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सुप्रीम कोर्ट: केंद्र-राज्य के बीच वित्तीय मुद्दे पर केरल की याचिका पर आदेश सुरक्षित, अंतरिम राहत की मांग
Fri, 22 Mar 2024 04:22 PM IST
आदर्श शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: आदर्श शर्मा
Updated Fri, 22 Mar 2024 04:22 PM IST
सार
राज्य की ऋण लेने की शक्तियों पर केंद्र के हस्तक्षेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल सरकार की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया।केरल सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने संघीय ढांचे में केंद्र के रवैये पर सवाल उठाए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
राज्य की ऋण लेने की शक्तियों पर केंद्र के हस्तक्षेप मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केरल सरकार की याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें केंद्र के खिलाफ केरल के एक मुकदमे में अंतरिम राहत की मांग की गई थी। न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश केवी विश्वनाथन की पीठ ने अंतरिम राहत के मुद्दे पर आदेश सुरक्षित रख लिया।
सुप्रीम कोर्ट ने केरल की याचिका पर आदेश रखा सुरक्षित
केरल सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने संघीय ढांचे में केंद्र के रवैये पर सवाल उठाए हैं। केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि केरल सरकार का अपना अधिनियम कहता है कि वे अपने स्वयं के वित्तीय अनुशासन को नियंत्रित करेंगे और प्रस्तुत किया कि वित्त आयोग की सिफारिशों के उल्लंघन का कोई सवाल ही नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर केंद्र और केरल को साथ बैठकर बातचीत करने और मुद्दों को सुलझाने का सुझाव दिया।
केरल की दलील, केंद्र कर रहा राज्य के मामले में हस्तक्षेप
इससे पहले केंद्र सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि चालू वित्त वर्ष में शर्तों के अधीन एकमुश्त उपाय के रूप में केरल को 5,000 करोड़ रुपये की राशि दी जा सकती है। केरल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र के प्रस्ताव पर असहमति व्यक्त करते हुए कहा था कि यह इस धारणा पर आधारित है कि राज्य अतिरिक्त उधार लेने का हकदार नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि 5,000 करोड़ रुपये पर्याप्त नहीं होंगे।
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केंद्र ने कहा- केरल की वित्तीय हालत खराब
केरल सरकार ने अपने हलफनामे में कहा था कि भारत के कुल कर्ज या बकाया देनदारियों में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है। केंद्र राज्य के कर्ज को नियंत्रित नहीं कर सकता है। केरल के मुकदमे का जवाब देते हुए, केंद्र ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि केरल आर्थिक रूप से सबसे खस्ताहाल राज्यों में से एक रहा है।
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सुप्रीम कोर्ट ने केरल की याचिका पर आदेश रखा सुरक्षित
केरल सरकार की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने संघीय ढांचे में केंद्र के रवैये पर सवाल उठाए हैं। केंद्र की ओर से पेश अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने कहा कि केरल सरकार का अपना अधिनियम कहता है कि वे अपने स्वयं के वित्तीय अनुशासन को नियंत्रित करेंगे और प्रस्तुत किया कि वित्त आयोग की सिफारिशों के उल्लंघन का कोई सवाल ही नहीं है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर केंद्र और केरल को साथ बैठकर बातचीत करने और मुद्दों को सुलझाने का सुझाव दिया।
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केरल की दलील, केंद्र कर रहा राज्य के मामले में हस्तक्षेप
इससे पहले केंद्र सरकार ने प्रस्ताव दिया था कि चालू वित्त वर्ष में शर्तों के अधीन एकमुश्त उपाय के रूप में केरल को 5,000 करोड़ रुपये की राशि दी जा सकती है। केरल की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने केंद्र के प्रस्ताव पर असहमति व्यक्त करते हुए कहा था कि यह इस धारणा पर आधारित है कि राज्य अतिरिक्त उधार लेने का हकदार नहीं है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि 5,000 करोड़ रुपये पर्याप्त नहीं होंगे।
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केंद्र ने कहा- केरल की वित्तीय हालत खराब
केरल सरकार ने अपने हलफनामे में कहा था कि भारत के कुल कर्ज या बकाया देनदारियों में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी केंद्र सरकार की है। केंद्र राज्य के कर्ज को नियंत्रित नहीं कर सकता है। केरल के मुकदमे का जवाब देते हुए, केंद्र ने अपने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया कि केरल आर्थिक रूप से सबसे खस्ताहाल राज्यों में से एक रहा है।