{"_id":"6434aec28971f44e1e00aa34","slug":"supreme-court-said-central-government-needs-to-identify-which-crimes-fall-under-the-category-of-serious-ones-2023-04-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"SC: कौन से अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र करे परिभाषित","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
SC: कौन से अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र करे परिभाषित
Tue, 11 Apr 2023 06:20 AM IST
वीरेंद्र शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: वीरेंद्र शर्मा
Updated Tue, 11 Apr 2023 06:20 AM IST
सार
जस्टिस केएम जोसफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन से कहा, सबसे पहले केंद्र को गंभीर अपराधों की पहचान करने की जरूरत है।
विज्ञापन
SC
- फोटो : सोशल मीडिया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
गंभीर अपराध के आरोपियों को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार को यह पहचान करने की जरूरत है कि कौन से अपराध गंभीर की श्रेणी में आते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। जस्टिस केएम जोसफ और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन से कहा, सबसे पहले केंद्र को गंभीर अपराधों की पहचान करने की जरूरत है। ये परिभाषित होने चाहिए। इसके बाद हम जुलाई में इस पर सुनवाई करेंगे। वकील अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर शीर्ष अदालत ने पिछले साल 28 सितंबर को इस मामले में विधि व न्याय मंत्रालय, गृह मंत्रालय और चुनाव आयोग को नोटिस जारी किया था।
वकील अश्विनी कुमार दुबे के जरिये दायर याचिका में उपाध्याय ने केंद्र और चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की मांग की कि गंभीर अपराध में जिन लोगों के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं और जिनके खिलाफ ट्रायल शुरू हो गया है, इन सभी को चुनाव लड़ने से रोके। इस जनहित याचिका में कहा गया है कि लॉ कमीशन और इस कोर्ट के पूर्ववर्ती आदेशों के बावजूद केंद्र और चुनाव आयोग ने इस मामले में कुछ नहीं किया। याचिका के अनुसार 2019 में चुनाव जीते 539 सांसदों में 233 (43%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
राजनीति से अपराधीकरण खत्म करने के लिए कानूनी संशोधन जरूरी : चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसने राजनीति से अपराधीकरण खत्म करने के लिए सक्रियता से कदम उठाए हैं और सिफारिशें भी की हैं। हालांकि, राजनीति से अपराधीकरण को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए किसी भी अन्य कदम के लिए कानूनी संशोधनों की आवश्यकता होगी, जो उसके दायरे से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में आयोग ने कहा कि उसने अपने 'प्रस्तावित चुनावी सुधार, 2016' में अपनी 2004 की सिफारिश को दोहराया था कि अगर किसी व्यक्ति पर संज्ञेय अपराधों (जिसमें कम से कम पांच साल के कारावास का प्रावधान हैं) का आरोप लगाया गया हो और जहां आरोप तय किए गए हैं और जहां चुनाव से कम से कम छह महीने पहले मामले दायर किए गए हैं, उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
वकील अश्विनी कुमार दुबे के जरिये दायर याचिका में उपाध्याय ने केंद्र और चुनाव आयोग को यह निर्देश देने की मांग की कि गंभीर अपराध में जिन लोगों के खिलाफ आरोप तय हो चुके हैं और जिनके खिलाफ ट्रायल शुरू हो गया है, इन सभी को चुनाव लड़ने से रोके। इस जनहित याचिका में कहा गया है कि लॉ कमीशन और इस कोर्ट के पूर्ववर्ती आदेशों के बावजूद केंद्र और चुनाव आयोग ने इस मामले में कुछ नहीं किया। याचिका के अनुसार 2019 में चुनाव जीते 539 सांसदों में 233 (43%) पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
विज्ञापन
राजनीति से अपराधीकरण खत्म करने के लिए कानूनी संशोधन जरूरी : चुनाव आयोग
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसने राजनीति से अपराधीकरण खत्म करने के लिए सक्रियता से कदम उठाए हैं और सिफारिशें भी की हैं। हालांकि, राजनीति से अपराधीकरण को प्रभावी ढंग से कम करने के लिए किसी भी अन्य कदम के लिए कानूनी संशोधनों की आवश्यकता होगी, जो उसके दायरे से बाहर है। सुप्रीम कोर्ट में दायर अपने हलफनामे में आयोग ने कहा कि उसने अपने 'प्रस्तावित चुनावी सुधार, 2016' में अपनी 2004 की सिफारिश को दोहराया था कि अगर किसी व्यक्ति पर संज्ञेय अपराधों (जिसमें कम से कम पांच साल के कारावास का प्रावधान हैं) का आरोप लगाया गया हो और जहां आरोप तय किए गए हैं और जहां चुनाव से कम से कम छह महीने पहले मामले दायर किए गए हैं, उन्हें चुनाव लड़ने से वंचित किया जाना चाहिए।
विज्ञापन