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दिल्ली: 'तारीख पे तारीख' देने से सुप्रीम कोर्ट नाराज, कहा- अदालतों द्वारा टालमटोल से हम पर अनावश्यक बोझ

Sun, 19 Sep 2021 09:45 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 19 Sep 2021 09:45 PM IST
सार

अदालत ने माना है कि मामलों के टालमटोल करने से उस पर अनावश्यक बोझ पड़ता है क्योंकि उसने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है जिसकी अग्रिम जमानत याचिका पिछले सात महीनों से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है।

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Supreme Court says, Deferments by courts causing unnecessary burden on us, verdict on ews quota
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

अदालतों द्वारा 'तारीख पे तारीख' देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है। अदालत ने माना है कि मामलों के टालमटोल करने से उस पर अनावश्यक बोझ पड़ता है क्योंकि उसने एक ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है जिसकी अग्रिम जमानत याचिका पिछले सात महीनों से इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है।

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इस मामले में न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की पीठ ने यह कहते हुए राहत दी कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उसके समक्ष लंबित अग्रिम जमानत याचिका पर अभी तक कोई विचार नहीं किया है। जजों ने कहा कि हम मानते हैं कि इस तरह की टालमटोल से हमपर अनावश्यक बोझ  पड़ रहा है।
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पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को जांच के दौरान कभी गिरफ्तार नहीं किया गया था, हालांकि उसने जांच में सहयोग किया। ऐसे में, आरोप पत्र दायर होने पर, याचिकाकर्ता को गिरफ्तार करने और उसे अदालत के समक्ष पेश करने की कोई आवश्यकता नहीं है। कानूनी स्थिति को अब हमने स्पष्ट कर दिया है। शीर्ष अदालत ने एक आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत की मांग करने वाले एक आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।
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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम ट्रायल कोर्ट के समक्ष सुनवाई की अगली तारीख तक याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी के खिलाफ अंतरिम संरक्षण प्रदान करते हैं और सीआरपीसी की धारा 82 (फरार व्यक्ति के लिए उद्घोषणा) के तहत 3 अगस्त, 2021 के आदेश के संचालन पर रोक लगाते हैं। निचली अदालत के समक्ष पेश होने वाले याचिकाकर्ता के साथ कानून के अनुसार निपटा जाएगा। 

क्या है मामला
गाजियाबाद की विशेष सीबीआई अदालत द्वारा याचिकाकर्ता के खिलाफ संज्ञान लेते हुए उसके खिलाफ समन जारी किया गया था। समन मिलने पर याचिकाकर्ता ने 16 जनवरी 2021 को अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था जिसे 28 जनवरी को अस्वीकार कर दिया गया था।

इसके बाद याचिकाकर्ता ने 3 फरवरी, 2021 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष अग्रिम जमानत के लिए एक आवेदन दायर किया। यहां भी सुनवाई में देरी हुई तो याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।


ईडब्ल्यूएस कोटा पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सोमवार को
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली केंद्र सरकार कि ओर से दायर उस विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2021 की केंद्र की अधिसूचना की वैधता को बरकरार रखते हुए अखिल भारतीय कोटा में अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण लागू करने के लिए कहा था। साथ ही ये भी कहा था कि मेडिकल कॉलेजों की सीटों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को प्रदान किए गए 10 फीसदी आरक्षण की अनुमति केवल सुप्रीम कोर्ट के अधीन ही दी जा सकती है।

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