सु्प्रीम कोर्ट ने कहा देशभर के सभी स्कूलों के पाठ्यक्रमों में शामिल हो पर्यावरण का विषय
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सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में स्कूल पाठ्यक्रमों में पर्यावरण विषय को जगह देने वाले अपने निर्देश का पालन करने के लिए कहा है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार को कोर कमेटी का गठन करने के लिए कहा है। कमेटी इस पर निगरानी करेगी और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी राज्य एजुकेशन बोर्ड इसको अपनाए।
चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय को नोडल एजेंसी बताते हुए अदालती निर्देर्शों पर गौर करने के लिए कहा है। मंत्रालय सभी स्टेक होल्डरों को एक प्लेटफार्म पर लाने की कोशिश करेगा, जिससे सभी एक-दूसरे केविचारों का आदान-प्रदान कर सकें। पीठ ने यह चेतावनी दी है कि अगर राज्य हमारे आदेशों का पालन नहीं करेंगे तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।
अदालत पर्यावरणविद् एमसी मेहता की याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में स्कलों और कॉलेजों में पर्यावरण विषय शामिल करने की गुहार की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले वर्ष 1991 और फिर 2003 एनसीईआरटी को पर्यावरण विषय को पाठ्यक्रम में शामिल करने का आदेश दिया था। याचिकाकर्ता ने शुक्रवार को इन आदेशों का पीठ केसमक्ष जिक्र किया।
पयार्वरण विषय को जरूरी विषय बनाने को लेकर तत्काल कदम उठाए जाएं
पीठ ने कहा है कि विश्वविद्यालय अनुदाय आयोग विश्वविद्यालयों में पर्यावरण का कोर्स लाने की दिशा में उचित कदम उठाएंगे। साथ ही पीठ ने सभी राज्यों और सभी शिक्षा बोर्ड से मैट्रिक और इंटर के स्तर पर पयार्वरण विषय को जरूरी विषय बनाने को लेकर तत्काल कदम उठाने के लिए कहा है।
पीठ ने कहा कि उसकेआदेशों का पालन होना चाहिए और जो राज्य इसका पालन नहीं करेंगे तो उन पर कार्रवाई होगी। पीठ ने केंद्र सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल(एएसजी) पीएस पटवालिया से कहा कि मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय को कोर कमेटी का गठन करने के लिए कहा जाए और सचिव को कोर कमेटी का अध्यक्षता करने का निर्देश दिया जाए। पीठ ने एएसजी को एक हफ्ते में रोडमैप तैयार कर देने के लिए कहा है।