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कश्मीरी पंडितों की हत्या की जांच से SC का इनकार, कहा- 27 साल बाद कहां से लाओगे सबूत
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 24 Jul 2017 03:50 PM IST
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- फोटो : FILE PHOTO
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सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरी पंडितों की सामूहिक हत्या की जांच करने और मुकदमा चलाने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है। घाटी में 1989-90 में आतंकवाद के चरम काल में 700 कश्मीरी पंडितों की हत्या हुई थी। याचिका में इन्हीं हत्याओं की जांच करने और आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी गई थी।
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चीफ जस्टिस जेएस खेहर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने सोमवार को इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘आप (याची) 27 साल तक हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। अब हमें बताइए कि हत्या, लूट और आगजनी के सबूत कहां से आएंगे।’
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याचिका दायर करने वाली संस्था ‘रूट्स ऑफ कश्मीर’ के वकील विकास पडोरा की दलील थी कि आतंकवाद के कारण कश्मीरी पंडितों को अपना घर-बार छोड़कर घाटी से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इसलिए, वे जांच में शामिल नहीं हो पाए। यह सही है कि देरी हुई लेकिन केंद्र व राज्य सरकार तथा न्यायपालिका ने भी इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
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संस्था का आरोप है कि 215 एफआईआर दर्ज की गईं लेकिन एक मामले में भी कार्रवाई नहीं हुई। मालूम हो कि घाटी में 1989-90 में कश्मीरी पंडितों को कत्लेआम की धमकी देकर अपने घरों से भागने पर मजबूर किया गया था। जो धमकियों से डर कर नहीं गए, उन्हें मार डाला गया, उनके घरों को लूट लिया गया और उन्हें जला दिया गया।