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एनआरसी से बाहर रखे गए 10 फीसदी लोगों का हो दोबारा सत्यापन: सुप्रीम कोर्ट
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Wed, 29 Aug 2018 03:33 AM IST
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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजंस (एनआरसी) के ड्राफ्ट से बाहर रखे गए 10 फीसदी लोगों का दोबारा सत्यापन कराने का आदेश दिया है। दरअसल, शीर्ष अदालत संतुष्ट होना चाहती है कि एनआरसी को लेकर की गई कवायद पुख्ता है या नहीं।
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न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ ने एनआरसी कॉर्डिनेटर प्रतीक हाजेला को इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है कि जिन लोगों को एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया है, क्या उन्हें अपनी वंशावली (लीगेसी) बदलने की इजाजत देने से कोई असर पड़ सकता है।
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पीठ ने यह भी बताने के लिए कहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में कितना वक्त लगेगा। इसके साथ ही पीठ ने एनआरसी के अंतिम ड्राफ्ट में शामिल न होने वाले लोगों के दावों और आपत्तियों के लिए आवेदन लेने की तारीख बढ़ा दी है। पहले यह प्रक्रिया 30 अगस्त से शुरू होने वाली थी।
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एनआरसी के अंतिम मसौदे से बाहर हुए 40 लाख लोगों की आपत्तियों और दावों पर विचार करने के लिए केंद्र के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) में विरोधाभास पर भी पीठ ने सवाल उठाए हैं। पीठ ने कहा कि अगर लोगों को अपनी वंशावली बदलने की इजाजत दी जाती है तो क्या इससे फैमिली ट्री (परिवार वंशावली) गड़बड़ नहीं हो जाएगी? पीठ ने एनआरसी कॉर्डिनेटर को अगली सुनवाई 5 सितंबर तक रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा है।
वंशावली नहीं बदली तो, खो देंगे नौकरी समेत कई अधिकार: केंद्र
केंद्र सरकार की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि एनआरसी के अंतिम मसौदे से जो लोग बाहर रह गए हैं, वे वंशावली बदल सकते हैं। अन्यथा वे नौकरी, भूमि का अधिकार सहित अन्य अधिकार खो बैठेंगे। इस पर पीठ ने मौखिक टिप्पणी की कि यह बड़ी और जटिल इंसानी समस्या है। सरकार द्वारा तैयार एसओपी में कहा गया है कि व्यक्ति अपनी लीगेसी बदल सकता है और अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल कर सकता है।