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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट से यूपी सरकार को झटका, प्राकृतिक गैस पर VAT लगाने का आदेश खारिज; जानिए मामला

Fri, 15 May 2026 08:19 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 15 May 2026 08:19 PM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि अंतर-राज्यीय प्राकृतिक गैस आपूर्ति पर राज्य VAT नहीं लगाया जा सकता। यह मामला KG-D6 बेसिन से जुड़ा था।

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Supreme Court Quashes UP VAT on Natural Gas, Upholds Inter-State Sale under CST Act
सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI

विस्तार

देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने प्राकृतिक गैस पर राज्य द्वारा लगाए गए वैट (VAT) को अवैध करार देते हुए सरकार की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। यह मामला आंध्र प्रदेश के KG-D6 बेसिन से पाइपलाइन के जरिए उत्तर प्रदेश तक पहुंचाई जाने वाली प्राकृतिक गैस पर टैक्स लगाने से जुड़ा था।

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सुप्रीम कोर्ट का तर्क: यह अंतर-राज्यीय बिक्री है
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह मामला अंतर-राज्यीय बिक्री (Inter-State Sale) के अंतर्गत आता है और इस पर राज्य सरकार VAT नहीं लगा सकती। अदालत ने कहा कि जब किसी अनुबंध के तहत वस्तु का परिवहन एक राज्य से दूसरे राज्य में होता है, तो वह केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम (CST Act) के तहत आता है।
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संविधान और संघीय ढांचे का हवाला
अपने 94 पन्नों के विस्तृत फैसले में कोर्ट ने कहा कि भारत एक संघीय ढांचा है, जहां राज्यों के बीच आर्थिक असमानता मौजूद है। अदालत ने यह भी कहा कि संविधान इस बात की व्यवस्था करता है कि अंतर-राज्यीय व्यापार और कराधान का अधिकार केंद्र सरकार के पास रहे ताकि व्यापार में बाधा न आए।
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सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि पाइपलाइन में गैस अपरिभाषित हो जाती है। कोर्ट ने कहा कि कर कानूनों की व्याख्या सख्ती से की जानी चाहिए और शब्दों का अर्थ बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकता।

किस कंपनी से जुड़ा था मामला?
संविधान के अनुच्छेद 269 और 286 का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि अंतर-राज्यीय व्यापार पर कर लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, न कि राज्यों के पास।इसलिए राज्य सरकार द्वारा लगाया गया VAT संविधान के खिलाफ है। यह विवाद रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और टाटा केमिकल्स तथा इफको जैसे बड़े खरीदारों से जुड़ा था, जो KG-D6 बेसिन से गैस खरीदते हैं।

क्या था पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब उत्तर प्रदेश सरकार ने दावा किया कि राज्य के भीतर उपयोग होने वाली प्राकृतिक गैस पर 21 प्रतिशत वैट लगाया जा सकता है। गैस बिक्री समझौते (GSPA) के अनुसार गैस का 'डिलीवरी पॉइंट' आंध्र प्रदेश के गादीमोगा में तय था, जहां से गैस विभिन्न राज्यों से होते हुए उत्तर प्रदेश तक पहुंचती थी। हालांकि राज्य कर विभाग का तर्क था कि पाइपलाइन में गैस अन्य स्रोतों के साथ मिल जाती है, इसलिए अंतिम उपयोग के समय इसे स्थानीय बिक्री माना जाना चाहिए।

माधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी रोहित चतुर्वेदी की समयपूर्व रिहाई का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 2003 में कवयित्री माधुमिता शुक्ला हत्याकांड के दोषी रोहित चतुर्वेदी की समयपूर्व रिहाई का आदेश दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें उनकी रिहाई की सिफारिश को अस्वीकार किया गया था।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुयान की पीठ ने गृह मंत्रालय के 9 जुलाई 2025 के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि यह निर्णय मनमाना, बिना कारण बताया गया और कानूनन अस्थिर है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि उत्तराखंड सरकार द्वारा की गई सिफारिश के बावजूद गृह मंत्रालय ने बिना कोई ठोस कारण बताए रिहाई से इनकार कर दिया, जो कानून की दृष्टि से उचित नहीं है।

अदालत ने कहा कि किसी भी प्रशासनिक आदेश में कारण बताना केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण आधार है। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा "जब किसी निर्णय में कारण नहीं दिए जाते, तो वह आदेश स्वाभाविक रूप से मनमाना माना जाता है और न्यायिक समीक्षा के योग्य होता है।"
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