{"_id":"69dcb2b80163dc492e094b65","slug":"supreme-court-raises-concern-on-west-bengal-sir-questions-eci-over-vote-winning-margin-assembly-election-2026-2026-04-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट का EC से सवाल- चुनाव में जीत का अंतर 2% रहा और 15% मतदाता वोट नहीं कर सके तो क्या?","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट का EC से सवाल- चुनाव में जीत का अंतर 2% रहा और 15% मतदाता वोट नहीं कर सके तो क्या?
Mon, 13 Apr 2026 02:39 PM IST
Devesh Tripathi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Mon, 13 Apr 2026 02:39 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों ने दायर की थी। इन लोगों के मामले अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष लंबित हैं। सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई की।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : ANI
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया पर चिंता जताई। उन्होंने मतदाता सूची से हटाए गए व्यक्तियों द्वारा दायर अपीलों पर विचार करने के लिए एक मजबूत अपीलीय तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया।
न्यायमूर्ति बागची ने विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि पश्चिम बंगाल के मामले में चुनाव आयोग ने अन्य राज्यों की प्रक्रिया से अलग 'तार्किक विसंगति' (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी) नामक एक नई श्रेणी पेश की। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार एसआईआर मामले में लिए गए रुख से भी चुनाव आयोग भटक गया। इसमें कहा गया था कि 2002 की मतदाता सूची में शामिल व्यक्तियों को दस्तावेजों को अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी।
ये भी पढ़ें: कर्नाटक की सियासी रस्साकशी: परमेश्वर बोले- पद की चाह गलत नहीं, 20 से अधिक कांग्रेस विधायकों के मन में क्या?
विज्ञापन
न्यायमूर्ति बागची ने चुनाव आयोग से पूछे सवाल
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति बागची ने चुनाव आयोग से कहा, "अगर 10% मतदाता मतदान नहीं करते हैं और जीत का अंतर 10% से अधिक है... तो क्या होगा? मान लीजिए कि अंतर 2% है और मतदान के लिए चिह्नित 15% मतदाता मतदान नहीं कर सके, तो शायद हमें इस पर निश्चित रूप से विचार करना होगा।''
उन्होंने साफ किया कि हम इस मामले पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''कृपया ध्यान रखें कि एक सतर्क मतदाता की चिंता, जिसका नाम सही या गलत तरीके से सूची में नहीं है, हमारे लिए मायने नहीं रखती है।"
SIR का काम देख रहे न्यायिक अधिकारियों पर भी की टिप्पणी
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि एसआईआर का कार्य कर रहे न्यायिक अधिकारियों से अत्यधिक दबाव वाली परिस्थितियों में 100% सटीकता की उम्मीद नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति कम समय सीमा के भीतर प्रतिदिन 1000 से अधिक दस्तावेजों से निपट रहा हो, तो 70% सटीकता को भी 'उत्कृष्ट' माना जाएगा। इसलिए, उन्होंने एक मजबूत अपीलीय तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया।
ये भी पढ़ें: त्रासदी पर सियासत: कांग्रेस नेता बोले- मंत्री विनाशकारी योजनाओं के समर्थक; 500 मौतें और 50 हजार करोड़ की हानि
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने याचिका स्वीकार करने में अनिच्छा जताई। उन्होंने कहा कि हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। बेहतर है कि आप वहां (अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष) इसका पालन करें। पीठ ने यह याचिका खारिज कर दी, लेकिन याचिकाकर्ताओं के लिए अपील का उपाय खुला रखा। पीठ ने स्पष्ट किया कि अगर याचिकाकर्ताओं की अपीलें स्वीकार की जाती हैं, तो जरूरी निर्णय लिए जाएंगे।
अन्य वीडियो
विज्ञापन
न्यायमूर्ति बागची ने विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि पश्चिम बंगाल के मामले में चुनाव आयोग ने अन्य राज्यों की प्रक्रिया से अलग 'तार्किक विसंगति' (लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी) नामक एक नई श्रेणी पेश की। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार एसआईआर मामले में लिए गए रुख से भी चुनाव आयोग भटक गया। इसमें कहा गया था कि 2002 की मतदाता सूची में शामिल व्यक्तियों को दस्तावेजों को अपलोड करने की आवश्यकता नहीं होगी।
विज्ञापन
ये भी पढ़ें: कर्नाटक की सियासी रस्साकशी: परमेश्वर बोले- पद की चाह गलत नहीं, 20 से अधिक कांग्रेस विधायकों के मन में क्या?
विज्ञापन
न्यायमूर्ति बागची ने चुनाव आयोग से पूछे सवाल
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक न्यायमूर्ति बागची ने चुनाव आयोग से कहा, "अगर 10% मतदाता मतदान नहीं करते हैं और जीत का अंतर 10% से अधिक है... तो क्या होगा? मान लीजिए कि अंतर 2% है और मतदान के लिए चिह्नित 15% मतदाता मतदान नहीं कर सके, तो शायद हमें इस पर निश्चित रूप से विचार करना होगा।''
उन्होंने साफ किया कि हम इस मामले पर कोई राय व्यक्त नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ''कृपया ध्यान रखें कि एक सतर्क मतदाता की चिंता, जिसका नाम सही या गलत तरीके से सूची में नहीं है, हमारे लिए मायने नहीं रखती है।"
SIR का काम देख रहे न्यायिक अधिकारियों पर भी की टिप्पणी
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि एसआईआर का कार्य कर रहे न्यायिक अधिकारियों से अत्यधिक दबाव वाली परिस्थितियों में 100% सटीकता की उम्मीद नहीं की जा सकती है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति कम समय सीमा के भीतर प्रतिदिन 1000 से अधिक दस्तावेजों से निपट रहा हो, तो 70% सटीकता को भी 'उत्कृष्ट' माना जाएगा। इसलिए, उन्होंने एक मजबूत अपीलीय तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया।
ये भी पढ़ें: त्रासदी पर सियासत: कांग्रेस नेता बोले- मंत्री विनाशकारी योजनाओं के समर्थक; 500 मौतें और 50 हजार करोड़ की हानि
हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने याचिका स्वीकार करने में अनिच्छा जताई। उन्होंने कहा कि हम इसे स्वीकार नहीं करेंगे। बेहतर है कि आप वहां (अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष) इसका पालन करें। पीठ ने यह याचिका खारिज कर दी, लेकिन याचिकाकर्ताओं के लिए अपील का उपाय खुला रखा। पीठ ने स्पष्ट किया कि अगर याचिकाकर्ताओं की अपीलें स्वीकार की जाती हैं, तो जरूरी निर्णय लिए जाएंगे।
अन्य वीडियो
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन