फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Supreme Court Reaction on Ernakulam Church case, judge of Kerala High Court also part of India

एर्नाकुलम चर्च मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- केरल हाईकोर्ट के जज भी भारत का हिस्सा हैं

Sat, 07 Sep 2019 06:33 AM IST
देव कश्यप न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Sat, 07 Sep 2019 06:33 AM IST
विज्ञापन
Supreme Court Reaction on Ernakulam Church case, judge of Kerala High Court also part of India
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : social media

सुप्रीम कोर्ट ने एर्नाकुलम चर्च मामले में केरल हाईकोर्ट को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उसे शीर्ष अदालत का आदेश बदलने का अधिकार नहीं है। यह न्यायिक अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है। फैसला सुनाने वाले जज से कहें कि केरल भी भारत का हिस्सा है।

विज्ञापन


शीर्ष कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा सुनवाई के दौरान इतने नाराज हुए कि उन्होंने आदेश पारित करने वाले हाईकोर्ट के जज का नाम लेने से भी गुरेज नहीं किया। जस्टिस मिश्रा ने कहा, यह बेहद आपत्तिजनक आदेश है। कौन है यह जज? अदालत ने उनका नाम जोर से बोला जाए ताकि सभी को पता चल सके कि वह कैसे जज हैं। जस्टिस मिश्रा ने यह टिप्पणी सेंट मेरी ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च के प्रतिनिधि फादर इसेक माटेमल्ल कोर इपिसकोपा की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
विज्ञापन


उन्होंने 8 मार्च को केरल हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कोर्ट ने जेकोबाइट गुट को चर्च के अंदर प्रार्थना करने की अनुमति दी थी। याचिका में उन्होंने कहा था कि चर्च में समानांतर सेवा की अनुमति नहीं दी जा सकती। जेकोबाइट गुट या मलंकारा चर्च दिशा निर्देशों के तहत नियुक्त न हुए पादरी को चर्च में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधियों को अंजाम देने से रोका जाना चाहिए। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट के जज को हमारे आदेश से छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

केरल सरकार को भी लगाई थी फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई, 2017 में ऑर्थोडॉक्स गुट को 1934 मलंकारा चर्च दिशानिर्देशों अनुसार मलंकारा चर्च के तहत आने वाले 1100 चर्च का प्रशासनिक अधिकार दिया था। इससे पहले, जुलाई में जस्टिस अरुण मिश्रा ने आदेश में हस्तक्षेप करने पर केरल सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने मुख्य सचिव को समन जारी कर चेतावनी दी थी कि अगर मामले में हस्तक्षेप किया गया तो उन्हें जेल भेजा जाएगा।

केरल हमारे आदेश न मानने के लिए जाना जाता है : सुप्रीम कोर्ट

कोच्चि में पांच अवैध अपार्टमेंट कांप्लेक्स नहीं ढहाने पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि राज्य अब उसके आदेशों को नहीं मानने के लिए जाना जाता है। कोच्चि के मराडू में कोस्टल रेगुलेशन जोन अधिसूचना का उल्लंघन करते हुए इन अपार्टमेंट का निर्माण किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को इन्हें ढहाने का आदेश दिया था।

जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने शुक्रवार को आदेश का पालन नहीं होने पर नाराजगी जताई। पीठ ने केरल सरकार के वकील ने कहा, आपका राज्य हमारे आदेशों को पालन नहीं करने के लिए जाना जाता है। अब हम एक मिसाल कायम करना चाहते हैं। पीठ ने केरल सरकार को 20 सितंबर तक आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि अगर कंप्लीशन रिपोर्ट दाखिल नहीं होती है तो मुख्य सचिव को 23 सितंबर को पेश होना होगा। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed