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सुप्रीम कोर्ट: मतगणना से पहले ज्यादा वीवीपीएटी सत्यापन की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार
Tue, 08 Mar 2022 09:03 PM IST
Amit Mandal
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Tue, 08 Mar 2022 09:03 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि मतगणना स्थापित प्रथा के तहत होने दिया जाए, आखिरी समय में कुछ नहीं किया जा सकता है।
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VVPAT
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों की मतगणना से पहले वोटर वेरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) सत्यापन और अधिक मतदान बूथों में वीवीपैट सत्यापन की मांग करने वाली याचिका को बुधवार के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने स्थापित प्रथा और कानून के अनुसार मतगणना जारी रखने के लिए कहा है।
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याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार
भारत के चुनाव आयोग द्वारा यह कहने पर कि वह वीवीपीएटी सत्यापन के संबंध में अदालती फैसले का पालन कर रहा है, सुप्रीम कोर्ट ने एक सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार द्वारा दायर जनहित याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हम हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं।
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इससे पहले मंगलवार सुबह वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा द्वारा इस मामले का उल्लेख करने के बाद चीफ जस्टिस इस याचिका को बुधवार को सूचीबद्ध करने के लिए सहमत हुए थे। लेकिन दोपहर को चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने पीठ के समक्ष उल्लेख किया कि यह याचिका विचार करने के योग्य नहीं है क्योंकि चुनाव आयोग के अधिकारियों को वीवीपीएटी सत्यापन के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले का पालन करने के लिए पहले ही प्रशिक्षित किया जा चुका है।
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आयोग के वकील ने दी यह दलील
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि पर्चियों का सत्यापन पहले या दूसरे दौर की मतगणना में किया जाना चाहिए न कि आखिरी में क्योंकि चुनाव एजेंट अंत तक नहीं रहते हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि जब पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की मतगणना बृहस्पतिवार को होने वाली है तो अदालत अंतिम समय में क्या कर सकती है। आयोग के वकील मनिंदर सिंह ने कहा कि लोगों को अदालत के फैसले के अनुसार प्रशिक्षित किया गया है, और याचिका विचार करने योग्य नहीं है।
पीठ ने सिंह की दलीलों पर सहमति जताते हुए कहा कि हम हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं। स्थापित प्रथा, प्रक्रियाओं और कानून के अनुसार गिनती जारी रखें। आयोग सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन कर रहे हैं, उन्होंने बयान दिया है। चीफ जस्टिस ने कहा कि याचिका पर नियमित प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा। याचिका में कहा गया है कि वीवीपीएटी सत्यापन गिनती खत्म होने के बाद करने का कोई फायदा नहीं है। सत्यापन पहले होना चाहिए जब एजेंट, पार्टियां, उम्मीदवार आदि हों।
बता दें कि आठ अप्रैल, 2019 को शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया था कि प्रति विधानसभा क्षेत्र में वीवीपैट पेपर ट्रेल का सत्यापन एक ईवीएम से बढ़ाकर पांच ईवीएम किया जाए। यह आदेश विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा दायर एक याचिका में पारित किया गया था जिसमें कम से कम 50 प्रतिशत मतदान केंद्रों के वीवीपीएटी पेपर ट्रेल के भौतिक सत्यापन की मांग की गई थी।