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टिप्पणी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मानसिक रूप से विकलांग लोगों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही अप्रत्यक्ष भेदभाव

Fri, 17 Dec 2021 10:02 PM IST
अभिषेक दीक्षित राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली
राजीव सिन्हा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Fri, 17 Dec 2021 10:02 PM IST
सार

पीठ ने अपीलकर्ता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि वह आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत सुरक्षा का हकदार है, भले ही वह अपने वर्तमान रोजगार लिए अनुपयुक्त पाया जाता है।

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Supreme Court said That disciplinary action against mentally handicapped people indirect discrimination Latest News Update
सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : Social Media

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा, मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करना अप्रत्यक्ष भेदभाव का ही एक पहलू है। ये लोग विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम (आरपीडब्ल्यूडी) के तहत सुरक्षा के हकदार हैं। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा, मानसिक रूप से विकलांग कर्मचारी के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही भेदभावपूर्ण और कानून के प्रावधानों का उल्लंघन है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय पुलिस बल के सहायक कमांडेंट रविंदर कुमार धारीवाल की अपील स्वीकार कर ली। उसे बिना पूर्व स्वीकृति के टेलीविजन चैनलों और अन्य प्रिंट मीडिया के समक्ष आकर कथित तौर पर असंसदीय भाषा के कथित उपयोग के लिए जांच और निलंबन का सामना करना पड़ा था। उस पर डिप्टी कमांडेंट के साथ बदसलूकी के आरोप थे। 
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पीठ ने अपीलकर्ता के चिकित्सा इतिहास में यह नोट किया कि वह 2009 में जुनूनी बाध्यकारी विकार और अवसाद से ग्रस्त है और उसे 40 से 70 प्रतिशत विकलांगता वाले स्थायी रूप से विकलांग के रूप में वर्गीकृत किया गया था।
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पीठ ने कहा, मानसिक विकलांगता, सक्षम शरीर वाले व्यक्तियों की तुलना में कार्यस्थल के मानकों का पालन करने की क्षमता को कम करती है। ऐसे व्यक्तियों को अधिक हानि होती है और अनुशासनिक कार्यवाही की चपेट में आ जाते हैं। लिहाज मानसिक रूप से विकलांग व्यक्तियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करना अप्रत्यक्ष भेदभाव का एक पहलू है। 


पीठ ने अपीलकर्ता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि वह आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत सुरक्षा का हकदार हैं, भले ही वह अपने वर्तमान रोजगार लिए अनुपयुक्त पाया जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अपीलकर्ता को एक वैकल्पिक पद पर फिर से नियुक्त करते समय, यदि जरूरी हो तो वेतन, परिलब्धियां और सेवा की शर्तें संरक्षित होनी चाहिए।

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