सेवा पर भी समान रूप से लागू होता है, से जुड़ी याचिकाओं पर यह निर्णय दिया। शीर्ष अदालत ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को असांविधानिक मानते हुए दरकिनार कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने तीन नामों पर लगाई मुहर
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने तीन अतिरिक्त जजों को गुवाहाटी हाईकोर्ट में स्थायी नियुक्ति के लिए प्रस्तावित तीन जजों के नाम पर मुहर लगा दी है। कॉलेजियम ने न्यायाधीश सौमित्र सैकिया, पार्थिवज्योति सैकिया व एस हुकातो स्वु को गुवाहाटी हाईकोर्ट में स्थायी नियुक्ति दी है। कॉलेजियम में मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण के साथ न्यायाधीश यूयू ललित, न्यायाधीश एम खानविलकर थे।