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Hindi News ›   India News ›   Supreme Court said Why should not the Governor's office to be held in RTI

RTI के दायरे में क्यों नहीं आएं राज्यपाल के दफ्तर: SC

Fri, 07 Jul 2017 09:03 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 07 Jul 2017 09:03 AM IST
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Supreme Court said Why should not the Governor's office to be held in RTI
सु्प्रीम कोर्ट - फोटो : SELF

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह सवाल उठाया कि राज्यपाल आदि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों का दफ्तर सूचना केअधिकार (आरटीआई) के तहत क्यों नहीं आना चाहिए? न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह सवाल केंद्र सरकार द्वारा बांबे हाईकोर्ट केआदेश को चुनौती वाली याचिका पर सुनवाई केदौरान उठाया। वर्ष 2011 को बांबे हाईकोर्ट की पणजी पीठ ने वर्ष 2007 में गोवा की राजनीतिक हालात संबंधी को लेकर राष्ट्रपति को सौंपी गई राज्यपाल की रिपोर्ट  का खुलासा करने के लिए कहा था। 

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पीठ ने कहा कि राज्यपाल आदि संवैधानिक पदों पर आसीन लोगों के दफ्तर को आरटीआई के दायरे में क्यों नहीं आना चाहिए। इसमें छिपाने की क्या बात है। जवाब में केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटिर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही इस तरह का मामला लंबित है। उस याचिका को भी इस याचिका केसाथ जोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि भारत केप्रधान न्यायाधीश की संपत्तियों का खुलासा करने को चुनौती देने वाली याचिका को संविधान पीठ केपास रेफर कर दिया गया है। वर्तमान याचिका को उसकेसाथ जोड़ दिया जाना चाहिए।
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इस पर पीठ ने कहा कि भारत न्यायाधीश की संपत्तियों का खुलासा न करने का कोई कारण नहीं होना चाहिए। वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि राज्यपाल के रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और इसे आरटीआई के दायरे में लाया जाना चाहिए। पीठ ने कहा कि दोनों मामलों को टैग कराने के लिए चीफ जस्टिस के समक्ष उल्लेख करना होगा। यह कहते हुए पीठ ने सुनवाई अगस्त के तीसरे हफ्ते के लिए टाल दी।

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