एर्नाकुलम चर्च मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- केरल हाईकोर्ट के जज भी भारत का हिस्सा हैं
सुप्रीम कोर्ट ने एर्नाकुलम चर्च मामले में केरल हाईकोर्ट को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि उसे शीर्ष अदालत का आदेश बदलने का अधिकार नहीं है। यह न्यायिक अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है। फैसला सुनाने वाले जज से कहें कि केरल भी भारत का हिस्सा है।
शीर्ष कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा सुनवाई के दौरान इतने नाराज हुए कि उन्होंने आदेश पारित करने वाले हाईकोर्ट के जज का नाम लेने से भी गुरेज नहीं किया। जस्टिस मिश्रा ने कहा, यह बेहद आपत्तिजनक आदेश है। कौन है यह जज? अदालत ने उनका नाम जोर से बोला जाए ताकि सभी को पता चल सके कि वह कैसे जज हैं। जस्टिस मिश्रा ने यह टिप्पणी सेंट मेरी ऑर्थोडॉक्स सीरियन चर्च के प्रतिनिधि फादर इसेक माटेमल्ल कोर इपिसकोपा की याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
उन्होंने 8 मार्च को केरल हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कोर्ट ने जेकोबाइट गुट को चर्च के अंदर प्रार्थना करने की अनुमति दी थी। याचिका में उन्होंने कहा था कि चर्च में समानांतर सेवा की अनुमति नहीं दी जा सकती। जेकोबाइट गुट या मलंकारा चर्च दिशा निर्देशों के तहत नियुक्त न हुए पादरी को चर्च में किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधियों को अंजाम देने से रोका जाना चाहिए। जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हाईकोर्ट के जज को हमारे आदेश से छेड़छाड़ करने का अधिकार नहीं है। इसके साथ ही पीठ ने हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया।
केरल सरकार को भी लगाई थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई, 2017 में ऑर्थोडॉक्स गुट को 1934 मलंकारा चर्च दिशानिर्देशों अनुसार मलंकारा चर्च के तहत आने वाले 1100 चर्च का प्रशासनिक अधिकार दिया था। इससे पहले, जुलाई में जस्टिस अरुण मिश्रा ने आदेश में हस्तक्षेप करने पर केरल सरकार को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने मुख्य सचिव को समन जारी कर चेतावनी दी थी कि अगर मामले में हस्तक्षेप किया गया तो उन्हें जेल भेजा जाएगा।
केरल हमारे आदेश न मानने के लिए जाना जाता है : सुप्रीम कोर्ट
कोच्चि में पांच अवैध अपार्टमेंट कांप्लेक्स नहीं ढहाने पर सुप्रीम कोर्ट ने केरल सरकार की खिंचाई करते हुए कहा कि राज्य अब उसके आदेशों को नहीं मानने के लिए जाना जाता है। कोच्चि के मराडू में कोस्टल रेगुलेशन जोन अधिसूचना का उल्लंघन करते हुए इन अपार्टमेंट का निर्माण किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने 8 मई को इन्हें ढहाने का आदेश दिया था।
जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने शुक्रवार को आदेश का पालन नहीं होने पर नाराजगी जताई। पीठ ने केरल सरकार के वकील ने कहा, आपका राज्य हमारे आदेशों को पालन नहीं करने के लिए जाना जाता है। अब हम एक मिसाल कायम करना चाहते हैं। पीठ ने केरल सरकार को 20 सितंबर तक आदेश का पालन करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि अगर कंप्लीशन रिपोर्ट दाखिल नहीं होती है तो मुख्य सचिव को 23 सितंबर को पेश होना होगा।