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सुप्रीम कोर्ट: अदालतों में सामान्य तरीके से काम शुरू होना चाहिए

Sat, 09 Oct 2021 06:22 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Sat, 09 Oct 2021 06:22 AM IST
सार

पीठ ने सुनवाई के दौरान शुक्रवार को कहा कि सामान्य स्थिति बहाल करनी होगी, अदालतों को भौतिक रूप से काम करना होगा, क्योंकि आभासी सुनवाई सामान्य नहीं बन सकती है।

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Supreme Court says courts should start functioning normally
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ani

विस्तार

मामलों की आभासी (वर्चुअल) व  भौतिक (फिजिकल) तरीके से सुनवाई की व्यवस्था नाकाम साबित हो रही है, लिहाजा अदालतें सामान्य तरीके से कोर्ट रूम में सुनवाई शुरू करें।

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सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और बीआर गवई की पीठ  ने नेशनल फेडरेशन ऑफ सोसायटीज फॉर फास्ट जस्टिस नाम के एनजीओ और जूलियो रिबेरो, शैलेश आर गांधी की तरफ से दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह बात कही, जिसमें वादियों ने वर्चुअल सुनवाई को मौलिक अधिकार घोषित करने की मांग की थी।
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पीठ ने सुनवाई के दौरान शुक्रवार को कहा कि सामान्य स्थिति बहाल करनी होगी, अदालतों को भौतिक रूप से काम करना होगा, क्योंकि आभासी सुनवाई सामान्य नहीं बन सकती है। पीठ ने याचिकाकर्ताओं से सुझाव मांगते हुए सुनवाई चार सप्ताह के लिए टाल दी।
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शुरुआत में, याचिकाकर्ताओं के वकील मनोज स्वरूप ने कहा, नागरिकों के लिए न्याय तक पहुंच के लिए आभासी सुनवाई को जारी रखना चाहिए। इस पर पीठ ने पूछा कि क्या आपने सुप्रीम कोर्ट की मानक संचालन प्रक्रिया का अध्ययन किया है, अगर आपको तय करना है कि अदालत कैसे चलें तो फिर तो हमें एसओपी को एक तरफ रख देना चाहिए।

अदालतें भौतिक रूप से ही कारगर
पीठ ने कहा कि अदालती कार्यवाही का जीवंत प्रसारण होना अलग बात है, लेकिन यह कहना कि कोरोना से उबरने के बाद भी किसी को अदालत आने की जरूरत नहीं, क्योंकि आभासी सुनवाई नागरिकों का मौलिक अधिकार है, तो अदालतों को बंद कर देना चाहिए। पीठ ने कहा, बीते 70 वर्षों में हमने यही समझा है कि अदालतें भौतिक रूप से ही कारगर हैं।


अदालत दलीलें ही नहीं भावनाएं भी देखती है
पीठ ने कहा, हम यह देख चुके हैं, एक अधिवक्ता अदालत में खड़े होकर दलीलें दे रहे हैं, दूसरे आभासी तरीके से सुनवाई में शामिल हैं। जब लोग हमारे सामने रहते हैं, तो हम सिर्फ दलीलें ही नहीं देखते बल्कि भावनाएं भी देखते हैं।

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