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सुप्रीम कोर्ट: सत्ताधारी दल व पुलिस का गठजोड़ परेशान करने वाला चलन

Fri, 27 Aug 2021 02:53 AM IST
Jeet Kumar अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली। Published by: Jeet Kumar Updated Fri, 27 Aug 2021 02:53 AM IST
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supreme court said disturbing trend that police side with ruling party
supreme court - फोटो : ANI

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सत्ताधारी दल और पुलिस अधिकारियों का गठजोड़ बेहद परेशान करने वाली प्रवृत्ति है। अक्सर देखने में आया है कि सत्ताधारी दल का पक्ष लेने वाले पुलिस अधिकारियों को सरकार बदलने पर देशद्रोह के मुकदमे से निशाना बनाया जाता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि हालांकि इसके लिए पुलिस महकमा खुद भी जिम्मेदार है।

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चीफ जस्टिस एनवी रमण और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कहा, देश में दुखद स्थिति है। जब कोई नया दल सत्ता में आता है तो पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करने लगता है। इस प्रवृत्ति को रोकने की जरूरत है।
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पीठ ने छत्तीसगढ़ के निलंबित अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक और 1994 बैच के आईपीएस अधिकारी गुरजिंदर पाल सिंह की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मौखिक टिप्पणी की।
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सिंह ने याचिका दायर कर उनके खिलाफ दायर देशद्रोह के मामले में गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग की है। आईपीएस अधिकारी ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज राजद्रोह की प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सिंह की याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही पुलिस अधिकारी की गिरफ्तारी पर चार सप्ताह के लिए रोक लगा दी। गुरजिंदर पाल सिंह की ओर से वकील फली एस नरीमन और राज्य सरकार की ओर से वकील मुकुल रोहतगी व राकेश द्विवेदी ने अपने-अपने तर्क पेश किए।

यह है मामला
राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) ने 29 जून को सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी।

एक जुलाई, 2021 को याचिकाकर्ता सिंह के आवास पर पुलिस ने छापा मारा। पुलिस को छापे में कथित तौर पर सिंह के घर के पीछे एक नाले में कागज के कुछ टुकड़े मिले, जिसके आधार पर कुछ दस्तावेज बनाये गए। पुनर्निर्मित दस्तावेज को राज्य सरकार के खिलाफ प्रतिशोध और घृणा माना गया। 

पहले आय से अधिक संपत्ति बाद में राजद्रोह का केस दर्ज
कांग्रेस की छत्तीसगढ़ सरकार में पुलिस अधिकारी के खिलाफ पहले आय से अधिक संपत्ति मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 153 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। बाद में आईपीएस अधिकारी के खिलाफ 124-ए (राजद्रोह) के तहत मामला दर्ज किया गया।

अधिकारी को एजेंसियों को जांच में सहयोग का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूसरी पार्टी की सरकार बनने पर बदले की भावना से राजद्रोह का केस दर्ज करना दुखद है। शीर्ष अदालत ने सिंह को हालांकि एजेंसियों को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया है।

आरोपी के वकील 
सुनवाई के शुरू में नरीमन ने कहा कि अधिकारी को मौजूदा मुख्यमंत्री ने एक बार बुलाया था और पूर्व मुख्यमंत्री के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद करने को कहा था। 


राज्य के वकील 
रोहतगी ने कहा कि वह राज्य में पुलिस अकादमी के प्रमुख रहे हैं और उनका आचरण देखिये...वह फरार रहे हैं। इसलिए उन्हें गिरफ्तारी से संरक्षण जैसी राहत नहीं मिलनी चाहिए। 

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