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Supreme Court: 'ट्रांसजेंडर कैदियों के साथ हो अन्य कैदियों की तरह व्यवहार'; शीर्ष कोर्ट की समिति ने की सिफारिश

Thu, 31 Aug 2023 07:33 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 31 Aug 2023 07:33 PM IST
सार

25 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में जेल सुधारों के पहलू पर गौर करने और जेलों में भीड़भाड़ समेत कई पहलुओं पर सिफारिशें करने के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व जस्टिस अमिताभ रॉय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था।

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Supreme Court panel on prison reforms says Transgender prisoners must be treated at par with other inmates
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट की जेल सुधार समिति ने ट्रांसजेंडर कैदियों के साथ अन्य श्रेणियों के कैदियों की तरह व्यवहार करने पर जोर दिया है। समिति ने यह भी कहा है कि ऐसा करने से ट्रांसजेंडर कैदियों को समान अधिकार और सुविधाएं मिल सकेंगी। समिति ने अपनी रिपोर्ट के जरिए यह भी सिफारिश की है कि सभी स्तरों पर जेल कर्मचारियों और सुधारात्मक प्रशासन, विशेष रूप से सुरक्षा कर्मियों को पर्याप्त और नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। ताकि वे ट्रांसजेंडर कैदियों के साथ उचित रूप से बातचीत करने में सक्षम हो सकें।

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गौरतलब है कि 25 सितंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में जेल सुधारों के पहलू पर गौर करने और जेलों में भीड़भाड़ समेत कई पहलुओं पर सिफारिशें करने के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व जस्टिस अमिताभ रॉय की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति का गठन किया था। इस समिति ने शीर्ष अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इसके अंतिम सारांश में कहा गया है कि ट्रांसजेंडर कैदियों के खिलाफ दुर्व्यवहार, उत्पीड़न या हिंसा की घटनाओं पर अंकुश लगाया जाना चाहिए। इसके लिए अकादमिक व्यक्तियों के साथ कार्यशालाओं और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाने चाहिए। 
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समिति ने सिफारिश की है कि राज्य सरकारों और जेल विभागों को ट्रांसजेंडर कैदियों के खिलाफ सभी प्रकार की हिंसा, भेदभाव और अन्य नुकसान को खत्म करने के लिए उचित और प्रभावी उपाय करने चाहिए। पैनल ने कहा कि ट्रांसजेंडर कैदियों को उन्हें दिए गए अधिकारों और सुविधाओं (स्वास्थ्य देखभाल और चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच सहित) का प्रयोग भी अन्य श्रेणियों के कैदियों के बराबर होना चाहिए। रिपोर्ट के 'ट्रांसजेंडर कैदी' टाइटल वाले अध्याय में समिति ने कहा है कि यह भी जरूरी है कि ट्रांसजेंडर कैदियों को अन्य कैदियों से अलग करने के किसी भी और सभी प्रयासों के परिणामस्वरूप उनका एकांत या अलगाव नहीं होना चाहिए।
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अपनी सिफारिशों में, पैनल ने यह भी कहा है कि मॉडल जेल मैनुअल, 2016 को संशोधित करने की आवश्यकता है। साथ ही ट्रांसजेंडर व्यक्तियों (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के अनुसार उनकी विशेष जरूरतों को सुनिश्चित करने के लिए विशिष्ट प्रावधानों पर अलग नियम बनाए जाने चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि जेल विभाग यह सुनिश्चित करेंगे कि जेलों में विशेष रूप से ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए अलग स्नान और शौचालय क्षेत्रों के साथ पर्याप्त स्वच्छता सुविधाएं हों।


समिति ने कहा है कि प्रवेश के समय प्रत्येक ट्रांसजेंडर कैदी के लिए सामाजिक-मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद एक व्यापक स्वास्थ्य जांच की जानी चाहिए। बता दें कि 27 दिसंबर, 2022 के अंतिम सारांश को नौ भागों में बांटा गया है। इनमें जेलों में अप्राकृतिक मौतों, ट्रांसजेंडर कैदियों और मौत की सजा वाले दोषियों पर अध्याय शामिल हैं।

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