{"_id":"614de2348ebc3efac91fd3b2","slug":"supreme-court-said-that-the-caretaker-or-servant-does-not-get-the-right-over-the-property-if-it-is-occupied-for-a-long-time","type":"story","status":"publish","title_hn":"टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लंबे समय से कब्जा होने पर केयर टेकर या नौकर को संपत्ति पर हक नहीं मिल जाता","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- लंबे समय से कब्जा होने पर केयर टेकर या नौकर को संपत्ति पर हक नहीं मिल जाता
Fri, 24 Sep 2021 08:05 PM IST
अभिषेक दीक्षित
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अभिषेक दीक्षित
Updated Fri, 24 Sep 2021 08:05 PM IST
सार
जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस अभय एस ओका की पीठ ने यह बात ट्रायल जज के एक आदेश के खिलाफ दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए कही। ट्रायल कोर्ट के आदेश की हाईकोर्ट ने भी पुष्टि की थी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : एएनआई
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि केयर टेकर या नौकर कभी भी संपत्ति पर दावा नहीं कर सकते, भले ही उनके पास संपत्ति पर उनका लंबे समय से कब्जा ही क्यों न हो। जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस अभय एस ओका की पीठ ने यह बात ट्रायल जज के एक आदेश के खिलाफ दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए कही। ट्रायल कोर्ट के आदेश की हाईकोर्ट ने भी पुष्टि की थी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट के अपीलकर्ता (हिमालय विनट्रेड प्राइवेट लिमिटेड) ने एक संपत्ति खरीदने के लिए मालिक के साथ एक करार किया था। सेल डीड (बिक्री विलेख) के जरिए अपीलकर्ता का उस संपत्ति पर स्वामित्व का अधिकार हो गया।
विज्ञापन
शीर्ष अदालत के समक्ष प्रतिवादी (मोहम्मद जाहिद व अन्य) को उस संपत्ति के पूर्व मालिक द्वारा एक केयर टेकर के तौर में नियुक्त किया गया था। पूर्व मालिक द्वारा प्रतिवादी को उस संपत्ति पर निवास करने की अनुमति दी गई थी। प्रतिवादी ने एक मुकदमा दायर करते हुए यह दावा किया कि केयर टेकर के तौर पर उसका उस संपत्ति पर वैध कब्जा है और वह संपत्ति के एकमात्र मालिक है। उसने उस संपत्ति से बेदखल करने से रोकने के लिए स्थायी निषेधाज्ञा की भी मांग की थी।
विज्ञापन
इसके जवाब में अपीलकर्ता ने सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) 1908 के तहत एक आवेदन दायर कर केयर टेकर या नौकर द्वारा शुरू किए गए मुकदमे (सूट) पर आपत्ति जताई थी। ट्रायल कोर्ट ने इस आधार पर आवेदन को खारिज कर दिया कि उठाए गए मुद्दे की परीक्षण अपीलकर्ता द्वारा मुकदमे में लिखित बयान दाखिल करने के बाद ही किया जा सकता है। निचली अदालत के इस आदेश की पुष्टि हाईकोर्ट ने भी कर दी। जिसके बाद अपीलकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल जज और हाईकोर्ट द्वारा दिए गए विचार से असहमति जताई हुए कहा, 'केयर टेकर या नौकर अपने लंबे कब्जे के बावजूद संपत्ति पर कभी भी दावा नहीं कर सकते और मांग पर उन्हें तुरंत कब्जा देना पड़ेगा।' सर्वोच्च न्यायालय ने अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत के निष्कर्षों को दरकिनार कर दिया।