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सड़क हादसों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: लेन ड्राइविंग की कमी को बताया वजह, केंद्र को सुरक्षा बोर्ड बनाने का आदेश
Thu, 14 May 2026 08:02 AM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 14 May 2026 08:02 AM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने देश में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए 'लेन ड्राइविंग' के अभाव को हादसों का मुख्य कारण बताया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को फटकार लगाते हुए तीन महीने के भीतर 'सड़क सुरक्षा बोर्ड' गठित करने का आदेश दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने देश में सड़क सुरक्षा की खराब स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत में लेन ड्राइविंग की कोई व्यवस्था नहीं है जिसके चलते बड़े पैमाने में सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि सार्वजनिक परिवहन वाहनों में लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन अनिवार्य रूप से लगाए जाएं। अदालत ने सड़क सुरक्षा बोर्ड नहीं बनाए जाने पर भी नाराजगी जताई और केंद्र सरकार को अंतिम मौका देते हुए तीन महीने के भीतर बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ 2012 में दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देशभर में सड़क सुरक्षा उपायों को लागू करने की मांग की गई थी। यह याचिका सर्जन एस राजशेखरन ने दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा, इस देश में कैसे सुनिश्चित किया जाए कि चालक लेन ड्राइविंग का पालन करें? यहां लेन ड्राइविंग की कोई अवधारणा ही नहीं है। अिधकतर हादसे इसी वजह से होते हैं। अदालत ने कहा कि लेन में वाहन चलाने की व्यवस्था लागू होने से दुर्घटनाओं में काफी कमी आ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि केंद्र सरकार ने 2018 में यह व्यवस्था अनिवार्य की थी, लेकिन अब तक केवल एक प्रतिशत सार्वजनिक वाहनों में ही ये उपकरण लगाए गए हैं।
बिना ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन के न दें फिटनेस प्रमाणपत्र
अदालत ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक परिवहन वाहन को तब तक फिटनेस प्रमाणपत्र या परमिट नहीं दिया जाए, जब तक उसमें ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन नहीं लगे हों। अदालत ने केंद्र सरकार को वाहन निर्माताओं के साथ बातचीत कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि ये उपकरण निर्माण के समय ही लगाए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इन उपकरणों की जानकारी वाहन एप और पोर्टल में दर्ज हो ताकि वास्तविक समय में निगरानी की जा सके। अदालत ने कहा कि पुराने वाहनों में भी ये उपकरण लगाए जाएं।
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स्पीड लिमिटिंग डिवाइस भी लगाने को कहा
स्पीड गवर्नर यानी गति नियंत्रक उपकरणों के मामले में भी अदालत ने नाराजगी जताई। कई राज्यों द्वारा अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर अदालत ने कहा कि सभी सार्वजनिक वाहनों में स्पीड लिमिटिंग डिवाइस लगाना जरूरी है। राज्यों को वाहन और परिवहन पोर्टल के आंकड़ों के साथ नई विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।
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जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ 2012 में दायर उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें देशभर में सड़क सुरक्षा उपायों को लागू करने की मांग की गई थी। यह याचिका सर्जन एस राजशेखरन ने दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान जस्टिस पारदीवाला ने कहा, इस देश में कैसे सुनिश्चित किया जाए कि चालक लेन ड्राइविंग का पालन करें? यहां लेन ड्राइविंग की कोई अवधारणा ही नहीं है। अिधकतर हादसे इसी वजह से होते हैं। अदालत ने कहा कि लेन में वाहन चलाने की व्यवस्था लागू होने से दुर्घटनाओं में काफी कमी आ सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई कि केंद्र सरकार ने 2018 में यह व्यवस्था अनिवार्य की थी, लेकिन अब तक केवल एक प्रतिशत सार्वजनिक वाहनों में ही ये उपकरण लगाए गए हैं।
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बिना ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन के न दें फिटनेस प्रमाणपत्र
अदालत ने कहा कि किसी भी सार्वजनिक परिवहन वाहन को तब तक फिटनेस प्रमाणपत्र या परमिट नहीं दिया जाए, जब तक उसमें ट्रैकिंग डिवाइस और पैनिक बटन नहीं लगे हों। अदालत ने केंद्र सरकार को वाहन निर्माताओं के साथ बातचीत कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि ये उपकरण निर्माण के समय ही लगाए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इन उपकरणों की जानकारी वाहन एप और पोर्टल में दर्ज हो ताकि वास्तविक समय में निगरानी की जा सके। अदालत ने कहा कि पुराने वाहनों में भी ये उपकरण लगाए जाएं।
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स्पीड लिमिटिंग डिवाइस भी लगाने को कहा
स्पीड गवर्नर यानी गति नियंत्रक उपकरणों के मामले में भी अदालत ने नाराजगी जताई। कई राज्यों द्वारा अनुपालन रिपोर्ट दाखिल नहीं करने पर अदालत ने कहा कि सभी सार्वजनिक वाहनों में स्पीड लिमिटिंग डिवाइस लगाना जरूरी है। राज्यों को वाहन और परिवहन पोर्टल के आंकड़ों के साथ नई विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है।